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बुनियादी ढांचे के सौदे पर चीन के नेता इटली का दौरा किया

मिलान : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्यक्रम के माध्यम से इटली के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने के उद्देश्य से दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू कर रहे हैं, जिसने इटली के यू.एस. और यूरोपीय सहयोगियों के बीच संदेह बढ़ा दिया है।

श्री शी शुक्रवार को राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से रोम में मिलेंगे, 2017 में चीन की अपनी राजकीय यात्रा के लिए। श्री मटारेला ने कहा कि शी की यह यात्रा “बंधन की दृढ़ता और आपसी सम्मान” की अभिव्यक्ति है। दोनों देशों के बीच जो 2020 में 50 साल के राजनयिक संबंधों का जश्न मनाता है।

श्री शी बाद में अज्ञात सैनिकों के लिए इटली के स्मारक पर एक पुष्पांजलि समारोह में भाग लेंगे और संसद का दौरा करेंगे।

राज्य की यात्रा का केंद्रबिंदु शनिवार को चीन के “बेल्ट एंड रोड” इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए इटली को पहला बड़ा लोकतंत्र बनाने के लिए ज्ञापन पर हस्ताक्षर होगा।

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चीन के रासायनिक संयंत्र में विस्फोट में 44 की मौत

बीजिंग : पूर्वी चीन के एक औद्योगिक पार्क में हुए विस्फोट में शुक्रवार की सुबह लगभग 44 लोग गिर गए और कई लोग घायल हो गए।जियांगशुई काउंटी की सरकार के अनुसार, यानचेंग,जियांगशुई प्रांत के एक रासायनिक औद्योगिक पार्क में एक उर्वरक कारखाने में आग लगने के बाद गुरुवार को विस्फोट हुआ।

शुक्रवार तड़के तक मरने वालों की संख्या आधिकारिक तौर पर 44 बताई गई है, रिपोर्ट में कहा गया है कि चाइना डेली।30 से अधिक महत्वपूर्ण स्थानीय अधिकारी ने बताया कि विस्फोट में 32 लोग घायल हो गए और 58 गंभीर रूप से घायल हो गए। आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने कहा कि घटना स्थल से 88 लोगों को बचाया गया है।

चश्मदीदों ने कहा कि कीटनाशकों के प्लांट में हुए धमाके की वजह से हल्के झटके आने की आशंका के चलते इमारतों को गिरा दिया गया। विस्फोट से आसपास के रिहायशी मकानों की खिड़कियां भी चकनाचूर हो गईं।

मिनिस्ट्री ऑफ इमरजेंसी मैनेजमेंट ने कहा कि जियांगशुई के फायर फाइटर ब्रिगेड ने 928 कर्मियों के साथ 176 फायर ट्रक जुटाए हैं।

सीसीटीवी के साथ एक साक्षात्कार में बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ केमिकल टेक्नोलॉजी में लागू रसायन विज्ञान के एक प्रोफेसर ने कहा कि जहरीले रसायनों के रिसाव से आसपास के क्षेत्रों में लोगों और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।प्रोफेसरों ने कहा कि निवासियों को जल्द से जल्द वहां से निकाला जाना चाहिए।

साइट के करीब स्कूल
शहर के पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, विस्फोट से 500 मीटर के दायरे में रासायनिक पार्क और इसके आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था, लेकिन तेज हवाओं से भारी धुआं उठने की आशंका है।अधिकारियों ने कहा कि कोई भी व्यक्ति रासायनिक पार्क में नहीं रहता है, जबकि आसपास के सभी लोगों को निकाल लिया गया है।

यानचेंग के शिक्षा विभाग ने कहा कि विस्फोट में घायल हुए लोगों में स्कूली छात्र थे। क्षेत्र के ऑनलाइन मानचित्र इंगित करते हैं कि साइट के करीब कम से कम 10 स्कूल हैं।बीजिंग यूथ डेली ने बताया कि विस्फोट बेंजीन के कारण हुआ और संयंत्र के एक उत्पादन क्षेत्र में हुआ।रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र के अन्य संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ।

प्लांट से करीब 1.5 किलोमीटर दूर रहने वाले एक गवाह सुमी ने हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि विस्फोट से उसकी सभी खिड़कियां चकनाचूर हो गईं।

जियांगशुई तियानजैई केमिकल कंपनी, जो संयंत्र का मालिक है, 2007 में स्थापित किया गया था। इसके व्यवसाय में हाइड्रोक्सीबेनज़ोइक एसिड जैसे रासायनिक उत्पादों का निर्माण शामिल है।

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चीन में ‘रोबोट भी चौकीदार’

बीजिंग : चीन की राजधानी बीजिंग में एक आवासीय समुदाय ने अपनी तरह का पहला ‘रोबोट चौकीदार’ तैनात किया है, जो लोगों के चेहरे की तस्वीरों को कैद कर सकता है और उनसे बातचीत कर सकता है। इस रोबोट से अब रात में किसी व्यक्ति को चौकीदारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बीजिंग एयरोस्पेस ऑटोमैटिक कंट्रोल इंस्टीट्यूट (बीएएसीआई) के परियोजना निदेशक लियु गांगजुन ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स को बताया कि रोबोट मेईबाओ ना केवल गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखता है, बल्कि बीजिंग में मेईयुआन समुदाय के लोगों को उपयोगी जानकारी भी मुहैया कराता है।

उन्होंने बताया कि इस रोबोट का दिसंबर, 2018 से अप्रैल, 2019 तक परीक्षण किया जा रहा है। लियु ने बताया कि बीएएसीआई ने चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हिकल टेक्नोलॉजी की मदद से इसे विकसित किया है। उन्होंने बताया कि अगर सोसाइटी में कोई संदिग्ध दिखता है, तो मेईबाओ उसे पहचान लेगा और अलार्म बजने लगेगा।

