एमपी में कोरोना की तीसरी लहर को रोकना है टीकाकरण के काम को दोबारा गति दें : शिवराज

कोरोना की तीसरी लहर को हर हाल में रोकना है। किसी भी जिले में कोरोना की जांच कम न की जाए। मास्क लगाना, शारीरिक दूरी बनाकर रखने सहित अन्य सावधानियां अनिवार्य रूप से बरती जाएं। टीकाकरण के काम को दोबारा गति दी जाए। जिन्होंने पहली डोज लगवा ली है वे दूसरी डोज जरूर लगवाएं। इसके बाद ही कोरोना संक्रमण से पूरी सुरक्षा मिलेगी। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कोरोना की स्थिति और टीकाकरण कार्य की समीक्षा करते हुए कही।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाए। बारिश की वजह से टीकाकरण का काम प्रभावित हुआ था लेकिन अब महा अभियान चलाया जाए। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 70 हजार कोरोना टेस्ट होते हैं। अशोकनगर, श्योपुर, कटनी, राजगढ़, खरगोन, ग्वालियर, विदिशा, दतिया, रतलाम तथा बालाघाट जिलों में जांच कम हो रही है। इसे बढ़ाया जाए।

सीएम शिवराज सिंह ने दमोह, डिंडौरी, आलीराजपुर, इंदौर और देवास जिले में लक्ष्य से अधिक जांच किए जाने पर बधाई दी। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कोरोना के 10 नए प्रकरण आए हैं। सक्रिय प्रकरणों की संख्या 149 है। नए साप्ताहिक प्रकरण 108 हैं। प्रदेश में दो करोड़ 93 लाख पात्र व्यक्तियों को पहली और 57 लाख को दूसरी डोज लग चुकी है।

देश में फिर बढ़ रहा कोरोना का खतरा? एक हफ्ते में दोगुनी हुई पॉजिटिविटी रेट :

नई दिल्‍ली –  देश में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) दूसरी लहर में कहर बरपाने के बाद अब कुछ कम हुआ है. ऐसे में राज्‍यों में पाबंदियां हटाई जा रही हैं. लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं और लापरवाही बरत रहे हैं. ऐसे में अब कोरोना वायरस संक्रमण (Covid 19 in India) के खतरे के लौटने की आशंका बढ़ गई है. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्‍योंकि देश की टेस्‍ट पॉजिटिविटी रेट महज एक हफ्ते में बढ़कर दोगुनी हो गई है.

एक हफ्ते पहले स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमण की टेस्‍ट पॉजिटिविटी दर 1.68 फीसदी थी, जबकि सोमवार को पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार यह टेस्‍ट पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई. यह चिंता का विषय है. इसका मतलब है कि देश में लोग फिर से अधिक संख्‍या में संक्रमित हो रहे हैं और यह कोरोना वायरस के फिर उफान मारने से पहले का समय है.

टेस्‍ट पॉजिटिविटी की बात करें तो देश में 20 जुलाई को यह 1.68 फीसदी थी. 21 जुलाई को यह बढ़कर 2.27 फीसदी हो गई. 22 जुलाई को यह 2.40 हो गई. 23 जुलाई को यह 2.12 और 24 जुलाई को यह बढ़कर 2.4 हो गई. वही अब 26 जुलाई को यह 3.40 रिकॉर्ड की गई है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्‍ली के सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल विभाग की डॉ. पूजा खोसला का कहना है कि लोगों को लापरवाही करने से बचाना चाहिए. लोगों को कोरोना की दूसरी लहर से सबक लेते हुए बचाव के नियमों का सख्‍ती से पालन करना होगा. वहीं सीरो सर्वे में बड़ी आबादी के शरीर में एंटीबॉडी पाए जाने के बाद से कई विशेषज्ञ यह उम्मीद कर रहे हैं कि दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर ज्यादा मारक नहीं होगी.

