उपचुनाव जीतने के लिए कमलनाथ ने बनाया ये प्लान, 10 विधायकों पर रहेगी एक सीट की जिम्मेदारी :

भोपाल – एमपी में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. कांग्रेस पार्टी ने इन चुनाव के लिए रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया है. बता दें कि कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम कमलनाथ के हाथों में उपचुनाव की कमान रहेगी. कमलनाथ की कोशिश है कि आगामी उपचुनाव में लोगों की नाराजगी को भुनाया जाए. कांग्रेस उपचुनाव में जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, यही वजह है कि कांग्रेस हर सीट पर कम से कम 10 विधायकों को तैनात करेगी. 

दमोह प्लान पर कांग्रेस को भरोसा

कांग्रेस आगामी उपचुनाव में भी दमोह उपचुनाव की रणनीति के तहत ही उतरेगी. इसके लिए पार्टी उपचुनाव वाली हर सीट पर कम से कम 10 विधायकों को तैनात करेगी, ताकि वह पार्टी के पक्ष में माहौल बना सकें. बता दें कि दमोह उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को पटखनी दे दी थी. दमोह उपचुनाव के बाद से पार्टी का आत्मविश्वास भी बढ़ गया है. कांग्रेस उपचुनाव में युवा मतदाताओं पर ज्यादा फोकस करेगी. यही वजह है कि कांग्रेस विधायकों के साथ ही अपनी छात्र शाखा एनएसयूआई के ढेरों कार्यकर्ताओं को भी चुनाव जिताने की जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है. साथ ही कई युवा विधायकों को उपचुनाव में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है. युवा विधायक विपिन वानखेड़े ने बताया कि एनएसयूआई के कार्यकर्ता युवाओं को पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे.

कमलनाथ होंगे चेहरा

कांग्रेस कमलनाथ के चेहरे पर ही आगामी उपुचनाव लड़ेगी. कमलनाथ ही चुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं और आजकल उनका फोकस उपचुनाव पर ही है. जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनपर दलित मतदाताओं की अच्छी खासी तादात है. यही वजह है कि कमलनाथ दलित मतदाताओं को अपने पाले में करने में जुटे हैं और अहम बैठकें कर रहे हैं. हाल ही में बसपा के एक दर्जन पदाधिकारियों ने भी कमलनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्या हासिल की थी. 

इन सीटों पर होगा उपचुनाव

जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें खंडवा लोकसभा सीट, पृथ्वीपुर, जोबट और रैगांव विधानसभा सीटें शामिल हैं. खंडवा से भाजपा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद यहां उपचुनाव हो रहे हैं. ऐसी चर्चाएं हैं कि कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर अरुण यादव प्रबल दावेदार हैं. पृथ्वीपुर सीट पर कांग्रेस विधायक बृजेंद्र सिंह राठौर के कोरोना के कारण निधन के चलते पार्टी उनके बेटे को टिकट दे सकती है. जोबट सीट पर कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया के निधन से खाली सीट पर पार्टी सुलोचना रावत, मुकेश पटेल, विक्रांत भूरिया में से किसी एक को टिकट दे सकती है! रैगांव सीट भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई है. 

भाजपा बोली- कांग्रेस से हमें कोई टक्कर नहीं है

वहीं उपचुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारियों पर भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस से हमें कोई टक्कर नहीं है. भाजपा प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि भाजपा, संगठन से चुनाव लड़ती है. जो सीटें हमारी थीं, उनके साथ-साथ हम कांग्रेस की सीटें भी जीतेंगे. 

प्रशांत किशोर की राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी से हुई मुलाकात, 2024 के चुनाव पर हुई बात :

नई दिल्ली –  चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) इन दिनों गांधी परिवार के संपर्क में हैं. मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है उन्होंने मंगलवार शाम राजधानी दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात की है. कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव (2024 Loksabha Election) के लिए ‘कुछ बड़ी’ योजना तैयार कर रही है. हाल ही में किशोर ने महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के साथ उनके आवास पर बैठक की थी.

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एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि, मंगलवार शाम कांग्रेस सासंद के घर एक बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें प्रशांत किशोर पहुंचे थे. माना जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस मीटिंग में शामिल हुए थे. खबर है कि इस दौरान सोनिया गांधी भी वर्चुअली बैठक में शामिल हुई थीं. अब कहा जा रहा है कि किशोर 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं.