उन्होंने बताया कि यह रोबोट मौसम की भविष्यवाणी भी कर सकता है और मजेदार कहानियां तथा गाने भी बजा सकता है, जिससे कई बच्चे उससे बात करने के लिए आकर्षित होते हैं।

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बेल्ट और रोड डील के साथ शी ने इटली-चीन संबंधों में ‘नए युग’ का शुरुआत करेंगे

​रोम : इटली और चीन तथाकथित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) और अन्य परियोजनाओं के साथ सहयोग के एक नए युग ’में प्रवेश करेंगे, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को इटली की राज्य यात्रा से पहले कहा।

बीआरआई के लिए साइन अप करने वाला इटली पहला जी 7 राष्ट्र बन गया है, जो एक बड़ी परियोजना है जो चीन, यूरेशिया और अफ्रीका के बीच नए समुद्री और भूमि मार्गों को विकसित करने का प्रयास करता है।

इस यात्रा के साथ, मैं इटली के नेताओं, हमारे द्विपक्षीय संबंधों के दिशानिर्देशों और नए युग में उनका नेतृत्व करना चाहता हूं, ’शी ने इटली के कोरिएरे डेला सेरा अखबार में एक ऑप-एड में कहा।

हम रोम और बीजिंग के बीच, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक ’लिंक को देखते हुए, बेल्ट और रोड – द न्यू सिल्क रोड को एक साथ बनाने के लिए इतालवी समकक्षों के साथ मिलकर तैयार हैं।

शी ने इटली में चीनी निवेश की संभावनाओं को उठाया ‘नौवहन, विमानन, एयरोस्पेस और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में बेल्ट एंड रोड के लिए एक नया युग बनाने के लिए।’ चीनी नेता, जो गुरुवार से शनिवार तक इटली में रहेंगे, ने इटली के श्रद्धांजलि दी। प्राचीन रोम और पुनर्जागरण से ऐतिहासिक विरासत।

एक हल्के नोट पर, उन्होंने कहा कि पिज्जा और तिरुमिसु जैसे युवा चीनी। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने इटली के BRI के समर्थन से सावधान किया है, चीन के बारे में चिंता के बीच यूरोप के दिल में अपनी पैठ मजबूत करने की अनुमति दी जा रही है।

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चीनी मीडिया ने कहा है कि चीन में बने सामानों का इस्तेमाल करना ही होगा

नई दिल्ली : पुलवामा अटैक के बाद भारत व पाकिस्‍तान के संबंधो में आई तनाव तथा पाकिस्‍तान के मित्र चीन द्वारा आतंकी मसूद अजहर के मसले पर अड़चन लगाये जाने के बाद भारत में चीन के प्रति बढ़ती नाराजगी तथा कुछ संगठनों द्वारा चीन निर्मित वस्‍तुआें के बहिस्‍कार की मांग के मद्देनजर पड़ोसी देश की मीडिया ने भारत को चुनौती देते हुए तंज कसा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारतीय विनिमार्ण उद्योग अभी भी अविकसित है और इसमें प्रतिद्वंद्विता की क्षमता नहीं है। यही वजह है कि भारत में चीन निर्मित वस्‍तुओं के ‘बॉयकॉट की मुहिम अब तक सफल नहीं हुई है। सोमवार को प्रकाशित एक ब्लॉग में कहा गया है, ‘कुछ भारतीय विश्लेषक मेड इन चाइना प्रॉडक्ट्स के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। खासकर मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयास को यूएन में चीन द्वारा रोके जाने के बाद, लेकिन इतने सालों से बॉयकॉट का प्रयास असफल क्यों रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि भारत खुद प्रॉडक्ट्स का उत्पादन नहीं कर सकता है।’ इसमें आगे कहा गया है, ‘पसंद करें या नहीं, उन्हें अभी भी चीन में बने सामानों का इस्तेमाल करना पड़ेगा क्योंकि अभी भी बड़े पैमाने पर उत्पादन में भारत की क्षमता कम है।’

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अखबार ने कहा कि ‘भारत के भीतर मौजूद ताकतें’ ही देश में सुधारों की प्रक्रिया को रोक रही हैं। लेख में कहा गया है, ‘नई दिल्ली यह समझे, कि भारतीय लोगों का ध्यान चीन की ओर भटकाने से आतंरिक समस्याएं और गंभीर होंगी। भारत और चीन के बीच रिश्ते में सुधार आया है और पेइचिंग व्यापार घाटे के मुद्दे पर भी काम कर रहा है।’ अखबार ने चेताया, ‘यदि आने वाले लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी राष्ट्रवाद को उभारने और लोकप्रियता हासिल करने के लिए चीन का डर दिखाएंगे तो यह खतरनाक होगा। चीनी मामलों को सनसनीखेज बनाने से राजनीतिक करियर चमक सकता है, लेकिन यह देश की अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग या लोगों के जीवनस्तर को नहीं सुधार पाएगा।’

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चीन दलाई लामा के इस दावे को खारिज किया

बीजिंग : चीन ने मंगलवार को दलाई लामा द्वारा इस दावे को खारिज कर दिया कि उनका उत्तराधिकारी भारत में मिल सकता है – एक ऐसा कदम जो बीजिंग द्वारा चुनी गई अगली पंक्ति की वैधता को कम कर सकता है।

14 वें दलाई लामा 1959 से निर्वासित भारत में रह रहे हैं।चीन ने उसे एक “खतरनाक अलगाववादी” करार दिया है, जो “एक-चीन” सिद्धांत को कमज़ोर करता है, जिसका अर्थ है कि तिब्बत, ताइवान और झिंजियांग चीन के अभिन्न अंग हैं।

