After 10th-12th Do Architecture Course, You Will Get Job In Both Government And Private Sector

Career in Architecture: 12वीं पास करने के बाद हर स्टूडेंट अपने करियर को लेकर काफी सीरियस हो जाता है और ऐसी फील्ड चुनना चाहता है जो उसके करियर को संवार सके. मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा भी कई ऐसे करियर ऑप्शन हैं जिन्हें अपनाकर स्टूडेंट अपना आने वाला भविष्य बेहतरीन बना सकते हैं. इन ऑप्शन में से आर्किटेक्चर भी ऐसा ही ऑप्शन है. इस फील्ड में काफी स्कोप है और आर्किटेक्चर की डिग्री लेने के बाद सरकारी सेक्टर के अलावा प्राइवेट सेक्टर में भी अच्छी सैलरी पर जॉब पा सकते हैं.

क्या होता है आर्किटेक्चर का काम

आर्किटेक्चर का काम इमारत को डिजाइन करना, प्लानिंग और उसका निर्माण करना होता है. दरअसल आर्किटेक्चर पहले किसी भी संरचना की प्लानिंग करते हैं और फिर उसका डिजाइन तैयार करते हैं और फिर अपने डिजाइन को एग्जीक्यूट करवाते हैं. देश में दिखने वाली बड़ी-बड़ी इमारतें और बांध यही आर्किटेक्चर बनाते हैं. आर्किटेक्चर इमारतों और दूसरी फिजिकल स्ट्रक्चर की प्लानिंग करने, डिजाइन करने और निर्माण करने की आर्ट है. आर्किटेक्चर एक स्टडी स्ट्रीम है जो आर्टिस्टिक/स्केचिंग स्किल और इंजीनियरिंग को कंबाइन करती है. अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के अवसर के साथ एक सम्मानजनक पेशे के रूप में, आर्किटेक्चर क्रिएटिव माइंड के लिए एक अट्रैक्टिव करियर ऑप्शन है.

10वीं और 12वीं के बाद आर्किटेक्चर में कोर्स

आर्किटेक्चर का कोर्स करने के लिए 12वीं कक्षा गणित और इंग्लिश के साथ और 50 फीसदी मार्क्स के साथ पास होना अनिवार्य है. अगर किसी ने 10वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स किया है तो वह भी आर्किटेक्चर का कोर्स कर सकता है.इसके लिए 12वीं पास आउट होना अनिवार्य नही है.10वीं के बाद आर्किटेक्चर में तीन साल का डिप्लोमा किया जा सकता है. वहीं 12वीं पास करने के बाद छात्र आर्किटेक्चर में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, मास्टर ऑफ आर्किटेचर और पीएचडी कर सकते हैं. आर्किटेक्चर की डिग्री के साथ ही कुछ सॉफ्टवेयर सीख लें तो सोने पर सुहागा हो जाता है. इसी के बाद किसी इमारत का डिजाइन तैयार किया जा सकता है.

यहां से कर सकते हैं आर्किटेक्ट का कोर्स

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली

आईआईटी, खड़गपुर

IIT रुड़की

सर जेजे कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर

NIT तिरुचिरापल्ली

करियर स्कोप

आर्किटेक्ट के तौर पर प्राइवेट, पब्लिक और सरकारी सेक्टर में नौकरी की अपार संभावनाएं हैं. पब्लिक सेक्टर में लोक निर्माण, सिंचाई, हेल्थ जैसे डिपार्टमेंट में आर्किटेक्ट की जॉब के लिए अप्लाई किया जा सकता है. वहीं सरकारी क्षेत्र में आर्किओलॉजिकल विभाग, रक्षा मंत्रालय, रेलवे, लोकल एजेंसी, स्टेट डिपार्टमेंट, हाउसिंग में भी नौकरी की तलाश कर सकते हैं. अनुभव मिल जाने के बाद कंसल्टेंट और कंस्ट्रक्टर के तौर पर बिजनेस भी शुरू किया जा सकता है. दिनों दिन कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में बढ़ते काम की वजह से आर्किटेक्चर की डिमांड भी काफी ज्यादा है.

वेतन

प्राइवेट सेक्टर में आर्किटेक्ट के तौर पर 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह सैलरी पा सकते हैं. कुछ सालों के एक्सपीरियंस के बाद 50 हजार रुपये मासिक सैलरी तक मिलने लगती है. वहीं सरकारी सेक्टर में पे-स्केल के मुताबिक लाखों में सैलरी मिल सकते हैं.

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Maruti Suzuki की 4 नई कारें मार्केट में करेंगे धांसू एंट्री, देगी शानदार माइलेज

मारुति सुजुकी जल्द लॉन्च करेगी 4 नई कारें

मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) जल्द ही भारत में अपनी पॉपुलर हैचबैक और सिडैन कारों का CNG वेरिएंट लॉन्च करने वाली है. इन नए वेरिएंट्स की लिस्ट में स्विफ्ट सीएनजी (Swift CNG), डिजायर CNG (Dzire CNG) और विटारा ब्रेजा (Brezza CNG) शामिल हैं. इसके साथ ही कंपनी ने सेलेरियो का न्यू जेनरेशन वेरिएंट लॉन्च करने की तैयारियां भी की हैं. ये सभी कारें बेहतरीन लुक और शानदार फीचर्स से लैस होंगी.

