इजराइल पर चीन का साइबर अटैक, हैकर्स ने सरकारी कंपनियों का डेटा चुराया

बीजिंग – मिडिल ईस्ट (Middle East) में अपना दबदबा बनाने की कोशिश में चीन के हैकर्स ने इजराइल में बड़े स्तर पर साइबर अटैक (Cyber Attack)किया है. चीन के साइबर ग्रुप UNC215 ने इजराइल के सरकारी संस्थाओं, आईटी कंपनियों के अलावा टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी कंपियों को निशाना बनाया है.

अमेरिका के कैलिफोर्निया की साइबर सिक्योरिटी कंपनी फर्स्ट आई ने हमले के पीछे चीन के हैकर्स होने का खुलासा किया है. कंपनी ने बताया कि हैकर्स ने इन कंपनियों का फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़ा डेटा चोरी कर लिया है. इसमें यूजर्स का डेटा भी शामिल है.

मुर्दों के साथ रहना पसंद करते हैं यहां के लोग, मौत पर मनाया जाता है जश्न

अमेरिका के कैलिफोर्निया की साइबर सिक्योरिटी कंपनी फर्स्ट आई के मुताबिक, UNC215 ने हैकिंग के लिए FOCUSFJORD और HYPERBRO नाम के मैलवेयर का इस्तेमाल किया. चीन ने इस साइबर हमले की जिम्मेदारी ईरान पर थोपने की कोशिश भी की है. हैकर्स को पता था कि इजराइल हमले की जांच करेगा. इसलिए उन्होंने ऐसे सबूत छोड़े, जिससे हमले का शक ईरान पर जाए. हैकर्स ने ऐसे टूल्स यूज किए जिनका उफयोग आमतौर पर ईरान के हैकर करते हैं. उन्होंने आपस में फारसी में बात की.

2014 से साइबर अटैक कर रहा UNC215

UNC215 ग्रुप 2014 से मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और अमेरिका में साइबर अटैक कर रहा है. हैकर्स का यह ग्रुप गवर्मेंट, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, डिफेंस, फाइनेंस और हेल्थ केयर सेक्टर को निशाना बनाता है. इससे पहले यह हैकर ग्रुप ईरान, UAE और कजाकिस्तान पर भी साइबर अटैक कर चुका है.

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चीन में बढ़ रहे Corona के मामले, सरकार ने बीजिंग में लगाया यात्रा प्रतिबंध

बीजिंग – देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ने से चीन (China) सहमा हुआ है और इसके प्रसार को रोकने के लिए कई उपायों पर विचार कर रहा है. वहीं राजधानी बीजिंग के कुछ क्षेत्रों में भी कोरोना (Corona) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके कारण सरकार ने इस क्षेत्र में यात्रा प्रतिबंध लगाने का बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत मध्यम या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लोग जो बीजिंग लौटने की योजना बना रहे हैं, उन्हें हवाई और रेलवे सेवाओं के लिए टिकट खरीदने से रोका जाएगा.

Pakistan: मंदिर में तोड़फोड़ के मामले में 50 आरोपी अरेस्ट, 150 से ज्यादा के खिलाफ केस दर्ज

बीजिंग के अधिकारियों ने कहा कि जो लोग अभी भी मध्यम और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं, उनके लिए स्वास्थ्य कोड पीले रंग में समायोजित किए जाएंगे. वहीं जिन्हें हरे रंग का स्वास्थ्य कोड दिया जाएगा उन्हें बीजिंग आने की अनुमति होगी. बता दें कि बीजिंग प्रशासन को यह फैसला तब लेना पड़ा है जब चीन के कई शहरों में कोरोना मामलों में वृद्धि देखी जा रही है. देश के 15 शहरों में डेल्टा वेरिएंट का प्रकोप देखा जा रहा है और देश में इससे प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 500 हो गई है.

बीजिंग डैक्सिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने नानजिंग, यंग्जहौ और झांगजियाजी जैसे हॉटस्पॉट सहित 15 शहरों से उड़ान मार्गों को निलंबित करने की घोषणा की है. इस फैसले पर हवाई अड्डे के उप महाप्रबंधक वेन वू ने पुष्टि करते हुए कहा कि बीजिंग डैक्सिंग अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने नानजिंग, यंग्जहौ और झांगजियाजी जैसे 15 शहरों से उड़ान मार्गों को निलंबित कर दिया है.