रायटर से बात करते हुए, दलाई लामा ने कहा कि चीन अपने उत्तराधिकारी की वैधता को लेकर चिंतित है। “भविष्य में, अगर आप दो दलाई लामाओं को आते हुए देखते हैं, तो एक यहाँ से, एक आज़ाद देश में, एक चीनी द्वारा चुना जाता है, और फिर कोई भरोसा नहीं करेगा, कोई भी सम्मान नहीं करेगा (चीन द्वारा चुना गया)। ताकि चीनी के लिए एक अतिरिक्त समस्या हो। यह संभव है, यह हो सकता है, ”83 वर्षीय तिब्बती भिक्षु ने कहा।

इसकी प्रतिक्रिया में, दलाई लामा के दावे को खारिज करने में चीनी विदेश मंत्रालय अप्रतिम था। साक्षात्कार पर प्रतिक्रिया देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म को चीनी कानूनों, नियमों और साथ ही धार्मिक सिद्धांतों को स्थापित करना चाहिए।

“मुझे पता था कि तुम यह सवाल पूछने जा रहे हो। खैर, यहाँ जवाब है: पुनर्जन्म तिब्बती बौद्ध धर्म का अनूठा तरीका है। इसमें निश्चित अनुष्ठान और प्रणालियाँ हैं। चीनी सरकार के पास धार्मिक विश्वासों की स्वतंत्रता की नीति है। हमारे पास तिब्बती बौद्ध धर्म के पुनर्जन्म पर धार्मिक मामलों और नियमों का विनियमन है। हम चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि हम तिब्बती बौद्ध धर्म के ऐसे तरीकों का सम्मान करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा: “पुनर्जन्म प्रणाली सैकड़ों वर्षों से है। 14 वें दलाई को धार्मिक अनुष्ठानों में भी मान्यता दी गई थी और केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था। इसलिए दलाई लामा के पुनर्जन्म को राष्ट्रीय कानूनों और नियमों और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना चाहिए। ”

चीन ने जोर देकर कहा कि उसने चीनी सम्राटों द्वारा निर्धारित लंबी स्थापित परंपरा का अनुसरण करते हुए दलाई लामा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति का अधिकार सुरक्षित रखा।

तिब्बती लोग मानते हैं कि दलाई लामा की आत्मा उनकी मृत्यु के बाद एक बच्चे के शरीर में पुनर्जन्म लेगी, जिन्हें तब अनुष्ठानों के एक सेट के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में पहचाना जाना था।

14 वें दलाई लामा का जन्म 1935 में हुआ था, और यह भारत में लगभग 100,000 तिब्बतियों के साथ निर्वासन में रहता है।

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अमेरिकी आपत्तियों के बावजूद चीन की पहल में शामिल होगा इटली

मिलन : इटालियन प्रीमियर गिउसेप कोंटे ने संयुक्त राज्य अमेरिका की आपत्तियों और शासी गठबंधन के भीतर संदेह के बावजूद चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने के लिए इटली को सात राष्ट्रों का पहला समूह बनाने का संकल्प लिया है।

श्री कोन्टे ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि इस सप्ताह चीनी प्रीमियर के दौरे के दौरान योजनाबद्ध बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इटली के हस्ताक्षर ने रणनीतिक ट्रांस अटलांटिक गठबंधन के भीतर “हमारी स्थिति पर सवाल नहीं खड़ा किया”।

इटली के हस्ताक्षर को उस परियोजना को वैधता प्रदान करने वाला एक बड़ा विकास माना जाएगा जो चीन के साथ यूरोप को जोड़ने वाले समुद्री और समुद्री मार्गों पर लागू होती है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसमें शामिल होने के खिलाफ इटली को चेतावनी दी है, इसे एक चीनी “घमंड परियोजना” कहा है।

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आखिरकार चीन ने माना, मुंबई हमले को सबसे कुख्यात हमला

बीजिंग : चीन ने भारत में साल 2008 में हुए मुंबई हमले को सबसे कुख्यात हमलों में से एक बताकर चौंकाने वाला दिया है। चीन के इस बदले मिजाज से हर कोई शक्ते में है क्योंकि यह वही चीन है जिसने पुलवामा में हुए हमले के मास्टरमाइंड को तकनीकी खराबी का हवाला देकर हुए मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया था। इसी सिल‌सिले में सोमवार को एक पत्र जारी करते हुए चीन ने बयान दिया कि अशांत प्रांत शिंजियान में पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और चरमपंथ ने मानवता को बहुत नुकसान पहुंचाया है। चीन द्वारा जारी के इस पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयब्बा संगठन ने भारत में साल 2008 में जो मुंबई हमला किया था वो अब तक के सबसे कुख्यात हमलों में से एक है। इस श्वेत पत्र को ‘द फाइट अगेंस्ट टेररिज्म एंड एक्सट्रिमिज्म एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन इन शिनजियांग’ नाम दिया गया है। बता दें कि लश्कर-ए-तैयबा के 10 हथियारबंद आतंकवादियों ने 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हमला किया थ। इसमें अमेरिकी नागरिकों सहित 166 लोगों की जान गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

इस वक्त पाक विदेश मंत्री कुरैशी चीन की यात्रा पर है
चीन ने ‘आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई और शिनजियांग में मानवाधिकारों का संरक्षण’ शीर्षक वाला यह श्वेत पत्र ऐसे समय में निकाला गया जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन की यात्रा पर आए हुए हैं। चीन के विदेश परिषद सूचना कार्यालय की तरफ से जारी किए गए इस पत्र में कहा गया कि दुनिया भर में आतंकवाद और उग्रवाद ने शांति व विकास को गहरा खतरा पैदा किया है और लोगों की जान-माल को नुकसान पहुंचाया है।

मसूद को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित होने के प्रस्ताव का किया था संरक्षण
गौरतलब है कि चीन ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी थी जिसके कुछ दिनों बाद अब उसने श्वेत पत्र जारी कर यह बयान दिया है। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर जैश के हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में काफी बढ़ गया था।

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चीन का कहना है कि शिनजियांग में लगभग 13,000 आतंकवादी’ 2014 के बाद से गिरफ्तार किया गया

