कभी-कभी क्रिकेट की सबसे सच्ची कहानी स्टेडियम की फ्लडलाइट्स के नीचे नहीं, बल्कि घरेलू मैदानों की धूल में लिखी जाती है. सरफराज खान आज उसी कहानी का नाम है. रन बोल रहे हैं, आंकड़े चीख रहे हैं और फिर भी सन्नाटा है- चयनकर्ताओं की ओर से. और पढ़ें
भारतीय क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि डोमेस्टिक क्रिकेट प्रदर्शन की पहली सीढ़ी है. लेकिन सरफराज खान की कहानी उस दावे की सबसे कठिन परीक्षा बन चुकी है. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनका बल्ला किसी चेतावनी की तरह चला- जैसे हर पारी यह पूछ रही हो कि अब भी कुछ साबित करना बाकी है क्या?
100 (47), 52 (40), 64 (25), 73 (22)… ये सिर्फ स्कोर नहीं हैं. ये उस बल्लेबाज की मानसिकता का प्रमाण हैं, जो टी20 क्रिकेट की नब्ज समझता है. कब जोखिम लेना है, कब स्ट्राइक रोटेट करनी है और कब अकेले दम पर मैच खत्म कर देना है. सरफराज हर भूमिका में खुद को ढालते दिखे. गेंदबाजों पर दबाव बनाना हो या आखिरी ओवर तक मुकाबले को खींचना, वह कभी घबराए नहीं, कभी पीछे नहीं हटे.
… और जब बात 50 ओवरों के क्रिकेट की आई, तो विजय हजारे ट्रॉफी में तस्वीर और साफ हो गई. 55 (49)- एक जिम्मेदार, परिस्थिति के मुताबिक खेली गई पारी और फिर 157(75)- एक ऐसी पारी, जिसमें धैर्य भी था और विस्फोट भी. यह वही संतुलन है, जिसकी तलाश हर चयनकर्ता करता है और हर कप्तान चाहता है. सरफराज ने दिखाया कि वह सिर्फ ‘हार्ड हिटर’ नहीं हैं, बल्कि गेम सेंस वालें बल्लेबाज हैं, जो हालात के हिसाब से खुद को बदल सकते हैं.
🚨 Sarfaraz Khan Madness in Vijay Hazare Trophy against GoaRuns – 157Balls – 75Strike rate – 2104/6 – 9/14He was brought by CSK for IPL 26 for just 75 lakh. Hope he will get to play some matches. I am sure he will definitely create an impact 🔥🫡 pic.twitter.com/8XBHSyft5Z
— Tejash (@Tejashyyyyy) December 31, 2025
इसी फॉर्म को देखकर रविचंद्रन अश्विन भी चुप नहीं रह सके. X पर उनकी प्रतिक्रिया सिर्फ एक राय नहीं थी, बल्कि सिस्टम के लिए एक इशारा थी. अश्विन ने साफ कहा कि सरफराज को CSK की प्लेइंग XI में या कम से कम इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर जरूर आजमाया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, मौजूदा फॉर्म में 28 साल का यह बल्लेबाज CSK के लिए ‘ह्यूज एसेट’ साबित हो सकता है. अनुभव और आधुनिक टी20 की समझ- दोनों का दुर्लभ मेल सरफराज में दिखता है.
अश्विन ने इसी बहाने एक बड़ी बहस भी छेड़ दी- ODI क्रिकेट के भविष्य की. रोहित शर्मा और विराट कोहली की विजय हजारे ट्रॉफी में वापसी से दर्शकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई. अश्विन का इशारा साफ था- खेल भले ही सिस्टम से बड़ा हो, लेकिन कभी-कभी बड़े नाम खेल को जिंदा रखते हैं. सवाल यह है कि जब ये नाम ODI क्रिकेट से संन्यास लेंगे, तब कौन जिम्मेदारी उठाएगा? यहीं सरफराज जैसे खिलाड़ियों की अहमियत सामने आती है- जो भविष्य हैं, लेकिन वर्तमान में नजरअंदाज.
इस नजरअंदाजी पर दिलीप वेंगसरकर ने भी खुलकर सवाल उठाए. उन्होंने चयनकर्ताओं की आलोचना करते हुए कहा कि सरफराज को बार-बार नजरअंदाज करना समझ से परे है. घरेलू क्रिकेट में साल-दर-साल निरंतरता, भारत के लिए मिले सीमित मौकों में सम्मानजनक योगदान- फिर भी हर सीजन उसे अपनी जगह के लिए लड़ना पड़ा. 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू मिला, लेकिन 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में एक भी मैच नहीं और फिर, चुपचाप टीम से बाहर.
सरफराज ने इस चुप्पी का जवाब शिकायत से नहीं दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल नहीं उठाए, प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराजगी नहीं दिखाई. उन्होंने जिम चुना. पसीना चुना. फिटनेस चुनी. वजन घटाया, खुद को बदला, खुद को दोबारा गढ़ा- क्योंकि उनसे कहा गया था कि यही कमी है. लेकिन जब फिटनेस आई, तब भी मौका नहीं आया. वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भी अनदेखी जारी रही, जिसने चयन प्रक्रिया पर और गहरे सवाल खड़े कर दिए.
आज सरफराज खान डोमेस्टिक क्रिकेट पर राज कर रहे हैं. उनके पास रन हैं, फॉर्म है, जज्बा है. सवाल सिर्फ इतना है- क्या भारतीय क्रिकेट सिस्टम उनके दरवाजे की दस्तक सुनेगा? या फिर यह कहानी भी उसी धूल में दबा दी जाएगी, जहां से सरफराज हर बार रन बनाकर लौट आते हैं?
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