इजराइल में 60 साल से ऊपर के लोगों को लगेगा वैक्सीन का तीसरी डोज, ऐसा करने वाला पहला देश

इस बीच कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने के कारण बीजिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को स्थगित कर दिया गया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है देश के कई क्षेत्रों में महामारी के हालिया प्रकोप के कारण 11वां बीजिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, जो मूल रूप से 14-21 अगस्त के लिए निर्धारित किया गया था, सामान्य सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से स्थगित कर दिया गया है. हालांकि, आयोजकों ने यह घोषणा नहीं की है कि महोत्सव कब तक बंद रहेगा.

Pakistan: मंदिर में तोड़फोड़ के मामले में 50 आरोपी अरेस्ट, 150 से ज्यादा के खिलाफ केस दर्ज

लाहौर –  पाकिस्तान (Pakistan) में अल्पसंख्यक हिंदुओं के मंदिर (Attack On Hindu’s Temple) में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने 50 आरोपियों को गिरफ्तार (50 Arrests In Temple Attack) कर लिया है और 150 से ज्यादा लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. गौरतलब है कि मंदिर की सुरक्षा में नाकामी को लेकर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अधिकारियों को फटकार लगाई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई. बता दें कि लाहौर से करीब 590 किलोमीटर दूर रहीम यार खान जिले के भोंग कस्बे में बुधवार को एक गणेश मंदिर पर भीड़ ने हमला किया था.

मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी

रहीम यार खान (Rahim Yar Khan) जिले के डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर (DPO) असद सरफराज ने कहा, ‘हमने भोंग में कथित रूप से मंदिर पर हमले के मामले में अब तक 50 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. आने वाले दिनों में और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है.’

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मंदिर की मरम्मत का काम हुआ शुरू

उन्होंने बताया कि मंदिर पर हमला करने के आरोप में 150 से ज्यादा लोगों के खिलाफ आतंकवाद और पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मंदिर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान गुलजार अहमद ने शुक्रवार को कहा था कि मंदिर में तोड़फोड़ की घटना देश के लिए शर्मनाक है क्योंकि पुलिस मूक दर्शक की तरह काम कर रही है.

गुलजार अहमद ने आठ साल के बच्चे की गिरफ्तारी पर हैरानी जताई और पुलिस से पूछा कि क्या वह इतने छोटे बच्चे की मानसिक हालत को समझ नहीं पाई. पाकिस्तान की संसद ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित कर मंदिर पर हमले की घटना की निंदा की. मामले में सुनवाई 13 अगस्त तक के लिए टाल दी गई है. बता दें कि 8 साल के बच्चे पर मदरसे में यूरिन करने का आरोप लगाया गया था.

इससे पहले भारत ने गुरुवार को नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी को तलब किया और इस घटना के साथ पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की आजादी और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले की लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था.

इजराइल में 60 साल से ऊपर के लोगों को लगेगा वैक्सीन का तीसरी डोज, ऐसा करने वाला पहला देश

कोरोना वायरस को हराने के लिए इजराइल (Israel) ने बड़ा कदम उठाया है. यहां 60 साल से ऊपर के लोगों को कोरोना वैक्सीन (Covid Vaccine) का तीसरा डोज दिया जाएगा. अगले हफ्ते से तीसरी खुराक मिलनी शुरू हो जाएगी. इजराइल ऐसा करने वाला पहला देश है, क्योंकि अभी तक सभी वैक्सीन के दो ही शॉट लोगों को दिए जा रहे हैं. इसके लिए बकायदा वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है.

इजरायल सिर्फ उन ही 60+ लोगों को वैक्सीन की तीसरी खुराक देगा, जिन्होंने कम से कम 5 महीने पहले दोनों खुराक ले ली थी. चैनल 13 के मुताबिक सरकार के इस कदम को डेल्टा वेरिएंट के प्रसार को धीमा करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है. इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले संक्रमण के खिलाफ टीके की प्रभावशीलता में गिरावट की सूचना दी थी.