बीजिंग : चीन ने कहा है कि उसने 2014 के बाद से पारंपरिक रूप से इस्लामिक क्षेत्र शिनजियांग में लगभग 13,000 लोगों को गिरफ्तार किया है और सैकड़ों “आतंकवादी गिरोहों” को तोड़ दिया है।

आंकड़े पश्चिमी उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की स्थिति पर एक सरकारी रिपोर्ट में शामिल किए गए थे जो उइघुर और अन्य मुख्य रूप से मुस्लिम जातीय समूहों के अनुमानित एक मिलियन सदस्यों के इंटर्नशिप पर बढ़ती आलोचना का जवाब देना चाहते हैं।

चीन ने शिविरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में वर्णित किया है और कहा है कि भागीदारी स्वैच्छिक है। हालांकि, पूर्व बंदियों ने कहा कि उन्हें अपमानजनक परिस्थितियों में रखा गया था, इस्लाम त्यागने और चीन के शासन के प्रति निष्ठा के लिए मजबूर किया गया साम्यवादी पार्टी।

सोमवार को जारी लंबी रिपोर्ट में भी कहा गया है कि शिनजियांग में “कानून-आधारित डी-रेडिकलाइजेशन” ने धार्मिक अतिवाद के उदय और प्रसार पर अंकुश लगा दिया है।

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चीनी के राजदूत ने कहा है कि हम भारत की चिंताओं को समझते हैं, जल्द सब ठीक हो जायेगा

नई दिल्ली : मसूद अजहर को वैश्‍विक आतंकी घोषित करने की भारत समेत फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन के प्रयास को असफल करने के बाद वैश्‍विक समुदाय में हो रही चीन की फजीहत तथा किड़कीड़ी के बाद लगता है कि पाकिस्‍तान का यार अब और अपनी बेइज्‍जती नहीं कराना चाहता है। आतंकी समर्थक की छवि न बन जाय इसी बात को ध्‍यान में रखते हुए चीन के भारत में राजदूत लुओ झाहुई ने रविवार को भरोसा दिलाया कि यूएन में मसूद अजहर का मामला जल्द निपटेगा। उन्होंने कहा, हम मसूद को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत हैं। इस मामले को अभी टेक्निकल होल्ड पर रखा गया है। उल्‍लेखनीय है कि चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग की गयी थी। नयी दिल्‍ली स्‍थित चीनी दूतावास में रविवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर चीनी राजदूत ने कहा कि मसूद अजहर मामले पर बातचीत की जा रही है। मेरा विश्वास करें, इस मामले का जल्द ही हल हो जाएगा। पिछले साल वुहान सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग सही दिशा में बढ़ा है। हम इस सहयोग से संतुष्ट हैं और भविष्य को लेकर आशावादी हैं। मसूद अजहर के मामले पर चीन का कहना है कि वह बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है। इस पर अमेरिका ने चीन से अनुरोध किया था कि वह समझदारी से काम लें, क्योंकि भारत-पाक में शांति के लिए मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करना जरूरी है।

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मसूद को चीन के साथ संयम रखने को तैयार है भारत

नई दिल्ली : आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डालने में कितना भी समय लगे भारत चीन के साथ संयम बरतने को तैयार है, लेकिन आतंकवाद पर अपनी स्थिति के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं जिन्हें चीन को पाकिस्तान के साथ सुलझाने की जरूरत है, क्योंकि पाकिस्तान की सरजमीं पर आतंकवादियों के सक्रिय होने के पर्याप्त सबूत हैं जो चीन के भी हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन ये मुद्दे पाकिस्तान के साथ सुलझाए और भारत इस पर संयम बरतेगा।

उन्होंने कहा कि भारत ने चीन सहित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों के साथ अजहर के खिलाफ सबूत साझा किये हैं। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर बुधवार को चीन ने एक बार फिर तकनीकी रूप से रोक लगा दी. भारत ने चीन के इस कदम को निराशाजनक करार दिया था। सूत्रों ने कहा कि भारत सतर्कतापूर्वक इस बात को लेकर आश्वस्त है कि अजहर को आतंकवादियों की वैश्विक सूची में शामिल किया जाएगा, क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना के खिलाफ ठोस मामला है।

सूत्रों ने कहा कि भारत अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति के साथ ना कोई समझौता करेगा और ना ही कोई समझौता खत्म करेगा। नयी दिल्ली मुद्दे पर लंबा इंतजार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 15 में से 14 सदस्यों ने भारत का इस मुद्द पर समर्थन किया है, जबकि सात सदस्य अजहर को सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को सह-प्रायोजित कर रहे हैं।

भारत संयुक्त राष्ट्र के इसे गैरकानूनी करार देने तक अपनी लड़ाई जारी रखेगा। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का ताजा प्रस्ताव पेश किया था। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद यह प्रस्ताव लाया गया था, जिसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

सूत्रों ने कहा कि आतंकवाद ऐसा मुद्दा है जिसपर भारत कोई समझौता नहीं कर सकता अगर चीन को समय चाहिए तो नयी दिल्ली इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत अजहर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रुख नहीं करेगा और अगर अजहर को सूचीबद्ध करने का कोई अन्य रास्ता है तो वह शक्तिशाली संगठन के सदस्यों को उसका पता लगाना होगा।

उन्होंने इस मामले पर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी अन्य देश के मध्यस्थ बनने की संभावना को भी खारिज कर दिया। गौरतलब है कि चीन ने पिछले 10 वर्ष में चौथी बार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर रोक लगाई है।

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चीन ने अर्थव्यवस्था में रफ्तार लाने के लिए किया कई आकर्षक योजनाओं का ऐलान