महाराष्ट्र में कोरोना का कहर जारी, 24 घंटे में 7,302 नए मामले, 120 लोगों की मौत :

मुंबई –  महाराष्ट्र (Maharashtra) में बृहस्पतिवार को कोविड-19 (Covid-19) के 7,302 नए मामले सामने आए जबकि 120 लोगों ने इस संक्रमण से जान गंवायी. राज्य में अब तक 62,45,057 लोग संक्रमित हुए जिनमें से 1,31,038 की मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 7,756 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई, जिससे ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 60,16,506 हो गई. फिलहाल 94,168 कोविड-19 मरीज उपचाराधीन हैं. महाराष्ट्र में कोविड-19 मरीजों के ठीक होने की दर 96.34 प्रतिशत है, जबकि मृत्यु दर 2.09 प्रतिशत है.

अधिकारी ने बताया कि नंदुरबार, धुले और वर्धा जिलों से बृहस्पतिवार को कोई नया मामला सामने नहीं आया. अधिकारी के अनुसार, मुंबई में कोविड-19 के 389 नए मामले आए, जिससे महानगर में कुल मामले बढ़कर 7,32,971 तक पहुंच गए, जबकि 10 और मौत होने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 15,810 हो गई. नासिक संभाग में कोविड-19 के 886, पुणे संभाग में 2,427, कोल्हापुर संभाग में 2458, औरंगाबाद संभाग में 59, लातूर संभाग में 223, अकोला संभाग में 38 और नागपुर संभाग में 21 नये मामले सामने आये. राज्य में अब तक 4,62,64,059 कोविड-19 जांच करायी गयी हैं.

देश में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहे महाराष्ट्र में 1 जुलाई 2021 को महामारी के 8085 नए केस सामने आए थे. माना जा रहा है कि इस एकाएक आए उछाल के पीछे मुख्य कारण राज्य में टेस्टिंग स्पीड बढ़ाया जाना है. मंगलवार को कुल 190140 सैंपल की टेस्टिंग हुई वहीं सोमवार को 166163 सैंपल की टेस्टिंग हुई थी. दरअसल महाराष्ट्र में कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस की मौजूदगी के कारण राज्य सरकार सतर्क हो गई है. इसी के मद्देनजर कई कदम उठाए जा रहे हैं.

महाराष्‍ट्र में बुधवार को कोविड-19 के 8,159 नए मामले सामने आए थे

महाराष्ट्र में बुधवार को कोविड-19 के 8,159 नए मामले सामने आए और 165 लोगों की मौत हो गई, जिससे राज्य में अब तक हुए संक्रमितों की संख्या बढ़कर 62,37,755 हो गई और मरने वालों की संख्या 1,30,918 हो गई. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 7,839 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई, जिससे ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 60,08,750 हो गई. राज्य में अब 94,745 कोविड-19 मरीज उपचाराधीन हैं.

देशभर में अब तक लगी 40 करोड़ वैक्सीन की डोज़, चीन के बाद दूसरे नंबर पर भारत :

नई दिल्ली – भारत ने कोरोना वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccine) के मोर्चे पर नया रिकॉर्ड बनाया है. शनिवार तक भारत में 40 करोड़ वैक्सीन की डोज़ लग चुकी है. अगर चीन को छोड़ दें तो किसी भी देश में अब तक इतनी बड़ी संख्या में वैक्सीन नहीं लगी है. स्वास्थ मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबित अब तक देश भर में 31.84 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है. भारत में टीकाकरण अभियान इस साल 16 जनवरी से शुरू हुआ था. फिलहाल यहां 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है.

अगस्त के आखिर में आ सकती है कोरोना वायरस की तीसरी लहर: ICMR

आंकड़ों पर नज़र डालें तो अब तक देशभर में एक तिहाई से ज्यादा जनसंख्या को वैक्सीन लग चुकी है. ये उन लोगों के आंकड़े हैं जो वैक्सीन लगाने के योग्य है. यानी जिनकी उम्र 18 साल से ज्यादा है. अब तक 25.2 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग गई है. जबकि 8.7 % लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है. भारत को वैक्सीन के मोर्चे पर अभी भी लंबी लड़ाई लड़नी है. दो तिहाई लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ लगनी बाक़ी है. उधर कई राज्यों को वैक्सीन की कम से भी दो चार होना पड़ रहा है.