मारुति सुजुकी स्विफ्ट सीएनजी

सबसे ज्यादा बिकने वाली 5 सीटर कारों में लिस्ट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट का नाम काफी ऊपर है. लोग इस कार के लुक पर परफॉर्मेंस के दीवाने हैं. इसी के चलते कंपनी ने अब इसका CNG वेरिएंट भी लॉन्च करने का फैसला किया है. इस कार की संभावित खूबियों की बात करें तो CNG किट के साथ ही इसमें 1.2 लीटर का ड्यूलजेट K12C पेट्रोल इंजन लगा होगा, जो कि 70bhp तक की पावर और 95Nm तक का टॉर्क जेनरेट कर सकेगी.

मारुति सुजुकी डिजायर सीएनजी

मारुति सुजुकी की आरामदायक और स्पेशियस 5 सीटर डिजायर (Dzire) कार जल्द ही अपने CNG वेरिएंट के साथ मार्केट में कदम रखने वाली है. इस कार की संभावित खूबियों की बात करें तो इनमें भी CNG किट के साथ ही 1.2 लीटर का Dualjet K12C पेट्रोल इंजन लगा होगा, जो कि 70bhp तक की पावर और 95Nm तक का टॉर्क जेनरेट कर सकेगा.

मारुति सुजुकी विटारा ब्रेजा सीएनजी

भारत में CNG कारों की बढ़ती मांग को देखते हुए मारुति ने विटारा ब्रेजा (Vitara Brezza) का CNG वेरिएंट भी लॉन्च करने का फैसला किया है. इस कार में 1.5 लीटर K15 नेचुरली एस्पिरेटेड इंजन देखने को मिलेगा, जो 91 bhp तक की पावर और 122 Nm तक का टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम होगा. ब्रेजा सीएनजी को 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 4 स्पीड टॉर्क कन्वर्टर के साथ पेश किया जाएगा.

मारुति सुजुकी जेन सेलेरियो

मारुति सुजुकी जेन सेलेरियो में स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, मल्टी स्टीयरिंग व्हील समेत अन्य फीचर्स देखने को मिलेंगे. इसमें WagonR जैसा 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन देखने को मिलेगा, जो कि 83bhp तक की पावर जेनरेट कर सकेगा. यह इंजन सेलेरियो से मौजूदा मॉडल में लगे इंजन से काफी बेहतर है. अपकमिंग सेलेरियो में 5 स्पीड मैनुअल और AMT गियरबॉक्स जैसे ऑप्शन दिखेंगे.

शेयर बाजार से कमाई करने का एक और मौका, आज खुलने वाले हैं ये 2 आईपीओ

नई दिल्ली – आईपीओ आज खुला: तेजी से बढ़ते आईपीओ बाजार के साथ, इस सप्ताह कुल चार कंपनियों ने आईपीओ का आयोजन किया, जिससे 14,628 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए गए। दो आईपीओ सोमवार से शुरू हो गए हैं और बाकी दो मंगलवार से शुरू होंगे। ये आईपीओ एपटस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस और केमप्लास्ट सनमार से आए हैं। एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग प्राइस रेंज 346-353 रुपये है, जबकि केमप्लास्ट सनमार की प्राइस रेंज 530-541 रुपये है। दोनों आईपीओ आज (10 अगस्त) को खुले और 12 अगस्त को समाप्त होंगे। दोनों आईपीओ सोमवार को खुले। नुवोको विस्टास सीमेंट कंपनी और कार्ट्रेड कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम सोमवार को आयोजित किए गए। नुवोको विस्टा की कीमत सीमा 560-570 रुपये प्रति शेयर है, जबकि कार्ट्रेड की कीमत सीमा 1,585-1,618 रुपये है। दोनों आईपीओ 9 अगस्त को शुरू हुए और 11 अगस्त को खत्म होंगे। आईपीओ के पहले दिन नुवोको विस्टास आईपीओ को 16% अंडरराइटिंग प्राप्त हुई, जबकि कार्ट्रेड आईपीओ को 41% अंडरराइटिंग प्राप्त हुई। पिछले पूरे वित्त वर्ष में 30 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 31,277 करोड़ रुपये जुटाए। बाजार विश्लेषकों को उम्मीद है कि 2021-22 में आईपीओ बाजार में तेजी बनी रहेगी। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट में इक्विटी के प्रमुख हेमंग कापासी ने कहा कि इस साल के बाकी हिस्सों में 70,000 करोड़ जुटाने के लिए 40 आईपीओ होंगे।