बीजिंग : चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने शुक्रवार को आर्थिक मोर्चे पर दबाव की बात स्वीकार की। उन्होंने आर्थिक वृद्धि को स्थिर करने के लिए कर कटौती समर्थित नये विदेशी निवेश कानून और बाजार को नयी ऊर्जा देने की योजनाओं की घोषणा की। चीन ने अमेरिका के साथ व्यापार मोर्चे पर तनाव के बीच यह कदम उठाया है। चीन ने इस साल जीडीपी वृद्धि 6 से 6.5 फीसदी के दायरे में रहने का लक्ष्य रखा है। 2018 में यह 6.6 फीसदी पर थी। उसकी यह करीब तीन दशक की सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि दर है।

चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की करीब एक पखवाड़े तक चली बैठक के आखिर में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में ली ने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था नये दबावों का सामना कर रही है, लेकिन हम आर्थिक वृद्धि को उचित सीमा से ज्यादा नीचे नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि 6 से 6.5 फीसदी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चीन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारी मात्रा में नकदी झोंकने का सहारा नहीं लेगा, क्योंकि इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे।

ली ने कहा कि चीन बाजार को नयी ऊर्जा देने के लिए करों और शुल्कों में कटौती करेगा, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करेगा, बाजार में प्रवेश और नये वृद्धि इंजन को बढ़ावा देगा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धी माहौल को बढ़ावा देगा। चीन ने घोषणा कि वह उद्यमों पर वित्तीय दबाव को कम करने के लिए इस साल करों और कॉरर्पोरेट पेंशन भुगतान में कुल 2,000 अरब युआन (297.5 अरब डॉलर) की कटौती करेगा।

उन्होंने कहा कि चीन की संसद एनपीसी द्वारा पारित किया गया नया विदेशी निवेश कानून भविष्य में वृद्धि का प्रमुख कारक साबित हो सकता है। चीन विदेशी निवेशकों के हितों और वैध अधिकारों की रक्षा के लिए विदेशी निवेश कानून के अनुसार नियमों और दस्तावेजों की शृंखला पेश करेगा। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) में 2,929 प्रतिनिधियों ने विदेशी निवेश कानून के पक्ष में, आठ लोगों ने इसके विरोध में और आठ लोगों ने मतदान नहीं किया। यह कानून एक जनवरी 2020 से लागू होगा।

नया कानून विदेशी निवेश को आकर्षित करने और उसके संरक्षण के लिए बेहतर कानूनी सहायता प्रदान करेगा। साथ ही, सरकारी बर्ताव को विनियमित भी करेगा। ली ने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश को स्थिर रखने के लिए चीन इस साल 1.1 करोड़ से अधिक नए शहरी रोजगार सृजित करेगा।

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चीन ताइवान के लिए और अधिक ‘तरजीही नीतियों’ की शुरुआत करेगा

बीजिंग : चीन ताइवान के लिए और अधिक “अधिमान्य नीतियां” पेश करेगा ताकि स्व-शासित द्वीप के निवासियों को अन्य चीनी नागरिकों के समान उपचार का आनंद मिल सके, प्रीमियर ली केकियांग ने 15 मार्च को कहा था।

श्री ली ने कहा कि ताइवान के लोगों को राष्ट्र के लिए हमारे साझा सपने को साकार करने के लिए हाथ से काम करने के लिए आमंत्रित करने के लिए नई पहल लागू की जाएगी। उन्होंने चीन के इस तर्क के लिए हाल ही में पेश किए गए 31 प्रोत्साहनों का पालन करते हुए कहा कि राजनीतिक एकीकरण को तेजी से बढ़ रही आर्थिक गतिविधियों का अनुसरण करना चाहिए। संबंधों।

सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि ताइवान चीन का एक हिस्सा है। यह ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करता है और औपचारिक रूप से कहता है कि यह “शांतिपूर्ण पुनर्मिलन” चाहता है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों पर एक जनवरी के भाषण के दौरान बल के उपयोग को खारिज नहीं किया, जब उन्होंने हांगकांग के पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश के साथ चीन की वर्तमान व्यवस्था के लिए “एक देश, दो सिस्टम” का प्रस्ताव रखा। यह ताइवान को अपनी आर्थिक और कानूनी प्रणाली रखने में सक्षम करेगा।

इस सुझाव को ताइवान के स्वतंत्रता-झुकाने वाले राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने अस्वीकार कर दिया है, जिन्होंने कहा था कि चीन को चीन गणराज्य का निरंतर अस्तित्व स्वीकार करना होगा, 1949 में ताइवान भाग गए मुख्य भूमि सरकार का औपचारिक नाम। अमेरिकी स्विचन मान्यता 1979 में बीजिंग के लिए ताइपे, लेकिन चीन के खतरों के खिलाफ एक प्रमुख ताइवानी बनी हुई है।

चीन पिछले वर्ष के “31 उपायों” के प्रभाव से प्रसन्न दिखाई देता है, और श्री ली ने और भी अधिक लाभ की संभावना व्यक्त की कोई विवरण नहीं देते हुए।

श्री ली ने कहा कि जब दोनों पक्षों के लोग समान विकास के अवसरों का आनंद लेते हैं, तो वे करीब और करीब हो जाएंगे, “श्री ली ने औपचारिक विधायिका के वार्षिक सत्र के समापन दिवस पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा।

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मसूद मामले पर UNSC ने दि चीन को चेतावनी

वाशिंगटन : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के राजनयिकों ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि वह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के मार्ग को बाधित करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में ‘अन्य कदम उठाने पर मजबूर’ हो सकते हैं।

सुरक्षा परिषद के एक राजनयिक ने चीन को असाधारण रूप से कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘यदि चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।’ राजनयिक ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह बात कही।