3 महीने में वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 16% घटी

एक्सपर्ट पैनल ने बुधवार रात मीटिंग दौरान वैक्सीन की इफेक्टिवनेस से जुड़े डेटा साझा किए थे. इनमें बताया गया कि 60 साल से ऊपर के जिन लोगों को जनवरी में वैक्सीन लगी थी, उन्हें गंभीर संक्रमण से बचाने में वैक्सीन की इफेक्टिवनेस अप्रैल में 97% थी. जुलाई में यह घटकर 81% रह गई. यानी 3 महीने में इफेक्टिवनेस में 16% कमी आई है. हालांकि, पैनल में शामिल सभी एक्सपर्ट एकराय नहीं थे, लेकिन ज्यादातर इस पक्ष में थे कि 60 साल से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज दिया जाए.

इजराइल में कोरोना के कितने केस?

इजरायल में नए गंभीर मरीजों की संख्या पिछले दो दिन से लगातार बढ़ रही है. सोमवार को इनका आंकड़ा 20 था. मंगलवार को बढ़कर 33 और बुधवार को 41 पहुंच गया. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि अगस्त के आखिर तक गंभीर मरीजों का आंकड़ा 1,000 तक पहुंच जाएगा.

दुनिया में अब तक 19.7 करोड़ मामले

दुनियाभर में अब तक कोरोनावायरस के 19 करोड़ 73 लाख मामले दर्ज हुए हैं. इससे 42 लाख 13 हजार लोगों ने जान गंवाई है, जबकि 17 करोड़ 82 लाख लोगों ने इस बीमारी को मात भी दी है. दुनिया में अभी कोरोना के 1 करोड़ 46 लाख एक्टिव केस हैं. इसमें से 87,074 क्रिटिकल हैं.

China में आई ‘कयामत’, 300 फीट ऊंची रेत की सुनामी देख भागने लगे लोग !

प्राकृतिक आपदाओं (Natural Calamity) के एक से बढ़कर एक नज़ारे दुनिया के सामने आते रहते हैं. कई बार तो कुछ ऐसा भी दिख जाता है, जिसे देखकर लगता है कि दुनिया का अंत (Apocalypse) अब बेहद करीब है. ऐसा ही कुछ हुआ पड़ोसी देश चीन (China) में. यहां के एक शहर में धूल और रेत का 300 फीट ऊंचा तूफान (300ft Sandstorm) देखने को मिला. इसका वीडियो देखकर आप भी सहम जाएंगे.

China के शहर Dunhuang का ये नज़ारा मानो किसी हॉलीवुड फिल्म (Hollywood Film) का था, जिसमें कयामत पूरे शहर को तबाह करने पर तुल गई थी. इसका वीडियो बनाकर जैसे ही सोशल मीडिया (Social Media Viral Video) पर डाला गया, लोगों ने तेज़ी इसे सर्कुलेट करना शुरू कर दिया. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ( South China Morning Post ) के मुताबिक शहर में ये तूफान (300ft Sandstorm) दोपहर बाद करीब 3 बजे दिखाई दिया. शहर में मौजूद सैलानियों ने जब ये नज़ारा आंखों के सामने देखा, उन्हें समझ ही नहीं आया कि अब क्या करें?

ऐसा लगा कि कयामत आ गई है !

Gobi Desert से थोड़ी ही दूर पर मौजूद शहर Dunhuang में रविवार को दोपहर के बाद रेतीला तूफान (Sandstorm) उठा. कुछ पर्यटकों ने इसका वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया (Social Media Viral Video) पर डाला. पुलिस ने रेत का तूफान देखते ही सड़कें बंद कर दी गईं और ड्राइवर्स से कहा गया कि वे थोड़ी देर इंतज़ार करें. स्थानीय समय के मुताबिक करीब 3 बजे दोपहर को तूफान आया. तूफान के वक्त 20 फीट भी देखना मुश्किल हो रहा था. शहर में मौजूद नेचर पार्क को देखने आए लोग भी तूफान के बीचे फंस गए. चाइनीज़ न्यूज़ एजेंसी cctv ने इसका वीडियो YouTube पर शेयर किया है.