क्या पंजाब को लेकर हुई बैठक?

शुरुआत में यह कयास लगाए जा रहे थे प्रशांत किशोर पंजाब कांग्रेस में जारी संकट को लेकर राहुल गांधी से चर्चा करने पहुंचे हैं. हालांकि फिर सूत्रों ने बताया कि यह बैठक पंजाब या उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर नहीं हुई थी, बल्कि इस दौरान ‘कुछ बड़ी’ योजना पर चर्चा हुई है. साथ ही इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि पंजाब में कांग्रेस में जारी आंतरिक विवाद को लेकर किशोर-गांधी ने यह बैठक की है. पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी जारी है.

कांग्रेस के काम करने के तरीके पर उठाया था सवाल

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किशोर ने गांधी परिवार से मुलाकात की है. इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के 2017 के चुनाव में साथ आ चुके हैं. उस दौरान पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. गठबंधन कर चुनाव लड़ रही कांग्रेस-समाजवादी पार्टी को हराकर बीजेपी ने सत्ता हासिल की थी. तब किशोर ने खुलकर कांग्रेस के काम करने के तरीके पर असंतोष जाहिर किया था. अब इस बैठक के बाद इस संभावना को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि किशोर एक बार फिर पार्टी के साथ काम करने के लिए तैयार हो रहे हैं.

तीसरे मोर्चे की भी हो रही तैयारी!

राकंपा प्रमुख शरद पवार से दो बार मुलाकात ने 2024 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ तीसरे मोर्चे की खबरों को हवा दी थी. कहा जा रहा है कि पवार के घर पर हुई बैठक में पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा की अगुवाई में एक मोर्चे को लेकर चर्चा हुई थी. हालांकि, इस दौरान कांग्रेस बैठक से गायब रही थी.

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पवार और किशोर दोनोंने कहा था कि कांग्रेस के बगैर बीजेपी के खिलाफ कोई गठबंधन नहीं हो सकता. एनडीटीवी से बातचीत में किशोर ने साफ किया था, ‘मैं नहीं मानता कि तीसरा या चौथा मोर्चा मौजूदा सरकार के लिए चुनौती बनकर उभर सकता है.’ साथ ही उन्होंने इस विचार को पुराना बताया था. मंगलवार को हुई बैठक में गांधी परिवार की मौजूदगी ने इस बात के संकेत दिए हैं कि तीनों एक साथ काम कर रहे हैं और कोई भी फैसला सर्वसम्मति से लिया जाएगा.

ज्योतिरादित्य सिंधिया MP की राजनीति के नये किंगमेकर, जानें उनका सियासी सफर :

ज्योतिरादित्य सिंधिया उस घराने का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके सदस्य दो परस्पर विरोधी विचारधाराओं के फॉलोअर रहे हैं. मध्य प्रदेश की राजनीति का एक बेहद जाना-पहचाना नाम हैं ज्योतिरादित्य. वह सिंधिया राजघराने की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं, जिनकी पहचान प्रदेश से बढ़कर देश में है. वह दादी स्व. विजयाराजे सिंधिया और पिता स्व. माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत के वारिस हैं. हालांकि, दादी और पिता दोनों का ताल्लुक़ दो अलग-अलग दलों से था. ज्योतिरादित्य को अपने पिता से राजनीति और क्रिकेट दोनों विरासत में मिले और दोनों को उन्होंने बखूबी संभाला.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति में एंट्री एक बेहद दुखद हादसे के बाद हुई. पिता माधवराव सिंधिया की सितंबर 2001 में यूपी के मैनपुरी में हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई. वो उस वक्त गुना-शिवपुरी से सांसद थे. उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाली और कांग्रेस के टिकट पर गुना-शिवपुरी सीट का प्रतिनिधित्व किया. वह पहली बार 2002 में सांसद चुने गए थे, लेकिन 2019 में कांग्रेस के टिकट पर वो लोकसभा चुनाव मोदी लहर में हार गए. बाद में पार्टी बदलने पर अब वह बीजेपी से राज्यसभा सदस्‍य हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया 2006 में पहली बार संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी राज्यमंत्री बनाए गए और फिर बाद में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री रहे.