सुरक्षा परिषद में एक अन्य राजनयिक ने कहा, ‘चीन ने सूची में अजहर को शामिल किये जाने के कदम को चौथी बार बाधित किया है। चीन को समिति को अपना वह काम करने से रोकना नहीं चाहिए, जो सुरक्षा परिषद ने उसे सौंपा है।’ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में होने वाला विचार-विमर्श गोपनीय होता है और इसलिए सदस्य देश सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते. इसलिए राजनयिक ने भी अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘चीन का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उसके स्वयं के बताये लक्ष्यों के विपरीत है।’ उन्होंने पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों और उसके सरगनाओं को बचाने के लिए चीन पर निर्भर रहने को लेकर पाकिस्तान की भी आलोचना की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रोबर्ट पलाडिनो ने भी कहा था कि अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के लिए पर्याप्त कारण हैं। अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने चीन के इस कदम को अस्वीकार्य करार दिया और कहा, ‘चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र को उस जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने से रोक दिया, जिसने फरवरी में भारत में पुलवामा हमला किया था। मैं चीन से अपील करता हूं कि वह संयुक्त राष्ट्र को अजहर पर प्रतिबंध लगाने दे।’

हेरिटेज फाउंडेशन के जेफ स्मिथ, ‘द अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी’ के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी और अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धूमे समेत अमेरिकी थिंक टैंक के कई सदस्यों ने भी चीन के इस कदम की निंदा की। उल्लेखनीय है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर बुधवार को तकनीकी रोक लगा दी।

फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘1267 अल कायदा सैंक्शंस कमेटी’ के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था। गौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गयी थी। इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है।

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चीन ने बताया, संयुक्त राष्ट्र में अजहर मसूद को बचाने के लिए क्यों लगाया ‘वीटो’

बीजिंग : चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के कदम को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बाधित करने के लिए तकनीकी रोक लगाने के अपने फैसले का बृहस्पतिवार को बचाव किया। कहा कि इससे ‘स्थायी समाधान’ तलाशने के लिए संबंधित पक्षों के बीच वार्ता में मदद मिलेगी।यह पूछे जाने पर कि चीन ने मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के कदम को एक बार फिर क्यों बाधित किया, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बीजिंग का फैसला समिति के नियमों के अनुसार है। उन्होंने कहा कि चीन को ‘वास्तव में यह उम्मीद है कि इस समिति के प्रासंगिक कदम संबंधित देशों की मदद करेंगे कि वे वार्ता एवं विचार-विमर्श करें और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए और जटिलता पैदा नहीं हो।’

लु ने कहा, ‘जहां तक 1267 समिति में तकनीकी रोक की बात है, तो हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया है कि समिति के पास मामले के अध्ययन के लिए उचित समय हो और संबंधित पक्षों को वार्ता और विचार-विमर्श के लिए समय मिल सके।’ उन्होंने कहा, ‘सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान ही इस मसले के स्थायी समाधान का अवसर मुहैया करा सकता है। चीन इस मामले से उचित तरीके से निबटने के लिए भारत समेत सभी पक्षों से बातचीत एवं समन्वय के लिए तैयार है।’

भारत ने मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के कदम को चीन की ओर से तकनीकी रूप से बाधित किये जाने के बाद निराशा जतायी थी।उल्लेखनीय है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव पर बुधवार को तकनीकी रोक लगा दी।

फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’ के तहत मसूद को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गयी थी। इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है।समिति के सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 कामकाजी दिन का वक्त था।

यह समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले चीन ने प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक’ लगा दी और प्रस्ताव की पड़ताल करने के लिए और वक्त मांगा। लु ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पिछले साल हुई वुहान शिखर वार्ता संबंधी एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘शी और मोदी ने चार बार मुलाकात की। खासकर वुहान शिखर वार्ता ने काफी प्रगति की। चीन भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है, ताकि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बनाये जा सकें।’
उन्होंने कश्मीर मामले पर कहा कि चीन का रुख स्पष्ट एवं स्थिर है। लु ने कहा, ‘यह भारत एवं पाकिस्तान के बीच का मामला है। हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष मित्रवत वार्ता करेंगे और इस मामले एवं अन्य संबंधित मामलों को सुलझायेंगे।’

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चीनी वीटो पर राजनीति जारी

नई दिल्ली : आतंकी मसूद अजहर पर बैन लगाने के मंसूबों पर एक बार फिर चीन ने पानी फेर दिया है जिसके बाद मामले को लेकर राजनीति जारी है। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार सुबह पीएम मोदी पर निशाना साधा और कहा कि कमजोर मोदी, शी जिनपिंग से इतने डरे हुए हैं कि चीन ने भारत के खिलाफ कदम उठाया और उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। इस ट्वीट के बाद भाजपा ने प्रेस कॉफेंस किया और कांग्रेस अध्‍यक्ष को आड़े हाथ लिया।

भाजपा ने कहा कि चीन को छोड़कर यूएनजीसी के सभी देशों ने भारत का समर्थन किया, यह भारत की कूटनीतिक जीत है। पहले भारत को इसके लिए प्रयास करना पड़ता था लेकिन अब ये देश खुद भारत का समर्थन कर रहे हैं। मसूद अजहर के मामले पर चीन के रूख से भारत दुखी है। मसूद अजहर के मामले पर चीन के रूख से भारत दुखी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भारत को पीड़ा होती है तो राहुल गांधी को खुशी क्यों होती है ? राजनीति में विरोध होना चाहिए लेकिन आतंकवाद के मसले पर इस तरह का रवैया? आखिर राहुल गांधी को हो क्या गया है?