प्रशासन ने संभाली कमान

चीन में इस तरह के रेतीले तूफान (300ft Sandstorm) आते रहते हैं, ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने तूफान को देखते ही लोगों को अलर्ट करना शुरू कर दिया. मुंह पर मास्क और आंखों पर चश्मा लगाकर लोगों ने खुद को तूफान से होने वाले नुकसान से बचाया. गोबी डेजर्ट (Gobi Desert) के पास होने की वजह से इस शहर में पहले से ही जलवायु काफी अलग है. ऐसे में अचानक ही तेज़ हवाओं के साथ उठा रेतीला तूफान देकर लोगों की आखें फटी रह गईं. इस बार तूफान 300 फीट ऊंचा था, ऐसे में नज़ारा बेहद भयावह था.

न्यूयॉर्क सिटी का ऑफर, कोरोना वैक्सीन की पहला डोज लेने पर मिलेगा 100 डॉलर कैश

न्यूयॉर्क – दुनिया में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं. कोरोना को हराने के लिए कई देशों में वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) लगवाने के लिए लोगों को तरह-तरह के आकर्षक ऑफर दिए जा रहे हैं. अमेरिका के न्यूयॉर्क में वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी है. ऐसे में यहां के मेयर ने लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए बुधवार को खास ऑफर का ऐलान किया. यहां कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लेने वालों को 100 डॉलर (7 हजार 442 रुपये) दिए जाएंगे. ये ऑफर शुक्रवार से शुरू हो रहा है.

दरअसल, अमेरिका में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट बढ़ते केस के बीच वैक्सीनेशन को बढ़ाने के लिए ऐसा ऑफर लाया गया है, ताकि लोग खासकर युवावर्ग वैक्सीन की डोज लगवाने के लिए प्रेरित हो. इस बीच सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) ने मंगलवार से हाई रिस्क वाले इलाकों में वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए मास्क पहनना एक बार फिर से अनिवार्य कर दिया गया है.

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) डायरेक्टर रोशेल वेलेंस्की ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मास्क पर लिए गए फैसले के बारे में बताया. उन्होंने इस दौरान यह बताया कि वैक्सीन असरदार है लेकिन कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की वजह से आगे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.

CDC के एक मैप से पता चलता है कि न्यूयॉर्क के सभी पांच काउंटी में कम्युनिटी ट्रांसमिशन पर्याप्त स्तर पर है. इसलिए यहां कोरोना की गाइडलाइंस लागू हैं और वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है.

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बिल डी ब्लासियो ने सोमवार को ऐलान किया कि शहर के कर्मचारियों को 13 सितंबर तक टीका लगवाना होगा या फिर उन्हें हर हफ्ते कोरोना टेस्ट कराना होगा. टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव होनी चाहिए.

सिटीवाइड इम्युनाइजेशन रजिस्ट्री के डेटा ने संकेत दिया कि न्यूयॉर्क शहर के 40.8% निवासियों का टीकाकरण नहीं हुआ है. सभी निवासियों में 59.2% ने कम से कम वैक्सीन की एक खुराक ही ली है. लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने के मकसद से पहले 1000 डॉलर के ऑफर का प्रस्ताव था. हालांकि, बाद में इसे 100 डॉलर किया गया.

राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के प्रशासन में काम कर चुके ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के एक सीनियर साथी रॉबर्ट लिटन ने कहा, “अगर हम किसी भी तरह से हर्ड इम्युनिटी हासिल नहीं कर पाते हैं, तो हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी.”

बता दें, अमेरिका में पिछले कई दिनों से कोरोना के नए केसों में तेजी देखी जा रही है. यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के 61,581 नए केस आए हैं. यह बीते दिन दुनिया के किसा भी देश में मिले संक्रमितों का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

मुर्दों के साथ रहना पसंद करते हैं यहां के लोग, मौत पर मनाया जाता है जश्न :

क्या आप दुनिया के उस हिस्से के बारे में जानते हैं जहां लोग अपने पूर्वजों के शव के साथ रहते हों? अगर नहीं, तो आज हम आपको उसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लोग अपने परिवार के सदस्य की मौत के बाद उन्हें कभी दफनाते नहीं है. बल्कि मुर्दे को ममी के रूप में तब्दील कर उसे घर पर ही रखते हैं.