100% टीकाकरण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि शनिवार को भी, जम्मू और कश्मीर में दो पंचायतों ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए 100% टीकाकरण पूरा किया. उन्होंने कहा, ‘मैं आशा [कार्यकर्ताओं] और जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में दो पंचायतों के लोगों को 100% टीकाकरण के लिए बधाई देना चाहता हूं. जिस तरह से वे टीकाकरण अभियान को सबसे दुर्गम स्थानों पर ले गए हैं, वह सराहनीय है.’

कोरोना वायारस से क्यों कुछ लोग बेहद बीमार हो जाते हैं, जबकि कुछ में कोई लक्षण नहीं दिखते?

टीकाकरण की रफ्तार में कमी

टीकाकरण अभियान की रफ्तार पर नज़र डालें तो पिछले सप्ताह भारत में औसतन लगभग 40.1 लाख शॉट्स हर दिन लग रहे थे. जून के तीसरे सप्ताह से अगल तुलना की जाए तो इसमें करीब 36 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. राज्य सरकारों ने भी हाल ही में कहा है कि उन्हें खुराक की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. कम आपूर्ति के कारण कुछ टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है. मंडाविया ने बुधवार को कहा कि जुलाई में वैक्सीन की उपलब्धता 12 करोड़ डोज से बढ़ाकर 13 करोड़ 50 लाख कर दी गई है. 17 जुलाई की शाम तक महीने में करीब 64 लाख खुराकें पिलाई जा चुकी थीं.

अगस्त के आखिर में आ सकती है कोरोना वायरस की तीसरी लहर: ICMR

Coronavirus Third Wave: डॉ पांडा ने कहा कि तीसरी लहर देशव्यापी होगी हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि यह दूसरी लहर की तरह भयावह और तेजी से फैलने वाली होगी.

भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर (Coronavirus Third Wave) अगले महीने के अंत तक आ सकती है हालांकि इसका असर दूसरी लहर के मुकाबले कुछ कम होगा. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में हेड ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज, डॉ समीरन पांडा ने यह अनुमान जताया है. एनडीटीवी से बातचीत में डॉ पांडा ने कहा कि तीसरी लहर देशव्यापी होगी हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि यह दूसरी लहर की तरह भयावह और तेजी से फैलने वाली होगी.

डॉ पांडा ने तीसरी लहर आने के चार कारकों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि पहला कारण पहली और दूसरी लहर में हासिल की गई इम्युनिटी का कम होना है. उन्होंने कहा कि अगर ये नीचे जाती है तो तीसरी लहर आ सकती है. दूसरा कारक उन्होंने बताया कि अभी तक हासिल की गई इम्युनिटी पर नया वेरिएंट बढ़त बना सकता है. अगर वेरिएंट इम्युनिटी को पार नहीं कर पाता है तो इसकी प्रकृति तेजी से फैलने वाली हो सकती है जिसे उन्होंने तीसरे कारक के रूप में बताया.

पांडा ने चौथा कारक राज्यो के जल्दीबाजी में प्रतिबंध हटाने को बताया जिससे कि नए मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है. यह पूछे जाने पर कि ये वेरिएंट क्या डेल्टा प्लस हो सकता है, उन्होंने कहा कि दोनों ही वेरिएंट डेल्टा और डेल्टा प्लस देश में फैले हुए हैं और उन्हें डेल्टा वेरिएंट से किसी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के कहर की उम्मीद नहीं है.

इससे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने वैश्विक साक्ष्य और महामारियों के इतिहास को देखते हुए सोमवार को कहा था कि तीसरी लहर अटल है और यह नजदीक है.

आईएमए और केंद्र जता चुका है चिंता

आईएमए ने सरकार और लोगों के ढिलाई बरतने तथा कोविड-19 प्रोटोकॉल का अनुपालन किये बगैर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने को लेकर सोमवार को चिंता प्रकट की. साथ ही, कहा कि ये घटनाएं महामारी की तीसरी लहर का मुख्य कारण बन सकती हैं. आईएमए ने एक बयान में कहा कि पर्यटकों का आगमन, तीर्थयात्राएं, धार्मिक उत्साह जरूरी हैं लेकिन कुछ और महीने इंतजार किया जा सकता है.

वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि पर्वतीय पर्यटन स्थलों सहित देश के अनेक हिस्सों में कोविड रोधी नियमों का ‘‘खुला उल्लंघन’’ देखा गया है और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराने से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक परिवहन में कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया जा रहा और बाजारों में जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है तथा भौतिक दूरी बनाकर रखने के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.

भल्ला ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर अभी समाप्त नहीं हुई है और हर किसी को आत्मसंतुष्ट न होने की बात ध्यान में रखनी चाहिए तथा कोविड उचित व्यवहार का पालन करना चाहिए.

डब्ल्यूएचओ ने भी गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण नए और ज्यादा खतरनाक वेरिएंट के दुनिया भर में फैलने की आशंका है, जिसे रोक पाना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

कोरोना वायारस से क्यों कुछ लोग बेहद बीमार हो जाते हैं, जबकि कुछ में कोई लक्षण नहीं दिखते?

लंदन – कोरोना वायरस महामारी के दौरान एक अहम सवाल ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है कि क्यों कुछ लोग कोविड -19 से इतने बीमार हो जाते हैं, जबकि अन्य में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं? अब, 25 देशों के 3000 से अधिक शोधकर्ताओं के साथ वैश्विक पहल द्वारा मानव जीनोम की गहराई में झांकने से कुछ जवाब मिल रहे हैं. शोधकर्ताओं ने नेचर जर्नल में गुरुवार को बताया कि जीनोम में 13 स्थान ऐसे हैं जो वायरस या गंभीर मामलों की संवेदनशीलता से मजबूती के साथ जुड़े हुए हैं.

यह शोध मार्च 2020 में शुरू हुआ जब वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश में जी-जान से जुटे थे कि आखिर कोरोना वायरस काम कैसे करता है. यह अब तक के सबसे बड़े जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी के रूप में सामने आया, जिसमें शोधकर्ताओं ने लगभग 50,000 संक्रमित लोगों और 20 लाख असंक्रमित लोगों की आनुवंशिक सामग्री के माध्यम से छानबीन की. इस शोध का लक्ष्य यह पहचानना था कि मानव डीएनए के कौन से अंश वायरस से बहुत बीमार होने वाले लोगों से संबंधित हैं/

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अध्ययन के सह-लेखक मार्क डैली जो हेलसिंकी विश्वविद्यालय में फिनलैंड आण्विक चिकित्सा संस्थान के निदेशक और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक आनुवंशिकीविद् हैं, ने कहा, ‘शोध का नतीजा “कुछ स्पष्ट जैविक चिह्नकों (Biological Markers) को बताने में मदद कर सकते हैं जिनका इस्तेमाल मौजूदा दवाओं या फिर निर्माण के दौर से गुजर रही दवाओं के पुन: उपयोग के लिए किया जा सकता है.’ द नेचर रिपोर्ट में सार्स-सीओवी-2 संक्रमण और कोविड-19 की गंभीरता में मानव आनुवंशिकी की भूमिका की जांच करने वाले 46 अध्ययनों और तीन मेटा-एनालिसिस (कई सारे वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजों का विश्लेषण) की जानकारी का सारांश दिया गया है.

इस तरह के अध्ययन में वैसे ही बारीकी से काम करने की जरूरत होती है जैसा कि खदान से सोने को निकालने के लिए किया जाता है. हम जानते हैं कि कि कुछ लोग वायरल संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि हमारा अनुवांशिक रूप में इसमें अपनी भूमिका निभाता है. पर्याप्त संख्या में लोगों के डीएनए के माध्यम से बदलाव के जरिए, शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे एक अद्भुत खोज करेंगे जो यह बताएगी कि आखिर क्यों कुछ लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई नहीं देते, जबकि कुछ लोगों में यह बेहद गंभीर हो जाता है.