IPO क्या है | What is IPO

Mutual Fund क्या हैं | What is Mutual Fund

म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) एक निवेश करने का साधन है जिसमें एक म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अलग-अलग निवेशकों से पैसा जुटाती हैं, जमा किये पैसे को निवेश करती है व निरंतर रूप से उस फण्ड को आपके लिए मैनेज करती है। निवेशकों द्वारा दिए पैसे को अलग-अलग जगहों पर निवेश करने के लिए प्रयोग किया जाता है। निवेश कहाँ किया जायेगा यह म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार पर निर्भर करता है। इसके बारे में और आप आगे जानेंगे। जिस भी म्यूच्यूअल फंड्स में आप अपने पैसे को निवेश करते हैं। म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी के द्वारा यह कोशिश की जाती है कि निवेशकों को उनकी रकम से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा दिया जा सके।

फंड्स को मैनेज करने का कार्य एक पेशेवर व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे फण्ड मैनेजर कहते हैं। म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) हमारे देश में काफी लंबे समय से मौजूद हैं। परंतु आज भी इसके बारे में ज्यादातर लोगों को संपूर्ण जानकारी नहीं है। शुरुआत में लोगों को लगता था कि म्यूच्यूअल फंड्स केवल अमीर वर्ग के निवेशकों के लिए है। परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, आज के समय में कोई भी व्यक्ति मात्र ₹100 की न्यूनतम धनराशि के साथ भी म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) में निवेश कर सकता है। म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) आपकी संपत्ति को बढ़ने का एक बेहतरीन साधन है। क्योंकि यह एक फण्ड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है आपको शेयर बाजार के बारे में ज्यादा जानकारी की भी जरूरत नहीं होती।

म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार | Types of Mutual Fund

निवेश व रिस्क (Risk) के आधार पर मुख्य तौर पर म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) तीन प्रकार के होते हैं। यह कुछ इस प्रकार से हैं-

इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स

इक्विटी फंड मुख्य रूप से विभिन्न कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। शेयर के भाव के ऊपर या नीचे होने से आपको फायदा या नुक्सान होता है। यदि आप लम्बे समय तक निवेश करना चाहते हैं तो इक्विटी फण्ड काफ़ी अच्छा विकल्प होते हैं। इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में रिस्क अधिक (high-risk) होता है व साथ ही आपको लम्बे समय में मुनाफ़ा भी अधिक मिलता है।

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड

यह कम रिस्क वाले म्यूच्यूअल फण्ड होते हैं जिनके तहत मुख्य तौर पर सरकारी सिक्योरिटीज जिसमें बांड्स व ट्रेज़री बिल्स आदि आते हैं। डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (debt mutual fund) में निवेश इक्विटी फण्ड (equity fund) के मुकाबले काफ़ी कम रिस्की (low risk) होता है व यह उन निवेशकों के लिए अच्छा है जो छोटे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं।

बैलेंस और हाइब्रिड फण्ड

इस प्रकार के म्यूच्यूअल फंड्स में डेब्ट और इक्विटी दोनों का मिश्रण होता है। यह मध्यम रिस्क म्यूच्यूअल फण्ड होते हैं। हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड में डेट और इक्विटी का अनुपात (Debt & Equity Ratio) फण्ड मैनेजर द्वारा निर्धारित किया जाता है व फण्ड से अपेक्षित रीटर्न पर निर्भर करता है।

Mutual Fund में निवेश

म्युचुअल फंड्स में निवेश करना बहुत ही आसान है। म्युचुअल फंड्स में आप समय, रिस्क व क्षमता के आधार पर निवेश कर सकते है।

  • SIP या Systemetic Investment Plan
  • LumpSum Investment
  • Systemetic Investment Plan

बैंक- अगर आपके पास बैंक अकाउंट है तो आप बैंक में जाकर mutual funds में SIP करा सकते है । mutual funds में इन्वेस्ट करने के लिए आपको एक बार KYC कराना पढ़ता है, इसलिए आप अपने साथ पैन कार्ड, आधार कार्ड, एक फोटो, एड्रेस इनफार्मेशन आदि रखें ।

डीमैट अकाउंट- अगर आप mutual funds में इन्वेस्ट करना चाहते है तो आपको डीमैट अकाउंट खुलवाने की जरूरत नही है, लेकिन कई स्टॉक ब्रोकर आपको डीमैट अकाउंट के जरिये भी mutual funds में निवेश करने की सुविधा देते है ।

ऑनलाइन- आजकल आपको कई ऑनलाइन वेबसाइट व मोबाइल एप्लीकेशन भी मिल जाएगी जिसके द्वारा आप mutual funds में investment कर सकते हो। जैसे- Paytm, Groww, Kuvera आदि।

SIP Investment करने के लिए आपको बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता नही होती है आप 100 रूपये की बचत से अपना SIP investment शुरु कर सकते है लेकिन कई म्यूच्यूअल फंड्स में आपको 500 से शुरु करना होता है।