इंडोनेशिया के तोराजन समुदाय की परंपरा

मुर्दों को अपने साथ रखने की ये परंपरा इंडोनेशिया के तोराजन समुदाय में पाई जाती है. इस समुदाय में डेड हार्वेस्ट फेस्टिवल (Dead Harvest Festival) भी मनाया जाता है, जिसमें मुर्दों को बॉक्स से बाहर निकालकर, नहला धुलकर और फिर से नए कपड़े पहनाकर मरे शख्स को जो भी खाना पसंद था वही बनाया जाता है.

पूरे गांव में मनाया जाता है जश्न

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जिस दिन लोग मुर्दों को बाहर निकालते हैं और उन्हें सजाते हैं, उस दिन अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी बुलाते हैं. पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल होता है. ये सब इसलिए होता है क्योंकि वे अपने घर वालों से बहुत ज्यादा लगाव महसूस करते हैं. इसलिए उन्हें हमेशा के लिए दफनाने से पहले कई साल तक अपने साथ रखते हैं.

जो मर गया है वो भी जिंदा है

इंडोनेशिया के टोराजन संप्रदाय के लोग मानते हैं कि मौत जीवन का अंत नहीं है और जो मर गया वो भी जिंदा है. ये लोग न सिर्फ मुर्दों को साथ रखते हैं, बल्कि उन्हें खाना भी देते हैं. इस संप्रदाय में जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे दफनाने की जगह एक भैंस की बलि दी जाती है. भैंस की बलि और उत्सव के बाद मृत शरीर को घर ले जाया जाता है. इसके बाद उसे अनाजघर और बाद में श्मशान ले जाते हैं.

मृत शरीर को इस तरह करते हैं सुरक्षित

फिर मुर्दे को वापस घर ले आते हैं. उनके लिए एक कमरा खाली कर दिया जाता है. जिसमें जरूरत का हर सामान, कपड़े और पसंद की चीजें रखी जाती हैं. मृत शरीर को कई वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उसके शरीर को फॉर्मल्डहाइड और पानी के घोल से परिरक्षित करते हैं. बाद में इस मुर्दे को परिवार में शामिल कर दिया जाता है. यहां मौत को लोग एक उत्सव की तरह मनाते हैं. 

पूरे गांव में टहलने जाते हैं मुर्दे

इस दिन टूटे हुई ताबूत की मरम्मत कराई जाती है या फिर उसे बदल दिया जाता है. इसके बाद अपने परिजनों के शव को तय रास्ते से पूरे गांव में टहलाते हैं. गांव की इस परंपरा को ‘माइनेने’ कहा जाता है. ये परंपरा हर साल अगस्त में निभाई जाती है. इसे शवों की सफाई का कार्यक्रम माना जाता है. परंपरा के दौरान बाहर से आए लोगों को मुर्दों से मिलने भी दिया जाता है.

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गर्मियों में 120 तक पहुंच जाता है तापमान

कूबर पेडी एक डेजर्ट एरिया है. यहां ओपल की कई खदानें हैं. इसलिए यहां पर गर्मियों में तापमान 120 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है और सर्दियों में बहुत कम हो जाता है. इसी के चलते यहां रहने वाले लोगों को बहुत तकलीफ को सामना करना पड़ता था.

खदान में बनाया गया अंडरग्राउंड गांव

इसका यह हल निकाला गया कि लोगों को माइनिंग के बाद खाली बची खदानों में शिफ्ट कर दिया जाए. बस फिर क्या था, अधिकांश लोगों ने अंडरग्राउंड घर बनाने शुरू कर दिए और वहां रहने लगे.

बेहतरीन सुविधाओं से है लैस

जमीन के नीचे होने के बावजूद भी ये घर पूरी तरह से फर्निश है, और सारी सुख सुविधाओं से लैस है. ऐसे यहां करीब 1500 घर हैं. अब ये जगह इतनी प्रचलित हो गई है कि कई हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग यहां हो चुकी है.

इंटरनेट-बिजली और पानी का भी इंतजाम

इन अंडरग्राउंड घरों में इंटरनेट, बिजली, पानी जैसी सारी सुविधाएं हैं. अगर कुछ नहीं है तो सिर्फ सूरज की धूप. ऊपर से देखने पर आप को अंदाजा भी नही होगा कि ये घर अंदर से कैसे होंगे.