एक सियासी तीर से विपक्षी दिग्गजों को परेशान करने का गुर सिंधिया से बेहतर कोई नहीं जानता. चुटीले तंज, सियासी समझ से भरे व्यंग्य और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने में ज्योतिरादित्य माहिर हैं. राजघराने से होने के बाद भी आम आदमी से रिश्ता जोड़ने की कला सिंधिया के खून में है.

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2018 में मध्य प्रदेश में अगर 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी थी तो उसके पीछे भी उस वक्त कांग्रेस सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया का ही रोल था. ग्वालियर-चंबल की सियासत का बड़ा चेहरा सिंधिया उस चुनाव में प्रदेश के नेता के तौर पर उभर कर सामने आए. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे ज्यादा चुनावी सभाएं कर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया था. उन्हें पूरे प्रदेश में कार्यकर्ताओं और जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला था.

ज्योतिरादित्य ने स्कूल एजुकेशन मुंबई से हासिल करने के बाद हॉवर्ड और अमेरिका के स्टेनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के बाद अमेरिका में ही साढ़े चार साल लिंच, संयुक्त राष्ट्र न्यूयार्क और मार्गेन स्टेनले में काम का अनुभव लिया. राजनीति में आने से पहले ही 23 साल की उम्र में गुजरात के गायकवाड़ परिवार की प्रियदर्शिनी राजे से उनका विवाह हुआ. ज्योतिरादित्य के दो बच्चे हैं अनन्या और महाआर्यमन सिंधिया.

कांग्रेस में रहते हुए वो राहुल औऱ प्रियंका गांधी के बेहद करीब रहे. यही वजह है कि 2019 के इस लोकसभा चुनाव में उन्हें पश्चिम उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई थी.

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कमलनाथ का हमकदम बनते हुए कांग्रेस पार्टी ने 2018 में सिंधिया को चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की कमान सौंपी थी. ज्योतिरादित्य जब कांग्रेस में थे तब उन्हें महाराज के नाम से ही पुकारा जाता था. अब बीजेपी में आने के बाद वो भाई साहब कहलाने लगे. लेकिन अपने ग्वालियर-चंबल इलाके में वो आम तौर पर महाराज नाम से ही पुकारे जाते हैं.

अपने पिता की तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया भी क्रिकेट के शौकीन हैं. वो मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के अध्यक्ष भी रहे. राजनीति की व्यस्तता से अगर वक्त मिल जाए तो शौकिया तौर पर क्रिकेट ज़रूर खेलते हैं. गुना-शिवपुरी की जनता ने उनके शॉट्स देखे जब 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ 5 ओवर का प्रदर्शनी मैच खेला था.

चुनावी राज्य UP से इन नेताओं को मिल सकती है मोदी कैबिनेट में जगह :

नई दिल्ली –  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के मंत्रिमंडल का विस्तार इस हफ्ते किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक 20 से 22 मंत्री शपथ ले सकते हैं. मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं के साथ ही सियासी अटकलें तेज हो गई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर कैबिनेट का विस्तार होता है तो इसमें उत्तर प्रदेश से तीन से चार मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके अलावा कुछ सहयोगी दलों को भी मौका मिल सकता है. 

अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में मिलगे जगह? 

राजनीति के जानकारों की मानें तो अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल मंत्री बनाई जा सकती हैं. अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री थीं. दरअसल, BJP की नजर कुर्मी वोट बैंक पर है और अनुक्रिया का प्रभाव पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड में कुर्मी वोट बैंक के बीच अच्छा है. बता दें कि अनुप्रिया उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से सांसद हैं.

निषाद वोट बैंक पर BJP की नजर!

मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले नामों में एक और नाम की चर्चा तेज है और वो हैं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद. प्रवीण निषाद बीजेपी से संतकबीरनगर से सांसद हैं. निषाद पार्टी का गोरखपुर क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है. यूपी से बीजेपी ब्राह्मण और ओबीसी चेहरों को भी जगह दे सकती है.

ये नाम भी रेस में

ब्राह्मण चेहरों में प्रयागराज से सांसद रीता बहुगुणा जोशी, कानपुर से सांसद सत्यदेव पचौरी, बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी, गौतमबुद्धनगर से सांसद डॉ महेश शर्मा, राज्य सभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला का नाम चल रहा है, किसी एक को जगह मिल सकती है. 