Lump Sum Investment

जैसा की आपने जाना कि SIP Investment करने के लिए आपको बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता नही होती है लेकिन जब आप लम्प सम निवेश (lumpsum investment) में आपके पास बड़ी पूंजी का होना आवश्यक है।

जैसेः एक लाख , दो लाख , तीन लाख या इससे ज्यादा आदि।

आसान शब्दों में- जब आपके पास एकमुश्त एक लाख , दो लाख , तीन लाख या इससे ज्यादा की राशि हो तो आप लम्प सम निवेश कर सकते  है।

ये हमारे FD (फिक्स्ड डिपॉजिट्स) की तरह होता है जिसमे एक साथ व एकमुश्त पैसा जमा कराना होता है।

म्यूचुअल फंड्स कैसे खरीदें

ऑफलाइन

म्यूचुअल फंड में ऑफलाइन निवेश करने के लिए आप किसी Financial Intermediary यानी वित्तीय मध्यस्थ की सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इन्हें म्यूचुअल फंड वितरक कहा जाता है। आप सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यालय या रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के कार्यालय में जाकर भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। कोई बैंक, गैर बैंकिंग वित्त कंपनी या व्यक्तिगत वित्तीय सलाहकार म्यूचुअल फंड वितरक हो सकते है।

ऑनलाइन

म्यूचुअल फंड में ऑनलाइन निवेश करने के लिए आप म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनी की साईट पर जा कर ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। यहाँ जा कर आपको अपना खाता बनाना होगा और एक यूजर आईडी और पासवर्ड बनाना होगा। आपको अपनी पसंद का फण्ड चुनना होगा और कितना निवेश करना है यह बताना होगा। आप अपनी जानकारी के लिए म्यूच्यूअल फंडों के प्रकार पढ़ सकते हैं। आप एसेट मैनेजमेंट कंपनी में फ़ोन करके भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के नाम और वेब पते हमने अपनी पिछली पोस्ट में दिए थे।

यदि आपका किसी ब्रोकर के पास Demat डीमैट खाता है तो आप ब्रोकर से भी म्यूचुअल फंड खरीद सकते हैं। इस प्रकार ख़रीदे गए म्यूचुअल फंड सीधे आपके Demat डीमैट खाते में आ जायेंगे।

SIP द्वारा खरीदें

म्यूचुअल फंड चाहे आप ऑफलाइन खरीदें या ऑनलाइन, आप आपने फॉर्म में SIP खरीद का आदेश भी दे सकते हैं। इसके लिए आप अपने बैंक की डिटेल दे कर ऑटोमैटिक खरीद के लिए भी कह सकते हैं। यहां आप SIP क्या है इसके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं। SIP में निवेश के कई फायदे हैं क्योंकि SIP में छोटा और नियमित निवेश बहुत आसानी से किया जा सकता है।

Mutual Fund के फायदे

म्यूच्यूअल फण्ड का सबसे बड़ा फायदा तो यह होता है की आपको यह लम्बे समय में FD से कहीं ज्यादा लाभ देते हैं। FD में अधिकतर आपको 7 प्रतिशत के करीब ब्याज मिलता है। वहीं म्यूच्यूअल फण्ड उसका दोगुना से भी अधिक रिटर्न दे सकते हैं। म्यूच्यूअल फण्ड के अन्य फायदे कुछ इस प्रकार से हैं-

कम पूँजी के साथ निवेश की शुरुआत करने का बेहतरीन साधन क्योंकि म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश आप मात्र 100 रूपए के साथ भी कर सकते हैं यह कम पूँजी के साथ निवेश करने का एक बेहतरीन साधन बन जाता है।

पेशेवर रूप से प्रबंधित

म्यूच्यूअल फण्ड को एक पेशेवर मैनेजर के द्वारा मैनेज किया जाता है। यह मैनेजर बाजार के हिसाब से फण्ड को संभालता है। इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह होता है की आपको शेयर बाजार का ज्ञान होने की जरूरत नहीं होती है।

पारंपरिक निवेश की तुलना में अधिक रिटर्न

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश से आपको लम्बे समय में FD या बचत खाते की तुलना में कहीं अधिक लाभ मिलता है। यदि आप 5 से 10 साल के लिए पैसा निवेश करना चाहते हैं तो आपको म्यूच्यूअल फण्ड पर जरूर विचार करना चाहिए।

अच्छी तरह से SEBI द्वारा विनियमित

सभी म्यूच्यूअल फण्ड कम्पनियाँ SEBI द्वारा नियमित होती हैं। आपका म्यूच्यूअल फण्ड में लगाया पैसा सुरक्षित होता है व SEBI द्वारा फण्ड मैनेज करने वाली कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाती है।