धूप के इंतजाम के लिए किया ये जुगाड़

हालांकि धूप के इंतजाम के लिए इस शहर में जगह-जगह पर जमीन से निकली हुई चिमनियां हैं और कई साइन बोर्ड भी लगे हुए हैं जोकि लोगों को सावधान करते हैं आगे खतरा है कि वो सावधानी पूर्वक चलें, नहीं तो वो जमीन के अंदर घर में गिर सकते हैं या किसी खाली पड़ी हुई गुफा के अंदर जा सकते हैं.

एक रात रुकने के लिए खर्च करने होंगे इतने रुपये

यहां पर एक अंडरग्राउंड होटल भी बनाया गया है, जहां आप 150 डॉलर देकर रात बिता सकते हैं. यहां का सुपरमार्केट भी अंडरग्राउंड ही है. यहां Zameen ke Neeche ही अच्छे बढ़िया क्लब भी मौजूद हैं जहां आप पूल का गेम खेल भी सकते हैं.

हांगकांग के कब्रिस्तान में किराए पर मिल रही जगह, लॉटरी से आ रहा नंबर :

कोरोना के दौरान मची भीषण तबाही के बीच कई देशों में शवों को दफनाने के लिए जगह कम पड़ने की खबरें आईं. ये भी सुर्खियों में रहा कि कैसे पुरानी कब्रों को हटाकर उनकी जगह नए शव रखे जा रहे हैं. इसपर काफी हल्ला मचा था लेकिन पुराने शवों को हटाकर नए शवों को जगह देने का चलन नया नहीं, बल्कि कई विकसित देश जगह की कमी के चलते पहले से ये कर रहे हैं. वहां कुछ सालों के लिए दफनाने की जगह किराए पर मिलती है. मियाद खत्म होते ही वहां वेटिंग में चल रहा दूसरा शव आ जाता है.

2 साल की उम्र में किडनैप हुआ था बेटा, 24 साल बाद पिता ने ऐसे खोज निकाला :

लगभग सभी देशों में शव संस्कार से जुड़ी कई मान्यताएं रही हैं, जैसे कि शव को दफनाने के बाद उसे छेड़ना नहीं चाहिए. पुरानी सोच के मुताबिक, इससे किसी तरह का खतरा आने का डर रहता है. हालांकि अब अंतिम संस्कार से जुड़े रस्मोरिवाज बदल सकते हैं. आबादी बढ़ने और जगह की कमी होने के कारण कई देशों में ये बदलाव दिख रहा है. जैसे हांगकांग समेत कई देश जैसे सिंगापुर, येरूशलम, सिडनी, वेंकूवर और इस्तांबुल में शवों को दफनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं.

हांगकांग इसमें सबसे ऊपर है. साल 1970 में ही प्रॉपर्टी की कीमतें वहां पर आसमान छूने लगीं. इसी दौरान लोगों के रहने के लिए जमीन के छोटे टुकड़े की अनुपलब्धता को देखते हुए वहां की सरकार ने तय किया कि देश में नए कब्रिस्तान नहीं बनाए जाएंगे. साथ ही आदेश दिया गया कि बनी-बनाई कब्रों को खोदकर हर 6 साल में शव निकालकर उन्हें जला दिया जाए ताकि नए आने वाले शवों के लिए जगह बन सके.

अगर कोई मरने वाला काफी किस्मतवाला हो और किसी ऐसे चर्च का सदस्य हो, जहां मृतकों को दफनाने की जगह बाकी हो तो वो जगह पा सकता है. लेकिन इसके लिए भी कोई छोटी-मोटी रकम नहीं, बल्कि इसके लिए मृतक के परिजनों को 2 करोड़ 83 लाख रुपए खर्च करने होंगे. तो जाहिर है हांगकांग में न तो जीते- जी बड़ी आबादी के पास घर है और न मौत के बाद वे आराम कर सकते हैं.