कोरोना से संक्रमित रोगियों का अधिक कुशलता से इलाज करने से अस्पताल पर भी दबाव कम हो सकता है, रोगियों को जल्द घर भेजना, खासकर उन देशों में जो अभी भी इस महामारी से जूझ रहे हैं. इस तरह के आनुवंशिक अध्ययनों के परिणाम दवा निर्माताओं को बाजार में पहले से मौजूद संभावित उपचारों की पहचान करने के अलावा नए उपचार विकसित करने के लिए एक शुरुआती बिंदु प्रदान कर सकते हैं. शोध में पहचाने गए 13 महत्वपूर्ण अनुवांशिक स्थानों में से कई पहले फेफड़ों के कैंसर और स्व-प्रतिरक्षित बीमारियों (Autoimmune Diseases) सहित अन्य बीमारियों से जुड़े थे.

TYK2 जीन

एक जीन जो कोविड-19 के साथ रोग की गंभीरता से दृढ़ता से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, उसे TYK2 के रूप में जाना जाता है. स्वस्थ लोगों में, यह जीन प्रतिरक्षा संकेतन (Immune Signaling) और भड़काऊ संकेतन (Inflammatory Signaling) के लिए शरीर के मार्गों को नियंत्रित करने में मदद करता है. इससे पहले, शोधकर्ताओं द्वारा कोविड -19 से जुड़े TYK2 जीन के एक वेरिएंट को स्व-प्रतिरक्षित बीमारियों (Autoimmune Diseases) के लिए कम जोखिम, लेकिन तपेदिक (टीबी) के बढ़ते जोखिम से जुड़ा पाया गया था. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि चूंकि वेरिएंट ने पहले यह दिखाया है कि उसने जीन की कार्यप्रणाली को कम किया है, वहीं तंत्र कोविड से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए शरीर की क्षमता में रुकावट पैदा कर सकता है.

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इससे पहले, शोधकर्ताओं द्वारा कोविड -19 से जुड़े TYK2 जीन के एक प्रकार को ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए कम जोखिम लेकिन तपेदिक के बढ़ते जोखिम से जुड़ा पाया गया था. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि चूंकि वैरिएंट को पहले जीन के कार्य को कम करने के लिए दिखाया गया है, वही तंत्र कोविड से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए शरीर की क्षमता में हस्तक्षेप कर सकता है. अध्ययन में एक अन्य जीन की पहचान की गई, FOXP4 जो कि फेफड़ों के कैंसर से जुड़ा हुआ है. FOXP4 वेरिएंट उस जीन की स्पष्टता को बढ़ाता है, और सुझाव देता है कि जीन को रोकना कोविड के इलाज के लिए एक रणनीति हो सकती है. शोधकर्ताओं ने जिन आनुवंशिक स्थानों की पहचान की, उनमें एक लिंक नहीं था जो स्पष्ट रूप से कोविड के साथ इसके जुड़ाव को दिखाता था. इसीलिए वायरस और मानव डीएनए के बीच की सभी जटिलताओं को सुलझाने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी.

विविधता का भी है महत्व

यह रेखांकित करते हुए कि आनुवंशिक अनुसंधान में विविधता कितनी महत्वपूर्ण है, शोधकर्ताओं द्वारा अब तक पहचाने गए आनुवंशिक स्थानों में से दो में यूरोपीय वंश की तुलना में एशियाई वंश के रोगियों में उच्च आवृत्ति थी. आनुवंशिक विज्ञान ने लंबे समय से व्यक्तिगत परीक्षण का वादा किया है जो यह समझा सकता है कि कौन बीमार हो जाता है और उनका इलाज कैसे किया जाता है. महामारी ने केवल उस भरोसे में अपनी दिलचस्पी बढ़ाई है. पिछले साल, कंज्यूमर जीनोमिक्स फर्म 23andMe ने शोध को मजबूत करने वाले साक्ष्य प्रकाशित किए कि रक्त का प्रकार जीन को देखकर कोविड -19 के लिए किसी व्यक्ति की संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है और यह जीन रक्त के प्रकार को प्रभावित करता है.