आगे रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2009 में UPA द्वारा मसूद अजहर पर बैन लगवाने के प्रयास के दौरान चीन ने यही रवैया अपनाया था तब क्या राहुल गांधी ने कोई ट्वीट किया था ? राहुल गांधी के तो चीन से अच्छे संबंध हैं। डोकलाम मुद्दे पर वह चीनी दूत से मुलाकात करते हैं। तो मसूद अजहर के मुद्दे पर वह चीन के साथ अपने संबंधों का प्रयोग करके आतंक के खिलाफ लड़ाई को आगे क्यों नहीं बढ़ाते।

उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि ट्विटर से देश की विदेश नीति नहीं चलती। पुलवामा हमले के बाद राहुल गांधी सिर्फ 2 दिन तक सरकार के साथ खड़े रहे। उसके बाद उन्होंने एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा दिये। उनके नेता इसका सबूत मांग रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी के ट्वीट जैश-ए-मोहम्मद के दफ्तर में बड़े चाव से पढ़े जाएंगे और दिखाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि 26/11 हमले के बाद सुरक्षाबलों के तैयार होने के बाद बावजूद भी यूपीए की सरकार ने उन्हें कार्रवाई का आदेश क्यों नहीं दिया। इधर , भाजपा द्वारा राहुल गांधी को चीन पर दबाव बनाने की बात पर कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया आयी है। उन्होंने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि रविशंकर प्रसाद जी चाहते हैं कि राहुल जी चीन पर दबाव बनाएं… चिंता मत करिए, 2019 में चार्ज लेने के बाद हम चीन पर दबाव जरूर बनाएंगे।

प्रियंका चतुर्वेदी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि पीएम मोदी ने अजहर मामले पर चीन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं, जम्मू-कश्मीर में चुनाव में देरी करके पाकिस्तान और उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में आत्मसमर्पण कर दिया। ऐसे में भाजपा आंतरिक सुरक्षा पर और आतंक के खिलाफ सख्त होने का दावा कैसे कर सकती है ?

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आखिरकार चीन कैसे बचा लेता है मसूद अजहर को

नई दिल्ली : पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन जैश – ए – मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को एक बार फिर चीन ने बचा लिया। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्यों ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी करार देने पर सहमति जतायी जबकि चीन ने वीटो लगाकर एक बार फिर विरोध दर्ज कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने भारत के खिलाफ इस तरह वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। इससे पहले की आप इस पर प्रतिक्रिया दें आइये समझते हैं वीटो पावर क्या है ?

वीटो क्या है

वीटो ( VETO) अगर इसके शाब्दिक अर्थ पर चर्चा करें तो हम पायेंगे कि यह लैनिट भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है अनुमति नहीं देना। भारत यूएन में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयास करता रहा है लेकिन इस रास्ते में भी चीन अड़ंगा डाले खड़ा है।आप सभी जानते हैं कि इस वक्त यूएन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं जिनमें चीन, फ्रांस,रूस, यूके और अमेरिका के पास वीटो पावर है। इस पावर का मतलब यह है कि स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई देश असहमत है तो वीटो लगाकर उस फैसले को रोक सकता है। चीन हर बार मसूद के मामले में यही करता है। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्य उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने के समर्थन में थे लेकिन चीन उसके विरोध में आ गया और पूरा प्रस्ताव निरस्त हो गया।

वीटो ( VETO ) का इतिहास क्या है
वीटो पावर के इस्तेमाल का पहली बार जिक्र आता है 16 फरवरी, 1946 को सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यूएसएसआर) ने इसका पहली बार इस्तेमाल किया था। लेबनान और सीरिया से विदेशी सैनिकों की वापसी के प्रस्ताव पर यूएसएसआर ने वीटो लगा दिया था। युक्रेन के शहर क्रीमिया में साल 1945 में एक सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन को याल्टा या क्रीमिया सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है। यहां सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसफ स्टालिन ने वीटो पावर का प्रस्ताव रखा था। अगर वीटो पावर के इतिहास पर गौर करें तो हम पायेंगे कि साल 1920 में लीग ऑफ नेशंस की स्थापना के बाद ही वीटो पावर वुजूद में आ गया था। उस समय से अब तक वीटो का 291 बार इस्तेमाल हो चुका है। इस साल ही वीटो पावर का दो बार इस्तेमाल किया गया। 13 मार्च, 2019: मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो का इस्तेमाल किया। 28 फरवरी, 2019: वेनेजुएला के राष्ट्रपति संकट के एक प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो किया ।

10 साल में चौथी बार चीन ने की चालबाजी
2009 : मुंबई हमले के बाद पहली बार मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया।
2016 : भारत ने सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा, जिसे चीन ने रोक दिया।
2017 : अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से प्रस्ताव पारित किया, इस पर चीन ने वीटो कर दिया।
2018 : फ्रांस के प्रस्ताव का ब्रिटेन व अमेरिका ने समर्थन किया, लेकिन बीजिंग ने फिर डाला अड़ंगा।

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यदि चीन अज़हर पदनाम को अवरुद्ध करना जारी रखा तो ‘अन्य कार्यों को आगे बढ़ाएं’: यूएनएससी राजनयिक

वॉशिंगटन : चौथी बार चीन द्वारा पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के नेता मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के कदम से नाराज होकर, यूएनएससी सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा परिषद में उन्हें “अन्य कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया जा सकता है” बीजिंग इस नीति के साथ जारी रहा।

चीन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 समिति में पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के नेता मसूद अजहर के लिए लिस्टिंग अनुरोध पर एक तकनीकी पकड़ रखी।एक सुरक्षा परिषद के राजनयिक, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बात की, ने कहा कि अजहर को सूचीबद्ध करने के लिए “निर्विवाद” मामला है।

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति में पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूहों और व्यक्तियों की सूची से बचाने के लिए चीन पर अक्सर भरोसा किया है। मसूद अजहर को नामित करने का मामला – संयुक्त राष्ट्र के एक समूह के नेता पहले से ही अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन – को अस्वीकार्य कहते हैं, ”राजनयिक ने एक ईमेल बयान के माध्यम से कहा।

“यह चौथी बार है जब चीन ने इस सूची में अपनी पकड़ बनाई है। चीन को समिति को वह कार्य करने से नहीं रोकना चाहिए, जिसे सुरक्षा परिषद ने करने के लिए सौंपा है। लिस्टिंग का आयोजन करने के लिए चीन का कदम आतंकवाद का मुकाबला करने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढ़ाने के अपने स्वयं के घोषित लक्ष्यों के साथ असंगत है। यदि चीन इन लक्ष्यों के बारे में गंभीर है, तो उसे पाकिस्तान या किसी अन्य देश के आतंकवादियों को परिषद के प्रति जवाबदेह होने से नहीं बचाना चाहिए, ”बयान में कहा गया है।