ओबीसी चेहरों में इन नामों की चर्चा

राज्य सभा सांसद बीएल वर्मा और कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह का नाम चर्चा में है. राजवीर लोध जाति से हैं और मध्य यूपी में लोध वोट बैंक का अच्छा प्रभाव माना जाता है. आगरा से सांसद एसपी सिंह बघेल भी दौड़ में शामिल हैं. 

कयासों का दौर जारी

दलित चेहरों में इटावा से सांसद रामशंकर कठेरिया के नाम की भी चर्चा है. पश्चिमी यूपी कैराना से सांसद प्रदीप कुमार का भी लिया जा रहा है. प्रदीप गुर्जर बिरादरी से हैं. हालांकि ये सब महज कयास हैं, यूपी से संख्या कितनी होगी और कौन-कौन मंत्रिमंडल में शामिल होगा ये जानने के लिए अभी और इंतजार करना होगा.

इस वक्त यूपी से कितने मंत्री?

– देश के प्रधानमंत्री वाराणसी से सांसद हैं
– रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं
– यूपी से ही राज्य सभा सांसद हरदीप सिंह पुरी भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं
– यूपी से ही सांसद साध्वी निरंजन ज्योति केंद्र सरकार में मंत्री हैं
– चंदौली से सांसद महेन्द्रनाथ पांडेय कैबिनेट मंत्री हैं
– मुजफ्फरनगर से सांसद संजीव बालियान भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं 
– गाजियाबाद से सांसद जनरल वीके सिंह भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं
– बरेली से सांसद संतोष गंगवार केंद्र सरकार में मंत्री हैं
– अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं
– राज्य सभा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी भी यूपी से सांसद हैं, रामपुर इनकी कर्मभूमि मानी जाती है

UP: BJP के लिए दोहरी खुशखबरी, अब बिना चुनाव के ही विधान परिषद में उसे मिलेंगी और 4 सीटें, जानें कैसे :

लखनऊ –  जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बंपर जीत की खुमारी अभी भाजपा (BJP) के सिर से उतरी भी नहीं होगी. इसी बीच उसे एक और बड़ी सफलता हाथ लगने वाली है. बिना चुनाव लड़े ही उसके चार विधायक विधान परिषद (Legislative council) में पहुंचने वाले हैं. वैसे तो परिषद में भाजपा को बहुमत नहीं है लेकिन इन चार विधायकों के सहारे वह बहुमत के करीब आ जाएगी. असल में 5 जुलाई को विधान परिषद के 4 विधायकों (4 MLAs) का कार्यकाल खत्म हो रहा है. यह चारों विधायक समाजवादी पार्टी के हैं. इनकी जगह अब भाजपा के द्वारा चुना गया व्यक्ति विधान परिषद में विधायक बनेगा. अखिलेश सरकार ने साल 2015 में लीलावती कुशवाहा, रामवृक्ष सिंह यादव, एसआरएस यादव और जितेंद्र यादव को परिषद का सदस्य बनाया था. साल 2020 में कोरोना वायरस आर एस यादव का निधन हो गया था.

आदिवासी समाज के लिए BJP चलाएगी ये अभियान, कांग्रेस बोली- कमलनाथ पिछले जन्म में आदिवासी रहे होंगे |

बता दें कि इन चारों सीटों पर चयन के लिए कोई चुनाव नहीं होगा. ये चारों सीटें मनोनीत क्षेत्र की हैं. यानी भाजपा सरकार जिन चार व्यक्तियों को मनोनीत करके राज्यपाल के पास भेजेगी वही सदन पहुंचेगा. 5 जुलाई के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. 100 सदस्यों वाली यूपी की विधान परिषद में 10 सदस्यों को मनोनीत करके भेजा जाता है. सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल इन्हें मनोनीत करते हैं. वैसे तो मनोनीत क्षेत्र के सभी सदस्यों को साहित्य, कला, सहकारिता, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से चुना जाना चाहिए लेकिन पिछले कुछ सालों में राजनीतिक लोगों को ही मनोनीत किए जाने का चलन शुरू हो गया है. यूपी विधान परिषद में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के 32 विधायक हैं. 5 जुलाई के बाद यह फिगर बदल जाएगी. 4 सदस्यों के साथ उसकी संख्या 36 हो जाएगी. हालांकि ये संख्या भी उच्च सदन में बहुमत से कम ही है.