टैक्स बचत

ELSS (Equity Linked Savings Scheme) फंड्स में निवेश करके आप टैक्स बचत कर सकते हैं. इसमें आपको कम से कम 3 वर्ष के लिए निवेश करना होता है व इससे आपको आपकी वार्षिक टैक्सेबल आय पर 1,50,000 रूपए तक की छूट मिलती है।

Mutual Fund SIP

एस.आई.पी (SIP) का फुल फॉर्म Systematic Investment Plan होता है। एसआईपी (SIP) के जरिए आप हर महीने अपने द्वारा चुनी गई रकम को ऑटोमेटेकली म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं। एसआईपी करते समय आपको आपके द्वारा चुनी गयी निवेश की राशि और हर महीने निवेश करने की तारीख को सिर्फ एक बार सिलेक्ट कर देना है। जब भी आपकी इन्वेस्टमेंट तारिख आएगी तब एसआईपी के जरिए आपके बैंक खाते से अपने आप पैसे निवेश हो जाएंगे।

टॉप 10 Mutual Fund

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए लंबी अवधि में निवेश पर अच्छा मुनाफा कमाने का जाना-माना और स्मार्ट तरीका है। यदि सही तरह से प्लान किया जाये तो निवेशक लॉन्ग टर्म में अपनी राशि दुगनी तक कर सकते हैं लेकिन सबसे ज़रूरी जो चीज है वो है असेट लोकेशन, इसे दिमाग में रखना जरूरी है। चूंकि अभी बाज़ार में काफी अस्थिरता है, इसलिए जो निवेशक दिमाग में असेट लोकेशन नहीं रखते हैं उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

1. ICICI प्रूडेंशियल मल्टीकैप फंड

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टीकैप फंड लार्ज कैप, मिड कैप और स्माल कैप में मिक्स रूप से निवेश करता है। निवेशक इसमें मार्केट कैपिटलाइजेशन और सेक्टर्स में अच्छा रिटर्न पाते हैं। फंड मैनेजर का लक्ष्य 40 से 60% बड़े लार्ज कैप शेयर्स और बाकी बढ़ते हुये मिड कैप और स्माल कैप शेयर्स में निवेश करने का होता है। इस फंड की अभी की इक्विटी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटजी ऐसे स्टॉक्स और सेक्टर्स में निवेश की है जिनसे आर्थिक सुधार का फायदा मिल सके, इन्हें टॉप डाउन & बॉटम-अप के कॉम्‍बिनेशन से चुना जाता है।

2. एल एंड टी इंडिया वैल्यू फंड

यह फंड कम मूल्य वाले शेयर्स में निवेश करता है। इसकी रणनीति वैल्यूएशन विसंगतियों में निवेश करने की होती है, जब कंपनियाँ कुछ अस्थाई दौर से गुजर रही होती हैं तो वे अपने शेयर्स की कीमत कम कर देती हैं। ऐसा तब होता है जब शॉर्ट टर्म में कंपनी में कुछ गड़बड़ या कम मुनाफा होता है। इसलिए लोगों द्वारा नज़रअंदाज किए गए ये शेयर्स खरीदे जाते हैं और जब ये ऊपर उठते हैं तो इन्हें बेचा जाता है, जिससे निवेशक को लाभ होता है।

3. एडेलवाइस बैलेंस्ड एडवांटेज फंड

यह फंड डायनामिक असेट अलोकेशन के सिद्धान्त पर चलता है, जिससे शॉर्ट टर्म में नेगेटिव रिटर्न की संभावना कम हो जाती है और इसमें प्योर स्टेटिक असेट अलोकेशन के बजाय निवेश का एक अच्छा अनुभव मिलता है। यह एडेलवाइस इक्विटी हेल्थ इंडेक्स (ईईएचआई) को काम में लेता है जो कि बाज़ार की दिशा, अस्थिरता और आधारभूत नियमों के बारे में बताता है। इस फंड में फायदे की स्थिति ज़्यादा है बजाय कि नुकसान के। यह केवल मूल्य आधारित दृष्टिकोण से बेहतर है क्योंकि यह फंड बाज़ार में बड़े बदलाव का इंतज़ार नहीं करता है और बड़े रुझानों को कैप्चर करता है व ड्रॉडाउन को सीमित करता है।

4. आदित्य बिड़ला सन लाइफ फ्रंट लाइन इक्विटी फंड

इस पोर्टफोलियो में 90% इक्विटी और 10% डेब्‍ट और मनी मार्केट सिक्योरिटीज होती हैं। यह एक लार्ज कैप आधारित फंड है इसका मतलब है कि इसमें निवेश ऐसे शेयर्स में किया जाता है जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन लार्ज है। वर्तमान मार्केट परिदृश्य में लार्ज कैप फंड में निवेश करना अच्छा है क्योंकि इनके अस्थिर होने की संभावना कम होती है। यह पूरे पोर्टफोलियो को अच्छा सपोर्ट देगा।