धीरे-धीरे फ्लू जैसा हो जाएगा कोरोना! ICMR के विशेषज्ञ बोले- हर साल लेना पड़ सकता है टीका

नई दिल्ली – कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) जारी है, लेकिन एक्सपर्ट्स ने संभावना जताई है कि कुछ समय बाद कोविड-19 (Covid-19) बीमारी भी इंफ्लुएंजा (घnfluenza) की तरह ही हो जाएगी. साथ ही कहा जा रहा है कि ज्यादा जोखिम वाली आबादी को इससे बचाव के लिए हर साल कोरोना वैक्सीन लेने की जरूरत पड़ सकती है. फिलहाल, देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर (Third Wave) को लेकर तैयारियां की जा रही है. जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर लोगों ने कोविड संबंधी व्यवहार का पालन नहीं किया, तो तीसरी लहर की दस्तक 6-8 हफ्तों में ही हो सकती है.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में डिवीजन ऑफ ऐपिडेमियोलॉजी और कम्युनिकेबल डिसीज के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा कि कुछ समय के बाद कोविड-19 एंडेमिक स्टेज पर पहुंच सकता है. सेंटर्स फॉर डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, किसी भौगोलिक क्षेत्र के भीतर आबादी में किसी बीमारी या संक्रामक एजेंट की मौजूदगी या प्रसार को एंडेमिक कहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘जब छोटे वायरस तेजी से बढ़ते हैं, तो उनके लिए म्यूटेशन करना आम बात है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कोविड-19 वायरस कुछ समय के बाद इंफ्लुएंजा की तरह एंडेमिक स्टेज में पहुंच जाएगा और इसके बाद जोखिम वाली आबादी को हर साल वैक्सीन लेनी होगी.’ उन्होंने समझाया कि इंफ्लुएंजा भी 100 साल पहले पेंडेमिक यानि महामारी थे, लेकिन आज ये एंडेमिक हैं.

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उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के मामले में भी हमें उम्मीद है कि यह धीरे-धीरे अपनी मौजूदा महामारी वाली स्थिति से बदलकर एंडेमिक बन जाएगा. फिलहाल, हम बुजुर्गों को फ्लू के सालाना टीके लगवाने की सलाह देते हैं.’ उन्होंने बताया, ‘जैसे इंफ्लुएंजा वायरस म्यूटेट करता रहता है, वैसे हम वैक्सीन में मामूली बदलाव करते रहते हैं. इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है. उपलब्ध वैक्सीन कोविड-19 के नए वेरिएंट्स के खिलाफ काफी प्रभावी हैं.’

पांडा ने समझाया कि वैक्सीन संक्रमण से नहीं बचाती, लेकिन बीमारी को गंभीर नहीं होने देती. उन्होंने कहा कि ICMR में हुए प्रयोगों में यह साबित हुआ है कि फिलहाल भारत में मौजूद टीके नए वेरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी हैं. हालांकि, अलग-अलग स्ट्रेन्स पर इनकी प्रभावकारिता में अंतर आ सकता है.

इस दौरान उन्होंने स्तनपान कराने वाली मांओं को वैक्सीन लेने की सलाह दी है. पांडा ने कहा कि टीके के बाद मां में विकसित हुईं एंटीबॉडीज स्तनपान के दौरान बच्चे तक पहुंचती हैं. साथ ही ये बच्चे के लिए काफी मददगार हो सकती हैं.

अक्ट्रबर-नवंबर के बीच चरम पर होगी कोरोना की तीसरी लहर’, वैज्ञानिक बोले- बचने के लिए अभी से करें ये काम :

नई दिल्‍ली –  देश में कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave) का असर अभी खत्‍म भी नहीं हुआ है कि तीसरी लहर (Third Wave) को लेकर अभी से अलर्ट जारी किया जाने लगा है. कोरोना (Corona) पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर समय रहते कोविड-19 (Covid-19) नियमों का पालन नहीं किया गया तो अक्‍टूबर-नवंबर में कोरोना की तीसरी लहर बेहद घातक साबित हो सकती है. कोविड-19 मामलों की ‘मॉडलिंग को लेकर काम करने वाली एक सरकारी समिति के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर कोरोना का कोई नया वेरिएंट आता है तो तीसरी लहर बेहद खतरनाक हो सकती है.