हम 300 से ज्यादा सीटें जीतेंगे

दरअसल, उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को बंपर जीत मिली हैं. भाजपा को राज्य की 75 में से 65 सीटों पर जीत मिली है. दो सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं. वहीं, सपा को 5 सीटें मिली हैं. एक पर उसकी सहयोगी पार्टी रालोद ने कब्जा किया है. जबकि प्रतापगढ़ सीट पर राजा भइया की पार्टी विजयी रही है. 2016 में सपा ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी. जीत के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “जिला पंचायत अध्यक्ष की 75 में से 67 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. मैं भाजपा कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देता हूं. बीजेपी 2022 का चुनाव बड़े अंतर से जीतेगी. हम 300 से ज्यादा सीटें जीतेंगे.

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आदिवासी समाज के लिए BJP चलाएगी ये अभियान, कांग्रेस बोली- कमलनाथ पिछले जन्म में आदिवासी रहे होंगे :

भोपाल – मध्य प्रदेश की राजनीति में अब आदिवासी वर्ग को एक बार फिर साधने की कवायत शुरू हो गई है. हाल ही में हुई बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आदिवासी वर्ग को लेकर बीजेपी में जमकर मंथन हुआ. जिसको लेकर बीजपी ने अब तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. तो वहीं कांग्रेस भी इस वर्ग पर अपने पकड़ बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. 

बीजेपी चलाएगी अभियान 

बीजेपी कार्यसमिति में हुई बैठक में अनुसचितजाति और अनुसूचित जनजाति को जोड़ने की प्लानिंग के बाद अब अब भाजपा जनजातीय समाज में प्रचलित रामायण पर आधारित लीलाएं जैसे शबरी लीला, निषाद राज लीला और रामायणी लीलाओं का मंचन करने की तैयारी में जुटी है. ताकि इस बड़े वोट बैंक को अपनी तरफ किया जा सके. बीजेपी जल्द ही इस योजना पर काम शुरू करेगी. जिसकी शुरूआत प्रदेश के आदिवासी अंचलों से की जाएगी. 

आदिवासी समाज से जुड़ी आधारित लीलाओं पर बीजेपी के प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय कहते हैं कि भाजपा हर वर्ग को समाज की जड़ों से जोड़ने का काम करती है, देश में जिस तरह अंग्रेजों, मुगलों, तुर्को ने विभाजन का काम किया है कांग्रेस उसी काम को आगे बढ़ा रही है. लेकिन बीजेपी आदिवासी समाज के हित में काम करती है. 

पीसी शर्मा ने कांग्रेस ने कमलनाथ को बताया आदिवासी हितेषी 

आदिवासियों को साधने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है. कांग्रेस भी इस वर्ग पर पकड़ मजबूत करने में लगी है. कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कांग्रेस पार्टी को आदिवासियों का हितेषी बताया. इतना ही नहीं पीसी शर्मा ने कमलनाथ को आदिवासियों का बड़ा हितेषी बताते हुए कहा कि कमलनाथ पिछले जन्म में आदिवासी रहें होंगे. आदिवासियों के सबसे बड़े हितेषी है कमलनाथ. बीजेपी केवल झूठ बोलकर आदिवासियों को बहकाना चाहती है. लेकिन भाजपा का इन झूठ की लीलाओं से कोई काम नहीं चलेगा. अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सभी सीटें जीतेंगी!

दरअसल, पिछले दिनों भाजपा प्रदेश प्रभारी और भाजपा नेताओं के बीच हुई बैठक में जनजातीय वर्ग को भाजपा से जोड़ने का प्लान तैयार किया गया था!, प्रदेश का सियासी इतिहास रहा है की जनजाति वर्ग का झुकाव जिस पार्टी की तरफ रहता है, प्रदेश में सरकार उसी की बनती है. 2018 में बीजेपी की इस वोटबैंक पर पकड़ ढीली हुई थी जिसका नुकसान विधानसभा चुनाव में उठना पड़ा था. ऐसे में बीजेपी प्रदेश सरकार में अनुसूचित जनजाति वर्ग के नेताओं को पर्याप्त स्थान दिया है. शिवराज सरकार में विजय शाह, मीना सिंह, बिसाहूलाल सिंह, प्रेम सिंह पटेल, रामकिशोर कांवरे मंत्री पद पर है. ये सभी नेता आदिवासी वर्ग से आते हैं. इसके अलावा इसी वर्ग से आने वाले फग्गन सिंह कुलस्ते  मोदी सरकार में मध्य प्रदेश का नेतृत्व करते हैं. 