“यदि चीन इस पदनाम को अवरुद्ध करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य राज्यों को सुरक्षा परिषद में अन्य कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। यह उस पर नहीं आना चाहिए। ”

पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद, सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्यों – अमेरिका, फ्रांस और यूके – ने अजहर को एक गौरवशाली आतंकवादी नामित करने का संकल्प लिया था।

चीन को छोड़कर, जो सुरक्षा परिषद में वीटो पावर का उत्पादन करता है, अल-कायदा से पहले सभी अन्य यूएनएससी सदस्य इस कदम के साथ बोर्ड पर थे (1267) प्रतिबंध समिति।

भारत ने चीन के फैसले पर निराशा व्यक्त की है लेकिन कहा है कि भारतीयों पर हमले में शामिल आतंकवादी नेताओं को न्याय दिलाने के लिए “सभी उपलब्ध रास्ते का पीछा करेगा”।

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चीन ने मसूद के खिलाफ सबूत की मांग की, भारत देगा पुख्ता सबूत

नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में बुधवार को होने वाली बैठक में पुलवामा में हुये आतंकी हमले के दोषी जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाने के लिये भारत पूरी कोशिश में जुटा है। चीन मसूद के खिलाफ कार्रवाई से पहले सबूत मांग रहा है ‌इसलिये भारत ने यूएनएससी में तमाम पुख्ता सबूत पेश करने की तैयारी कर ली है।

चीन ने अभी अपने रूख की घोषणा नहीं की
रिपोर्टों के अनुसार यूएनएससी की ‘1267 समिति’ द्वारा इस प्रस्ताव को उठाये जाने की उम्मीद है। भारत और यूएनएससी के अन्य सदस्यों द्वारा लाये गये इस तरह के प्रस्तावों पर तीन बार रोड़े अटका चुके चीन ने अभी अपने रूख की घोषणा नहीं की है।

पहले दिये सबूत को नहीं मान रहा चीन
भारत द्वारा मसूद को वैश्विक आतंकी घो‌षित करने के लिये पहले भी यूनएनएसी में सबूत सौंपे गये हैं लेकिन चीन इसे नहीं मान रहा है। मसूद के बचाव में चीन हमेेशा से उतरता रहा है यहां तक कि उसने वीटो का भी इस्तेमाल किया था। इसी संदर्भ में जब भारत की ओर से की गयी अपील के बारे में चीन का रूख पूछा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने मीडिया से कहा था कि ‘पहले तो मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि यूएनएससी यूएन की एक मुख्य संस्था है और इसके पास कड़े मानक और प्रक्रिया के नियम हैं। कुछ रिपोर्टों में यूएनएससी के अंदर की जानकारी दी गई है। मुझे नहीं पता कि क्या इसे एक सबूत के रूप में गिना जा सकता है’।

ऑडियो टेप सहित कई सबूत सौंपेगा भारत
इस बार मसूद को बचने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के बाकि सदस्य भी आतंक पर कड़ा प्रहार चाहते हैं। चीन की चालाकी को मात देने के लिये भारत जो डोजियर यूएनएससी में सौंपने वाला है उसमें मसूद अजहर और उसके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ओर से जारी कई ऑडियो टेप के अलावा खुद को जैश का मुखिया बताने वाला मसूद अजहर का ऑडियो टेप भी शामिल है।
आसान नहीं होगा मसूद को बचाना
इसबार मसूद के बचाव की हर चीनी कोशिश नाकाम होगी क्योंकि जैश के पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद भारत की जैश सरगना के खिलाफ कूटनीति के समर्थन में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक प्रस्ताव पेश किया था।

भारतीय कोशिश के समर्थन का दिखावा
पुलवामा आतंकी हमले के बाद विश्व बिरादरी द्वारा पाकिस्तान और जैश के खिलाफ उठाये गये कदम को देखते हुये चीन ने भी भारत के साथ खड़े होने का दिखावा किया था क्योंकि वह भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में खटास नहीं चाहता है। वहीं पाकिस्तान का साथ देना उसकी मजबूूरी है क्योंकि वहां चीन कई योजनायें संचालित कर रहा है।

बता दें कि 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुये आतंकी हमले के बाद भारत ने जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के ‌लिये कमर कस ली है। वहीं भारतीय वायुसेना ने गुलाम कश्मीर स्थित आतंकी कैंपों को ध्वस्त कर पाकिस्तान और वहां पल रहे आतंकियों को साफ संदेश ‌दिया था कि किसी भी सूरत में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

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प्रशांत क्षेत्र में “पे-डे लोन डिप्लोमेसी” का उपयोग करेगा : यू.एस. राजनयिक

बीजिंग : चीन, प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव को बढ़ाने के लिए “पे-डे लोन डिप्लोमेसी” का उपयोग कर रहा है, ऑस्ट्रेलिया में नए अमेरिकी राजदूत ने बुधवार को कहा, टिप्पणियां जो क्षेत्रीय तनावों को भड़काने के लिए खतरा हैं।

प्रशांत क्षेत्र में अधिक प्रभाव के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी चीन से जूझ रहे हैं – एक ऐसा क्षेत्र जिसमें संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वोट हैं और एक संसाधन-समृद्ध महासागर के विशाल स्वैथ को नियंत्रित करता है।

भू-राजनीतिक स्पर्धा ने हाल के महीनों में दोनों पक्षों को इस क्षेत्र में विदेशी सहायता बढ़ाने के लिए देखा है, जो कि पश्चिम का कहना है कि प्रशांत को वित्तीय संकट में पड़ने से रोकने के लिए और बीजिंग से राजनयिक दबाव के लिए अतिसंवेदनशील होने की आवश्यकता है।