Pooja Awana Success Story: 22 साल की उम्र में पास किया UPSC एग्जाम :

UPSC Success Story – उत्तर प्रदेश की रहने वाली पूजा अवाना (Pooja Awana) ने महज 22 वर्ष की उम्र में यूपीएससी एग्जाम पास कर लिया था और इन दिनों राजस्थान पुलिस में डीसीपी पद पर तैनात हैं. हाल में एस्पिरेंट (Aspirant) नाम की एक वेबसीरीज आई थी, जिसमें यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे तीन दोस्तों की कहानी दिखाई गई है. इस मौके पर हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों की स्टोरी बता रहे हैं, जिन्होंने कई मुश्किलों का सामना कर यूपीएससी पास किया.  

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पिता का सपना था बेटी बने IPS

पूजा अवाना (Pooja Awana) के पिता विजय अवाना अपनी बेटी को पुलिस की वर्दी में देखना चाहते थे और पिता के सपने को पूरा करने के लिए पूजा ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की, हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था.

पहले प्रयास में रही थीं असफल

नोएडा के अट्टा गांव की रहने वाली पूजा अवाना (Pooja Awana) शुरुआत से पढ़ाई में अव्वल रहीं और ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. साल 2010 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया, हालांकि वे सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

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दूसरे प्रयास में मिली सफलता

पूजा अवाना (Pooja Awana) को पहले प्रयास में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने दूसरी बार ज्यादा तैयारी के साथ एग्जाम दिया और सफल रही. पूजा ने ऑल इंडिया में 316वीं रैंक प्राप्त की और मात्र महज 22 वर्ष की उम्र में आईपीएस बनने में सफल रहीं.

बनीं राजस्थान कैडर की IPS

ट्रेनिंग के बाद पूजा अवाना (Pooja Awana) की पहली पोस्टिंग पुष्कर में हुई थी. इसके बाद विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने जयपुर ट्रैफिक उपायुक्त पर भी सेवाएं दे चुकी हैं और फिलहाल राजस्थान पुलिस में डीसीपी पद पर तैनात हैं.

बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं स्टाइल

2012 बैच की आईपीएस अफसर पूजा अवाना (Pooja Awana) अपने कामों के अलावा लुक और स्टाइल को लेकर भी चर्चा में रहती हैं. वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और इंस्टाग्राम पर अक्सर स्टाइलिश फोटोज शेयर करती रहती है.

यूपीएससी एस्पिरेंट को टिप्स

पूजा अवाना (Pooja Awana) कहती हैं कि नाकामयाबी या बहुत अच्छे मार्क्स नहीं मिलने से हताश होने की जरूरत नहीं है. असफलता, कम मार्क्स या पहले प्रयास में कामयाबी नहीं मिलने से निराश न हों, अपने लक्ष्य पर डटे रहें और सपनों के पीछे और कड़ी मेहनत से लग जाएं. इस बार नहीं तो अगली बार सही, कामयाबी आपसे दूर नहीं रहेगी.

एक महिला ने दिलाई भारत को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मोटर स्पोर्ट्स में जीत :

कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती की कोई शौकिया तौर पर ही बाइकिंग करते करते विश्व चैंपियन बन जायेगा। और यही हुआ बंगलुरु की रहने वाली ऐश्वर्या पीसे के साथ। जिन्होंने मात्र 4-5 साल के अपने बाइकिंग के प्रति प्यार को गंभीरता से लिया और आज वे मोटर बाइकिंग में महिलाओं के वर्ग की FIM वर्ल्ड कप विजेता बन गयीं हैं। इस प्रतियोगिता को जीतने वाली ये पहली महिला खिलाड़ी हैं। इसका आयोजन हंगरी में इंटरनेशनल मोटरसाइकिलिंग फेडरेशन ने किया था। ऐश्वर्या ने ये प्रतियोगिता पुर्तगाल की रीता विएरा को हराते हुए 65 अंकों के साथ जीती। जबकि पिछले ही साल स्पेन में आयोजित इसी प्रतियोगिता में ऐश्वर्या गंभीर रूप से घायल हुईं थीं। एक बार को तो इन्हें लगा था की ये कभी भी इस खेल को नहीं खेल पाएंगी लेकिन अपने दृढ़ विश्वास और कड़ी मेहनत के बल बूते पर इन्होने एक असंभव काम को भी सच कर दिखाया।