5. डीएसपी मिडकैप फंड

यह मिडकैप फंड एक जाना-माना फंड है, इसने साबित किया है कि मुनाफे के लिए मिडकैप एक अच्छा विकल्प है। लंबी समयावधि में इस फंड ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें खास तौर पर फाइनेंशियल सर्विसेज, केमिकल्स, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग आदि सेक्टर्स में निवेश किया जाता है। एक्साइड इंडस्ट्रीज, आरबीएल बैंक और सोलर इंडस्ट्रीज कुछ अन्य शेयर्स हैं। इस फंड के फंड मैनेजर्स ने निवेशकों के लिए अच्छा भविष्य निर्धारित किया है। हाल ही में इस फंड में लंप-सम इनवेस्टमेंट नहीं लिया जाता है। निवेश ईएसआईपी या एसटीपी द्वारा किया जा सकता है।

6. प्रिंसिपल हाइब्रिड फंड

यह फंड कम अस्थिरता और इक्विटी फंड की तुलना में कम रिस्क के साथ अच्छा मुनाफा देता है। यह पहली बार निवेश करने वालों के लिए अच्छा विकल्प है। इस पोर्टफोलियो में मुख्य तौर पर लार्ज कैप शेयर्स में निवेश किया जाता है लेकिन कई बार अच्छा मौका देखकर मिड और स्माल कैप में भी निवेश किया जाता है। अगर फिक्स इन्कम वाले भाग की बात करें तो इसमें बेहतरीन फिक्स इन्कम है, साथ में ड्यूरेशन मैनेजमेंट है और नियोजित तरीके से भी निवेश किया जाता है ताकि अच्छे रिटर्न्स मिलें।

7. टाटा इक्विटी पीई फंड

यह एक एक्टिव तरीके से मैनेज किया गया एक विविधता लिया हुआ इक्विटी फंड है, जिसका बीएसई सेन्सेक्स की तुलना में 12 महीने का पी/ई अनुपात है। पावर ग्रिड कॉर्प ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटीसी इसके मुख्य शेयर्स हैं। इसने कम रिस्क के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है।

8. प्रिंसिपल डिविडेंड यील्ड फंड

यह फंड मुख्य रूप से नियमित और बड़े लाभांश वाले शेयर्स में निवेश करता है ताकि निवेशक को लॉन्ग टर्म में अच्छा मुनाफा मिले। इस फंड को मार्केट कैपिटलाइजेशन में शेयर्स में निवेश करने का लचीलापन है। इस फंड का कई बाज़ार क्रम में 14 साल टेक रिकॉर्ड है। जो निवेशक मध्यम जोखिम लेने वाले हैं वे इसमें निवेश कर सकते हैं।

9. रिलायंस स्मॉल कैप

स्माल कैपिटलाइजेशन कंपनियों में निवेश करते हुये यह कम रिस्क के साथ बेहतर रिटर्न देता है। स्माल कैप स्टॉक्स में वे शेयर शामिल हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन टॉप 250 कंपनियों से नीचे है। स्माल कैप कंपनियाँ कल के संभावित मिड कैप हैं और ये हाई ग्रोथ व लोवर वेल्यूएशन का दुगना फायदा देते हैं। यह अपनी कैटेगरी में शानदार स्माल कैप फंड है।

10. महिंद्रा उन्नति इमरजिंग बिजनेस योजना

यह एक उभरता हुआ मिड कैप फंड है जो 65% मिड कैप कंपनियों में निवेश करता है। यह फंड बॉटम-अप स्टॉक सलेक्शन करता है जिसमें स्माल मार्केट के बड़े प्लेयर्स पर फोकस रहता है। इसका एक्सपोजर उपभोक्ता वस्तुओं, औद्योगिक विनिर्माण और फाइनेंशियल सेर्विसेज में रहता है। जब सूचकांक 30% नीचे चला गया तब भी इस फंड को ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ। फंड केवल -5% डाउन था। निवेशक इस फंड में लंबे समय में मुनाफा पाने के लिए निवेश कर सकते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

कई लोग इन दिनों म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए उत्सुक हैं. हर कोई जानना चाहता है कि वे म्यूचुअल फंड में कैसे निवेश कर सकते हैं. कुछ रिटायरमेंट के वास्ते निवेश के लिए सबसे अच्छा म्यूचुअल फंड जानना चाहते हैं. कुछ अन्य जानना चाहते हैं कि क्या उन्होंने सही म्यूचुअल फंड में निवेश किया है. नए निवेशकों के लिए यहां कुछ पॉइंटर दिए गए हैं.