क्यों अहम है आदिवासी 

प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें तो 6 लोकसभा सीटें आरक्षित हैं. जबकि सामान्य वर्ग की भी 31 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां आदिवासी वोट हार-जीत में निर्णायक भूमिका में रहता है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश की सियासत में आदिवासी वोट बैंक राजनीतिक दलों के लिए सबसे अहम होता क्योंकि आदिवासी वोट जिस करवट बैठ जाता है सरकार उसी दल की बनती है.

आदिवासी वोटबैंक को वापस पाने की कोशिश में बीजेपी

पिछले कुछ सालों में आदिवासी वोट तेजी से बीजेपी की तरफ मुड़ा है. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ की आदिवासी सीटों पर कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली जिसके चलते प्रदेश में कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में वापसी करने में सफल हुई थी. लेकिन सिंधिया की बगावत से सरकार गिर गयी. लेकिन बीजेपी अपने इस वोटबैंक को फिर से मजबूत करना चाहती है तो कांग्रेस भी इस वोट बैंक पर पकड़ मजबूत बनाए रखने में जुटी है. 

UP Assembly Elections 2022 से पहले बड़ी साजिश? ATS चला रही ‘ऑपरेशन रोहिंग्या’

मेरठ –  उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh police) की ATS विधान सभा चुनाव ( UP Assembly Elections 2022) से पहले अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya) के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है. अब तक 11 रोहिंग्या मुलसमानों को गिरफ्तार किया जा चुका है. शुक्रवार को (18 जून) को एटीएस ने 4 रोहिंग्या मुसलमानों को मेरठ के खरखौदा के अल्लीपुर गांव और बुलंदशहर से गिरफ्तार किया है.

सरगना ने खोले अहम राज

अल्लीपुर गांव से गिरफ्तार किए मुख्य आरोपी हाफिज शफीक ने पुलिस को बताया कि वो म्यांमार से रोहिंग्या मुलसमानों (Rohingya) को भारत की सीमा में दाखिल करवाता है और फिर यूपी लाकर उनके फर्जी पहचान पत्र तैयार करवाता है. फिर ये ही रोहिंग्या मुसलमान गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होते हैं और ये बात भी निकल कर सामने आई कि इनको लाने के एवज में जो रुपए मिलते हैं, उनको देश विरोधी गतिविधियों में लगाया जाता है.

अल्लीपुर गांव बना रोहिंग्या मुसलमानों की ‘शरण स्थली’

जिस मेरठ के खरखौदा के अल्लीपुर गांव में रोहिंग्या मुसलमान हाजी शफीक को गिरफ्तार किया. ज़ी मीडिया की टीम उस गांव में पहुंची तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ. स्थानीय लोगों ने कहा, यहां काफी तादात में रोहिंग्या मुसलमान रहते थे, लेकिन वक्त के साथ संख्या कम हुई है. लेकिन UP ATS का रोहिंग्या मुसलमान के खिलाफ ऑपरेशन इतना सीक्रेट रखा गया है कि यहां रहने वाले लोगों को भी नहीं मालूम है कि UP ATS की टीम ने यहां से रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है. 

MP में कांग्रेस का मिशन 2023 शुरू, BJP ने कहा- युवाओं के कैरियर की हत्या कर रहे कमलनाथ :

भोपाल –  प्रदेश में कोरोना अब कंट्रोल में है। लेकिन अब सियासी हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस ने अब मिशन 2023 पर काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जिलों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है. जिन इलाकों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है, वहां पर कांग्रेस पार्टी फोकस कर रही है. कमलनाथ ने बीते दिनों उज्जैन, मैहर और मुरैना का दौरा कर पार्टी संगठन को मजबूत बनाने और 2023 के संभावित उम्मीदवारों को लेकर क्षेत्र की नब्ज टटोलने शुरू कर दिया है. कमलनाथ ने कोरोना संक्रमण के बाद अब जिला वार बैठक करने की तैयारी कर ली है.