व्हीलचेयर पर ही बैठ कर जीत ली दुनियाँ – Inspiring Story

ऐश्वर्या को इस खेल में रूचि बड़े ही सहज भाव से आने लगी थी। वीकेंड की छुट्टियों पर ऐश्वर्या अपने दोस्तों के साथ निकल पड़ती थीं घूमने और यहीं से उन्हें बाइकिंग का एक तरह से नशा सा छाने लगा। उन्हें बाइकिंग से इतना प्यार हो गया की 2015 से ये कोइम्बटोर की अपैक्स रेसिंग अकादमी से जुड़ गयीं। और यहीं से इन्होने रेसिंग की दुनियाँ में प्रवेश किया। बाइकिंग इनकी रग-रग में बसने लगा।

अपने बाइकिंग के जूनून के साथ ऐश्वर्या इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में द्वितीय स्थान भी प्राप्त कर चुकी हैं।

मोटर बाइकिंग की दुनियाँ में भारत को एक विश्वस्तरीय दर्जा दिलाने पर ये अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानती हैं।
23 वर्षीया ऐश्वर्या अब मोटर बाइकिंग की सबसे कठिन प्रतियोगिता डाकर रैली को जीतने की पूरी तैयारी में जुट चुकी हैं ताकि वे अपने देश को इसी तरह बुलंदियों पर ले जा सकें।

व्हीलचेयर पर ही बैठ कर जीत ली दुनियाँ – Inspiring Story

“ताकत जीतने से नहीं आती है, आपका संघर्ष ही आपकी ताकत है। बिना समर्पण किये जब आप कठिनाइयों से गुजरते हुए आगे बढ़ते हैं तो यही आपकी असली ताकत बन जाती है।”

विख्यात हॉलीवुड अभिनेता और बॉडीबिल्डर Arnold Schwarzenegger के इन्हीं विचारों से प्रेरित होकर याना के आनंद अन्नोल्ड ने कैंसर और लकवे की बीमारी से लड़ते हुए अपने मनोबल और कड़ी मेहनत से आज नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाया। अपने बड़े भाई को देखकर आनंद को बचपन से ही बॉडीबिल्डिंग से लगाव हो गाया था। 15 साल की उम्र तक आते-आते इन्हें अपनी रीढ़ की हड्डी के कैंसर का पता चला जिसके इलाज के दौरान इनके कमर के निचले हिस्से को लकवा भी मार गया। लेकिन फिर भी इन्होंने अपनी अपंगता को कभी आड़े नहीं आने दिया और व्हीलचेयर से बंधे-बंधे ही उन्होंने अपना प्रशिक्षण जारी रखा और दिन-रात मेहनत कर कई प्रतियोगिताएं जीतीं जिसमें 4 बार मिस्टर इंडिया मिस्टर नार्थ इंडिया और 12 बार मिस्टर पंजाब शामिल है। साथ ही à 2016 À World Mr. Wheelchair Body Builder बने।

आनंद भारत के ऐसे पहले खिलाड़ी हैं जो व्हीलचेयर पर बैठ कर बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। आनंद की जीवनी पर Allen Woodman द्वारा Weightless – A True Story Of Courage And Inspiration’ a14h एक किताब भी लिखी गयी है। आनंद इंडियाज गॉट टैलेंट में भी अपना हुनर दिखा चुके हैं। साथ ही ये तेलगु फिल्म Supreme में भी नज़र आये थे। आजकल आनंद अमेरिका के Las Vegas शहर में रहते हुए HaleLife Nutrition And Fitness कंपनी के ब्रांड अम्बेसडर के रूप में काम करते हैं।

भारत के Arnold Schwarzenegger के नाम से मशहूर आनंद ने आज अपने जज़्बे से ये साबित कर दिया है की यदि हम में आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय कूट-कूट कर भरा हो तो शारीरिक अपंगता कभी भी हमारी कमज़ोरी नहीं बन सकती।