जल्दबाजी में काम न करें

आप खोए हुए समय की भरपाई नहीं कर सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि आपको जल्दबाजी में होना चाहिए. कई नए निवेशक ऐसी स्‍कीमों का चयन करते हैं, जिन्हें वे बहुत अच्छा समझते हैं. फिर अपने आसपास के सभी लोगों से पूछते हैं कि क्या उन्होंने निवेश के लिए सही म्यूचुअल फंड चुना है. यह एक बड़ी गलती है. यदि आप कोई ऐसी स्कीम बेचना चाहते हैं जो आपके लिए सही नहीं है, तो आपको एग्जिट लोड और कैपिटल गेन टैक्स चुकाना पड़ सकता है. यदि आप अपनी स्कीमों को खरीदने के बाद तुरंत बेच रहे हैं तो यह आपकी पूंजी घटा सकता है. यही कारण है कि निवेश से पहले ठीक से होमवर्क कर लेना चाहिए.

सही सवाल पूछें

पहले यह पता करें कि आप निवेश क्यों कर रहे हैं? इसके बाद पता करें कि आपके हाथ में कितना समय है. तीसरा, यह पता करें कि आप कितना जोखिम लेने को तैयार हैं. इन सवालों का जवाब आपको महत्वपूर्ण तथ्य प्रदान करेगा जो आपको अपने निवेश में मदद करेगा. वित्तीय लक्ष्य, निवेश के लिए समय और जोखिम प्रोफाइल, आपको हमेशा इन तीन फैक्टर के आधार पर म्यूचुअल फंड का चयन करना चाहिए.

क्या आप ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं

कई नए निवेशक कहते हैं या मानते हैं कि वे बहुत अधिक जोखिम ले सकते हैं. इसके पीछे वे दलील देते हैं कि चूंकि वे युवा हैं, इसलिए वे अधिक जोखिम उठा सकते हैं. हां, यह सच है कि युवा निवेशकों के पास समय ज्यादा होता है. वे कोई भी नुकसान उठा सकते हैं. उनके पास इस नुकसान की भरपाई का समय होता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कोई अपने निवेश के मूल्य में तेज गिरावट देखने के लिए सहज है. जब तेज गिरावट आती है तो कई युवा निवेशक परेशान होने लगते हैं.

रिटर्न के पीछे नहीं भागें

कई नए निवेशक फाइव-स्टार रेटेड या रिटर्न चार्ट में सबसे ऊपर रहने वाली स्कीमों से अभिभूत हो जाते हैं. यह इक्विटी म्यूचुअल फंड चुनने का सही तरीका नहीं है. आपको हमेशा स्कीम के लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखना चाहिए. आपको यह देखना चाहिए कि इसने लंबे समय में कैसा प्रदर्शन किया है. प्रदर्शन को हर कैलेंडर वर्ष में एक लंबी अवधि में देखना बेहतर देगा. हमेशा ऐसी स्कीम में निवेश करना अच्छा होता है, जिसने लंबी अवधि में लगातार प्रदर्शन किया हो.

ज्यादा स्कीमों में निवेश नहीं करें

आपको म्यूचुअल फंड की प्रत्येक कैटेगरी से एक स्कीम की जरूरत नहीं है. एक या दो स्कीमें चुनें जो आपके लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आपके जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप हों. म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में बहुत सारी स्कीमें और कैटेगरी अक्सर आपके रिटर्न को कम करती हैं. इसके कारण इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो का दोहराव होगा. इसके अलावा म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रदर्शन पर नजर रखना मुश्किल होगा.

पेशेवर की मदद लें

कई नए निवेशक सलाहकार की मदद के बगैर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर जोर देते हैं. हालांकि, हमारा मानना है कि किसी को सीधे निवेश तभी करना चाहिए, जब उसे म्यूचुअल फंड में निवेश के बारे में अच्छी जानकारी हो. इसके अलावा निवेश पर नजर रखने की भी जरूरत होती है. समय-समय पर इसमें जरूरत के मुताबित बदलाव करते रहना चाहिए. ऐसा नहीं कर सकते हैं तो म्यूचुअल फंड एडवाइजर की मदद से निवेश करना बेहतर है. याद रखें क‍ि कमीशन पर 1 फीसदी की बचत की तुलना में निवेश का ख्याल रखना अधिक महत्वपूर्ण है.

शेयर बाजार क्या है | What is Share Market

शेयर बाजार एक ऐसा बाजार है जहां हर कंपनी का शेयर खरीदा और बेचा जाता है। यह किसी भी अन्य बाजार की तरह ही है। लोग स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए कहां जाते हैं। उनका काम अब ऑफलाइन तक सीमित नहीं रह गया है, अब वह ऑनलाइन भी कर रहे हैं, यानी शेयर बाजार स्टॉक, डेट, म्यूचुअल फंड, डेरिवेटिव और अन्य सिक्योरिटीज को खरीदने और बेचने की जगह है। स्टॉक मुख्य रूप से स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से खरीदे और बेचे जाते हैं।बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) भारत में दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं। शेयर “भागों” और शेयर बाजार के शेयरों को संदर्भित करते हैं। भाषा में, “साझाकरण” का अर्थ है “भाग लेने वाली कंपनी”। जब आप किसी कंपनी में स्टॉक खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के शेयरधारक बन जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी ने कुल १००,००० शेयर जारी किए हैं और आपने उनमें से १०,००० शेयर खरीदे हैं, तो आप कंपनी के १०% शेयरधारक बन जाएंगे। आप इन शेयरों को किसी भी समय शेयर बाजार में बेच सकते हैं।