कोविड-19 के खतरे का गणितीय मॉडल के जरिए अनुमान लगाने वाले विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सदस्‍य मनिंद्र अग्रवाल ने कहा, पिछली बार की तरह हमारे अनुमान गलत साबित न हो इसके लिए तीसरी लहर के अनुमान के लिए मॉडल में तीन संभावनाओं पर बात की गई है – आशावादी, मध्यवर्ती और निराशावादी. मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि तीसरी लहर का सही अनुमान लगाने के लिए प्रतिरक्षा की हानि, टीकाकरण के प्रभाव और एक अधिक खतरनाक स्वरूप की संभावना को कारक बनाया गया है. उन्‍होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान ऐसा नहीं किया जा सका था.

तीसरी लहर से कैसे बचेंगे : सरकार ने कोरोना की तीसरी लहर का असर कम करने का उपाय बताया, गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा

अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर हमने तीन संभावनाएं रखी हैं. एक ‘अशावादी’ है. इसमें हम ये मानकर चल रहे हैं क‍ि अगस्‍त तक जीवन सामान्‍य हो जाएगा और कोई नया म्‍यूटेंट नहीं होगा. दूसरा ‘मध्‍यवर्ती’ है. इसमें हम मानते हैं कि अगस्‍त तक जीवन सामान्‍य होने के साथ ही वैक्‍सीनेशन में 20 प्रतिशत तक कम प्रभावी है. तीसरा ‘निराशावादी’ है. इसमें ये मानकर चला जा रहा है कि कोरोना का कोई नया वेरिएंट तेजी से फैल सकता है. इस पूरे अनुमान के लिए जिन आंकड़ों को पेश किया गया है उसके मुताबिक अगर कोरोना के वेरिएंट में बदलाव आया तो अक्‍टूबर और नवंबर के बीच कोरोना अपने चरम पर होगा और देश में 1,50,000 से 2,00,000 के बीच मामले बढ़ सकते हैं.

अग्रवाल ने कहा यदि कोई नया वेरिएंट आया तो तीसरी लहर तेजी से फैलेगी लेकिन दूसरी लहर की तुलना में उसकी रफ्तार आधी होगी. उन्होंने एक बार फिर जोर देते हुए कहा है कि जैसे-जैसे टीकाकरण अभियान आगे बढ़ेगा, तीसरी या चौथी लहर की आशंका कम होती जाएगी.

वैक्सीन लगवाने में की देरी तो तेजी से बनेंगे कोरोना के खतरनाक नए वेरिएंट, एक्सपर्ट्स ने दी चेतवानी :

नई दिल्ली – भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप अब कम हो गया है. हालांकि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि कोरोना के प्रकोप से बचना है तो वैक्सीनेशन जल्द से जल्द करवाएं. जो लोग वैक्सीनेशन से बचने के बहाने खोज रहे हैं उन्हें संक्रामक रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है. उनका कहना है कि जो लोग वैक्सीन नहीं लेंगे उन्हें अन्य के मुकाबले कोरोना के अन्य वैरिएंट से खतरा ज्यादा है. सीएनएन के अनुसार, एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ ने कहा है कि असंक्रमित व्यक्ति न केवल अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालेंगे, बल्कि कोरोना वायरस के संभावित वैरिएंट के ‘कारखाने’ की तरह हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में वैक्सीन की उपलब्धता की कमी के साथ-साथ दुनिया भर में वैक्सीन की हिचकिचाहट, वायरस के नए वैरिएंट और घातक म्यूटेशन को दबाने में एक बाधा की तरह का काम कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोगों के विभाग के प्रोफेसर डॉ विलियम शेफ़नर ने कहा कि असंक्रमित लोगों की संख्या जितनी अधिक होगी, वायरस के गुणा करने के उतने ही ज्यादा चांस होंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी दी चेतावनी