कमलनाथ के तय कार्यक्रम के मुताबिक 8 और 9 जून को कमलनाथ छिंदवाड़ा में दौरा करेंगे. इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ सिवनी, मंडला, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा समेत आधा दर्जन जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन की गतिविधियों को बढ़ाने और पार्टी को मजबूती देने को लेकर मंथन करेंगे. प्रदेश में अचानक से कमलनाथ की बढ़ी सक्रियता को लेकर अब यह कयास लगाए जाने जा रहे हैं कि 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने जहां पर चुकी थी उसमें अब सुधार करते हुए 2023 के चुनाव की तैयारी की जा रही है.

मतलब साफ है कि कमलनाथ अब 2018 के मुकाबले पार्टी को मजबूत बनाते हुए 2023 में पार्टी की वापसी की कोशिश में जुट गए हैं. यही कारण है जहॉ पार्टी कमजोर है, वहां कमलनाथ ने संगठन को मजबूत बनाने समेत उन जिलों पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है जहां पार्टी बीजेपी के मुकाबले कमजोर है.

कमलनाथ के मिशन 2023 पर अभी से काम शुरू करने को लेकर बीजेपी ने तंज कसा है. बीजेपी के  मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने कहा है कि कमलनाथ प्रदेश में युवा युवाओं के कैरियर की हत्या करने में लगे हैं. कमलनाथ को पार्टी के अंदर युवाओं को मौका देना चाहिए, लेकिन कमलनाथ की रीति नीति कांग्रेस पार्टी को बर्बाद करने खत्म करने में लगी हुई है. लोकेंद्र पाराशर ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में अजय सिंह जैसे नेता अब मुखर होने लगे हैं मतलब साफ है कि कांग्रेस में बन रहे एकमात्र पावर सेंटर के खिलाफ अंतर कलह अब उभर कर सामने आ रही है.
बहरहाल 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के मुकाबले में ज्यादा सीटें हासिल की थी लेकिन कांग्रेस का बीजेपी के मुकाबले में वोट प्रतिशत कम था. यही कारण है की विधानसभा चुनाव के करीब ढाई साल पहले कमलनाथ ने पार्टी गतिविधियां बढ़ाने के साथ संगठन को मजबूती देने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. मतलब साफ है कि प्रदेश में 2023 के चुनाव के पहले की सियासी हलचल है अभी से नजर आने लगी है.

भाजपा का जो हाल बंगाल में हुआ वहीं उत्तर प्रदेश में होगा, किसान मोर्चा ने तैयार की रणनीति:

जींद (हरियाणा) – किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि भाजपा का जो हाल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुआ वहीं हाल आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में भी होगा. उन्होंने जींद के उझाना गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जो भी पार्टी अपने घोषणा पत्र में तीनों नए कृषि कानूनों को सही ठहराएगी, किसान उसका सूपड़ा साफ करने का काम करेंगे.

टिकैत ने कहा उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से भी बुरा हाल भाजपा का विधानसभा चुनाव में होगा और इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने रणनीति तैयार कर ली है. उन्होंने कहा कि जहां तक आंदोलन की सफलता की बात रही तो किसान सफल होने तक आंदोलन करेंगे, लेकिन हमें विश्वास है कि 2024 के बाद किसान आंदोलन नहीं करेंगे, क्योंकि तब तक तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएंगे और कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी) की गारंटी पर कानून बन जाएगा.

गौरतलब है कि उझाना गांव में पिछले छह दिनों से एक किसान आग का घेरा बनाकर किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा था जिसे मनाने संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य उझाना गांव में पहुंचे थे. टिकैत ने बद्दोवाल टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें चुनाव के दौरान अपनी ताकत दिखानी होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं.

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार चुनाव की तैयारी करेगी, दूसरी तरफ हम सरकार को सबक सिखाने की तैयारी करेंगे. तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीच 10 से अधिक दौर की बातचीत गतिरोध खत्म करने में विफल रही है.