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यही कारण है कि बीते कुछ सालों से यहां एक अलग ही तरीका अपनाया जा रहा है. परिजन मृतक को दफनाने की बजाए सीधे जला देते हैं और अस्थियां जमा करके किसी सुरक्षित जगह या बैंक के लॉकर में रखवा देते हैं. वे इंतजार करते हैं कि अगर कभी वे जमीन खरीद सके या कब्रिस्तान खाली हुए तो वे अस्थियों को ही जमा करके सारी प्रक्रिया कर देंगे.

परिजन मृतकों की अस्थियां एक जार में जमा कर जाते हैं कि जब भी नंबर आए, उस राख को ही दफनाया जा सके. रॉयटर्स में इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे यहां दफनाने के लिए भी लॉटरी सिस्टम काम करता है. अगर कोई अस्थियों को रखने का भी इंतजार न कर सके तो उसके लिए भी बंदोबस्त है. उसे ज्यादा नहीं, बस 94 लाख रुपए जमा कराने होंगे, जिसके बदले उसे A4 साइज (एक जूते के डिब्बे जितना बड़ा) की जमीन दी जाएगी, जिसमें केवल एक जार दफनाया जा सके.

2 साल की उम्र में किडनैप हुआ था बेटा, 24 साल बाद पिता ने ऐसे खोज निकाला :

बीजिंग –  मां-बाप के लिए सबसे बड़ा दुख बच्चों से बिछड़ना होता है. चीन (China) में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां एक चीनी पिता का बेटा 2 साल की उम्र में किडनैप (Child Trafficking) हो गया था. पिता ने बच्चे के खोने पर उसे ढूंढ़ने के लिए सालों तक पूरे देश में पांच लाख किमी से अधिक का सफर तय किया. 24 साल बाद अब पिता-बेटे की मुलाकात हुई है. भावुक कर देने वाला ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्ध लोगों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया है.

चीन के शेनडोंग प्रांत में रहने वाले गुओ गैंगटन (Guo Gangtang) के बेटे को मानव तस्कर उनके घर से अगवा करके ले गए. इस दौरान उनके बेटे की उम्र महज दो साल थी. गुए गैंगटन के बेटे के गायब होने से मिली प्रेरण पर 2015 में एक फिल्म भी बनाई गई. इसमें हांगकांग के सुपरस्टार एंडी लाउ ने अभिनय किया.

1997 में अगवा हुआ था गुओ का बेटा

चाइना न्यूज के मुताबिक, गुओ गैंगटन का बेटा 1997 में अगवा किया गया था. अगवा करने वाले दोनों संदिग्ध उस समय एक-दूसरे को डेट कर रहे थे. उन्होंने ये सोचकर बच्चे को अगवा किया कि उसे बेचकर पैसा कमाया जाएगा. घर के बाहर अकेले खेलते हुए देख दोनों ने उसे अगवा किया और फिर उसे हैनान प्रांत लेकर चले गए. इसके बाद उन्होंने बच्चे को बेच दिया.

ऐसे पता लगाया बेटे के बारे में

गुओ ने अपने बेटे की तलाश में मोटरबाइक पर 20 प्रांतों की खाक छानी. इस दौरान कई दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें उनकी हड्डियां टूट गईं. जबकि उनके साथ लूटपाट भी हुई. वहीं, 10 मोटरबाइक भी इस पूरे समय टूट गईं. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएनए टेस्टिंग के जरिए गुओ गैंगटन के बेटे की पहचान हुई.

7 अन्य बच्चों को माता-पिता से मिलवाया

बेटे की तलाश के दौरान गुओ गैंगटन ने अपने बच्चे की तस्वीरों को बैनर की शक्ल दी. वह पुलों के नीचे सोते और पैसे खत्म होने पर लोगों से भीख तक मांगते. इस दौरान गुओ चीन में लापता होने वाले लोगों के संगठन में एक अहम सदस्य भी बने. इस दौरान उन्होंने कम से कम सात बच्चों को अपने माता-पिता से मिलवाया.


हर साल 20 हजार बच्चे होते हैं चीन में अगवा
चीन में बच्चों को अगवा किया जाना एक बड़ी समस्या है. हर साल हजारों बच्चे गायब हो जाते हैं. 2015 में लगाए गए एक अनुमान के मुताबिक, चीन में हर साल 20 हजार बच्चों को अगवा किया जाता है. इनमें से अधिकतर बच्चों को बेच दिया जाता है.