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के चीफ टेड्रोस अदहानोम गेब्रेयेसस ने भी कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने आगाह करते हुए बताया है कि कि दुनिया कोविड-19 महामारी के बेहद ‘खतरनाक दौर’ में है. कोरोना के डेल्टा जैसे वेरिएंट ज्यादा संक्रामक हैं और वक्तके साथ लगातार बदल रहे हैं. टेड्रोस ने कहा कि करीब-करीब दुनिया के 100 देशों में फैल चुका डेल्टा वेरिएंट आने वालों दिनों में सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट बन जाएगाऔर इस तरह ये दुनिया में कोरोना का सबसे ज्यादा संक्रामक वेरिएंट होगा.
‘डेल्टा जैसे स्वरूप अधिक संक्रामक है और ये कई देशों में फैल रहा है. इसी के साथ हम इस महामारी के बहुत खतरनाक दौर में हैं. कोई भी देश अभी तक खतरे से बाहर नहीं है. डेल्टा स्वरूप खतरनाक है और ये वक्त के साथ और बदल रहा है, जिस पर लगातार नजर रखने की जरूरत है. जिन देशों की कम आबादी को टीके लगे हैं, वहां के अस्पतालों मेंफिर से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.

जानिए कौन सी कोरोना वैक्सीन बच्चों के लिए है सुरक्षित?

नई दिल्ली – मॉडर्ना की एमआरएनए कोविड वैक्सीन और एक प्रोटीन-आधारित शॉट छोटे बच्चों के उपयोग के लिए सुरक्षित है और बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदान करती है. बेबी रीसस मैकाक्स पर एक शोध में यह दावा किया गया है.

22 सप्ताह तक बनी रहीं एंटीबॉडी प्रतिक्रियाएं

चैपल हिल, वेइल कॉर्नेल मेडिसिन एंड न्यूयॉर्क-प्रेस्बिटेरियन में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया है कि दोनों टीकों ने बेबी रीसस मैकाक्स के साथ सार्स-सीओवी-2 के लिए मजबूत न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं, जो वायरस कोविड-19 का कारण बनता है. इसमें पाया गया कि एंटीबॉडी प्रतिक्रियाएं 22 सप्ताह तक बनी रहीं.

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साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि छोटे बच्चों के लिए टीके महामारी को कम करने के लिए महत्वपूर्ण एवं सुरक्षित उपकरण हैं.

यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी प्रोफेसर क्रिस्टीना डी पेरिस ने कहा, हमने देखा है कि शक्तिशाली एंटीबॉडी का स्तर वयस्क मैकाक्स में देखा गया है, भले ही खुराक 100 माइक्रोग्राम वयस्क खुराक के बजाय 30 माइक्रोग्राम रही.

रोग की गंभीरता को करेगा सीमित

उन्होंने कहा, मॉडर्ना वैक्सीन के साथ, हमने विशिष्ट मजबूत टी सेल प्रतिक्रियाओं को भी देखा है, जो हम जानते हैं कि रोग की गंभीरता को सीमित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं.

सार्स-सीओवी-2 शिशु टीकाकरण का मूल्यांकन करने के लिए, शोधकतार्ओं ने 2.2 महीने की उम्र में और इसके 4 सप्ताह बाद 8 बेबी रीसस मैकाक्स के दो समूहों का टीकाकरण किया.

प्रत्येक जानवर को दो वैक्सीन प्रकारों में से एक प्राप्त हुई, जिसमें मॉडर्ना एमआरएनए वैक्सीन का प्रीक्लिनिकल वर्जन या एक प्रोटीन आधारित वैक्सीन शामिल रही, जो कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक हिस्से, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (एनआईएआईडी) के वैक्सीन रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित प्रोटीन-आधारित वैक्सीन है.

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दोनों टीकों ने सार्स-सीओवी-2 और स्पाइक प्रोटीन-विशिष्ट टी सेल प्रतिक्रियाओं -आईएल-17, आईएफएन-जी और टीएनएफ के खिलाफ एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने वाले आईजीजी के उच्च परिमाण को प्राप्त किया. इन्हें टी हेल्पर 1 प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कहा जाता है.

महत्वपूर्ण रूप से, वैक्सीन ने टी हेल्पर टाइप 2 प्रतिक्रियाएं नहीं दीं, जो शिशुओं में टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकती हैं.