BJP के आरोपों पर कांग्रेस ने लिखी दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्‌ठी; जेपी नड्डा, स्मृति ईरानी और संबित पात्रा पर FIR की मांग :

भाजपा और कांग्रेस के बीच टूलकिट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सुबह भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर एक विशेष टूलकिट के जरिए सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया।वहीं, दोपहर में कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा पर झूठा आरोप लगाने और मामले में FIR दर्ज करवाने की चेतावनी दे डाली। शाम को कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्‌ठी लिखकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, संगठन महासचिव बीएल संतोष और पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा समेत दिग्गज नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर डाली।

BJP प्रवक्ता का आरोप- टूलकिट के जरिए PM की छवि खराब कर रही कांग्रेस

सबसे पहले भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आज सुबह एक वर्चुअल पीसी की। उन्होंने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कोरोना जैसे संकट काल में विपक्षी दल की गिद्धों की राजनीति उजागर हुई है। पात्रा ने इसके लिए एक ‘टूलकिट’ का हवाला दिया।उन्‍होंने दावा किया किया महामारी के इस मुश्किल समय में कांग्रेस की रिसर्च विंग देश और प्रधानमंत्री को बदनाम करने में लगी है। पात्रा ने आगे बताया कि टूलकिट के जरिए कांग्रेस के लोगों को इंडियन स्‍ट्रेन को मोदी स्‍ट्रेन कहने के लिए कहा गया है। वहीं, कुंभ को सुपर स्‍प्रेडर की तरह प्रचारित करना है। पात्रा ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी जो हर सुबह ट्वीट करते हैं, वो भी इसी टूलकिट का हिस्सा है, जिसके जरिए सरकार को बदनाम किया जा रहा है।

पात्रा के आरोपों का कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने दिया जवाबसंबित पात्रा के आरोपों पर दोपहर में कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने जवाब दिया। इनमें सबसे पहले कांग्रेस रीसर्च विंग के प्रमुख राजीव गौड़ा ने ट्वीट कर कहा कि भाजपा ‘कोविड कुप्रबंधन’ पर फर्जी टूलकिट का दुष्प्रचार कर रही है। इसे कांग्रेस के शोध विभाग से जोड़ रही है। हम जालसाजी को लेकर जेपी नड्डा और संबित पात्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा रहे हैं।

’उन्होंने दावा किया कि हमारा देश कोविड की तबाही का सामना कर रहा है, ऐसे समय लोगों को राहत प्रदान करने की बजाय भाजपा बेशर्मी के साथ फर्जीवाड़ा कर रही है।इसके बाद पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी की ट्रोल आर्मी इस तरह का प्रोपगेंडा फैला रही है। जब देश और सरकार को महामारी से लड़ना चाहिए, तब उनकी पार्टी और नेता फर्जी टूलकिट फैलाने में लगे हुए हैं।

वहीं रणदीप सुरजेवाला ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि जेपी नड्‌डा और उनके अन्य नेताओं पर केस दर्ज करवा रहे हैं, पर जान लें कि इन कुकृत्यों से सच नहीं छुप सकती है।

दिनभर की बयानबाजी के बाद शाम को कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और एसएचओ तुगलक रोड पुलिस स्टेशन को चिट्ठी लिखी है। इसमें जेपी नड्डा, संबित पात्रा, स्मृति ईरानी, बीएल संतोष समेत कई अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई है।

कांग्रेस ने चिट्‌ठी में लिखा कि इन लोगों ने देश में सांप्रदायिक अशांति फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया के जरिए झूठी बातें फैलाई हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबित पात्रा बीएल संतोष सहित बीजेपी के अन्य लोगों ने जेपी नड्डा के कहने पर एक फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेज तैयार किया है। इसके लिए इन लोगों ने AICC रिसर्च डिपार्टमेंट का लेटरहेड भी तैयार किया है। इसलिए इन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

क्या होता है टूलकिट?

‘टूलकिट’ एक प्रकार का दस्तावेज होता है जिसमें अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए बिंदुवार मुद्दे होते हैं। अभियान को धार देने के लिए इन्हीं मुद्दों पर विरोधियों को घेरने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाता है। हाल ही में किसान आंदोलन के दौरान भी एक ‘टूलकिट’ सामने आया था, जिसकी काफी चर्चा भी हुई थी।