क्या पहाड़… क्या मैदान… कुदरत ने हर जगह तबाही मचा रखी है, बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने लोगों की जान मुश्किल में डाल दी है, जम्मू में तो इतना पानी बरसा है कि सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. जम्मू के कई शहर पानी पानी हैं, हिमाचल प्रदेश में भी मौसम की मार है. ताजा मामला कटरा में वैष्णो देवी यात्रा मार्ग में बड़ा हादसे का है. यहां लैंडस्लाइड की चपेट में आने से 30 लोगों की मौत हो गई है. वहीं कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं. वहां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वैष्णो देवी यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है.
जम्मू में कुदरत ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि वहां का मंजर देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. कल डोडा में बादल फटने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि वैष्णो देवी में भी कहर टूट पड़ा. वैष्णो देवी में भारी भूस्खलन के चलते 31 लोगों को मौत हो गई, जबकि 23 लोग घायल हुए हैं. त्रिकुटा पहाड़ी पर स्थित मंदिर के मार्ग का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया. बचाव अभियान जारी है और आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग फंसे हो सकते हैं.
डोडा में कल बादल फटने से किश्तवाड़ और धराली जैसी तबाही आई. पहाड़ों से आए इस सैलाब में कम से कम 10 मकान बह गए. कई लोगों की मौत हो गई, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. जब डोडा में बादल फटा और सैलाब आया, तो लोग ऊपरवाले के याद करने लगे. सैलाब इमारतों को अपने आगोश में लेने लगा तो लोग अल्लाह को याद करने लगे, बस ‘अल्लाहू अकबर.. अल्लाहू अकबर’ की आवाज आने लगी. प्रशासन ने पूरे इलाके में अनाउंसमेंट शुरू कर दी- “लोग अपने घर छोड़कर निकल जाएं…”
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डोडा के भद्रवाह में बादल फटने से आई बाढ़ ने गुप्त गंगा मंदिर को भी अपनी चपेट में ले लिया. मंदिर के पुजारी और अन्य सदस्यों को सुरक्षित जगह भेजा गया है. बाढ़ आने के बाद चेनाब नदी भी उफन गई, खतरे के सायरन बजने शुरू हो गए. सैलाब ऐसा था कि पूरी सड़क ही ध्वस्त हो गई. एक तरफ पहाड़ है, दूसरी तरफ उफनता हुआ सैलाब और बीच में तबाह हुई सड़क. डोडा के खारा चारवाह में बस बर्बादी नजर आ रही है.
किश्तवाड़ में भी बादल फटा. यहां सैलाब लोहे के भारी भरकम पुल को भी बहा ले गया. ये पुल द्रबशल्ला और कुंतवाड़ा को जोड़ने वाला लोहे का टनों वजनी पुल था, जो पहले गिरा फिर सैलाब के साथ बह गया. जम्मू में तवी नदी के ऊपर बने पुल का एक हिस्सा सैलाब में लील गया और पुल पर चलती गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ गईं. यहां तीन गाड़ियां पुल ढहने से फंस गईं और आस-पास चीख-पुकार मच गई.
उधमपुर में भी पुराने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर भारी बारिश का कहर देखने को मिला. डाक बंगले के पास, सड़क किनारे खड़ा एक विशाल पेड़ अचानक जड़ से उखड़ गया और एक चलती हुई कार पर जा गिरा. पेड़ के नीचे कार पूरी तरह दब गई, जिसका दृश्य भयावह था.. इस घटना से राजमार्ग पर यातायात रुक गया और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया गया. हालांकि, घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.
जम्मू संभाग के 10 के 10 ज़िले कुदरत की विनाशलीला झेल रहे हैं. पूरा जम्मू त्राहि त्राहि कर रहा है. जम्मू में पुल ढह गए, बिजली लाइनों और मोबाइल टावरों को भारी नुकसान पहुंचा. यहां के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी स्थिति को बयां किया है. उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर कहा, “अभी भी लगभग न के बराबर संचार से जूझ रहा हूं. जियो मोबाइल पर थोड़ा-बहुत नेटवर्क तो आ रहा है, लेकिन फिक्स्ड लाइन वाई-फाई नहीं है, ब्राउज़िंग नहीं हो रही है, लगभग कोई ऐप नहीं चल रही है, एक्स जैसी चीज़ें बहुत धीरे खुल रही हैं, व्हाट्सएप छोटे टेक्स्ट मैसेज के अलावा कुछ नहीं भेज पा रहा है. 2014 और 2019 के बुरे दिनों के बाद से इतना डिस्कनेक्ट महसूस नहीं हुआ.”
Still struggling with almost nonexistent communication. There is a trickle of data flowing on Jio mobile but no fixed line WiFi, no browsing, almost no apps, things like X open frustratingly slowly, WhatsApp struggles with anything more than short text messages. Haven’t felt this…
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) August 27, 2025
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में लगातार तीन दिन से भारी बारिश हो रही है, आज चौथा दिन है और आज भी बारिश का अलर्ट है. मंगलवार को सुबह 11.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच जम्मू में 6 घंटे में 22 सेंटीमीटर बारिश हुई. हालांकि आधी रात के बाद बारिश में कमी आई, जिससे जिले को थोड़ी राहत मिली.
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू एक बार फिर ब्यास नदी की प्रचंड लहरों की चपेट में आ गया है. बीते दो दिनों से हो रही लगातार हो रही भारी बारिश के बाद व्यास नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा और कुछ ही घंटों में कई इलाकों में तबाही का मंजर दिखाई देने लगा. कुल्लू के रामशिला से लेकर मनाली के बाहंग तक लोग दहशत में हैं, कहीं घर खाली करवाए जा रहे हैं तो कहीं लोग अपने सामान को जैसे-तैसे सुरक्षित जगह पर पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे है, जिसने पूरी घाटी का बेहिसाब नुकसान किया है.
ताजा उदाहरण हमीरपुर शहर में देखने को मिला. बारिश रुकने के बाद हमीरपुर के बाल स्कूल के पास एक पुरानी दुकान अचानक भरभराकर ढह गई लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई भी हताहत नहीं हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुकान की पुरानी और जर्जर हालत लगातार बारिश के कारण और भी खराब हो गई थी. जब दुकान से स्लेटें निकलने लगीं, तो राहगीरों ने तुरंत खतरा भांप लिया और वहां से गुजर रहे लोगों को रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया. in250826_0184
आपको बता दें कि पिछले 21 दिनों में 7 जगह बादल फटे हैं.
5 अगस्त को धराली में बादल फटा और 5 मौतें हुईं, 100 से ज़्यादा लोग लापता हो गए.
9 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बादल फटा.
14 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटा तो, 65 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज़्यादा लोग लापता हो गए.
17 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बादल फटा, जिसमें 7 लोगों को मौत हुई और 6 से ज़्यादा लोग लापता हो गए.
22 अगस्त को उत्तराखंड के धराली में बादल फटा.
26 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटने से 4 लोगों को मौत हो गई, रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है.
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