शेयर बाजार के प्रकार | Types of Share Market

शेयर बाजार दो प्रकार के होते हैं। प्राथमिक शेयर बाजार द्वितीयक शेयर बाजार प्राथमिक शेयर बाजार प्राथमिक शेयर बाजार कंपनी के शेयर पहली बार जारी किए जाते हैं। जब भी कोई कंपनी पहली बार शेयर बाजार में सार्वजनिक होती है और शेयर जारी किए जाते हैं, तो यह सब प्राथमिक शेयर बाजार पर ही होता है। जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बेचती है, तो इसे आरंभिक सार्वजनिक पेशकश या आईपीओ कहा जाता है। कंपनी बाद में सार्वजनिक हो गई। आईपीओ चुनते समय, कंपनी को अपने बारे में, वित्त, प्रमोटरों और व्यवसायों और शेयरों के बारे में जानकारी प्रदान करनी चाहिए। पहले से ही द्वितीयक शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों को खरीद और बेचकर बातचीत की जाती है। आइए शेयरों में पैसा लगाने के बारे में बात करते हैं। बाजार। हम बात कर रहे हैं सेकेंडरी स्टॉक मार्केट की ही सेकेंडरी स्टॉक मार्केट में ही स्टॉक या स्टॉक का कारोबार होता है और लाभ या हानि में खरीदा जाता है।

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Shares कैसे खरीदें

स्टॉक खरीदना जब आप सभी नियमों पर विचार करने के बाद शेयर बाजार में निवेश करने का फैसला करते हैं, तो अगला कदम शेयर बाजार में निवेश की प्रक्रिया शुरू करना हो सकता है। ऐसा करने के लिए, आपको पहले एक स्टॉकब्रोकर के साथ एक ट्रेडिंग और डीमैट खाता खोलना होगा। एक डीमैट खाता ठीक उसी तरह है जैसे आप बैंक खाते में पैसा जमा कर सकते हैं। डीमैट खाते में आपके निवेश से संबंधित सभी मूल्य, जैसे स्टॉक, बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियां, म्यूचुअल फंड, आदि बैंक खाते में जमा किए जा सकते हैं। उसी तरह से। वे इलेक्ट्रॉनिक रूप से संग्रहीत हैं। ट्रेडिंग खाते। ट्रेडिंग खातों का उपयोग आपके स्टॉक व्यवसाय में स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए किया जाता है। आप इस खाते को किसी अच्छे ब्रोकर के यहां खोल सकते हैं, और ऑनलाइन फ़ंक्शन के लिए धन्यवाद, आप इस खाते की सहायता से किसी भी समय स्टॉक खरीद और बेच सकते हैं।

शेयर बाजार में पैसा निवेश

सबसे पहले, आपको ब्रोकर की मदद से डीमैट खाता खोलना होगा। इसके बाद आपको डीमैट अकाउंट को अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होगा। आप अपने बैंक खाते से अपने डीमैट खाते में फंड ट्रांसफर कर सकते हैं, और ब्रोकर की वेबसाइट पर लॉग इन करके या ऑर्डर देकर किसी भी कंपनी के स्टॉक खरीद सकते हैं। उसके बाद ये शेयर आपके डीमैट खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। आप इसे किसी भी कार्य दिवस में किसी ब्रोकर के माध्यम से किसी भी समय बेच सकते हैं। शेयर बाजार में निवेश करना शेयर बाजार में निवेश करने से पहले हमारे सामने बहुत सारे प्रश्न होते हैं। उदाहरण के लिए, शेयर बाजार में निवेश कैसे करें, कहां निवेश करें, निवेश करते समय कैसे निवेश करें, या बिना ट्रैप के। अगर इन सभी चीजों का समाधान हो जाए तो हम आसानी से शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं। जब भी आप निवेश करना चाहते हैं तो आपको उस कंपनी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। अगर स्टॉक ग्रोथ रेट कम है या महंगाई दर ज्यादा है तो बड़ी कंपनियों पर फोकस करें। क्योंकि इस मामले में छोटी कंपनियों के मुकाबले बड़ी कंपनियों के शेयर फायदे की स्थिति में हैं। जब तक शेयर बाजार थोड़ा कमजोर है, बड़ी कंपनियों पर ध्यान दें। स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए स्टॉक ब्रोकर हमेशा जरूरी होते हैं। जब आप शेयर बाजार में निवेश करने के लिए स्टॉक ब्रोकर के पास जाते हैं। तो सबसे पहले आपको उनसे दो खाते खोलने होंगे। डीमैट खाता या ट्रेडिंग खाता। इस अकाउंट को खोलने के बाद आप किसी भी स्टॉक को आसानी से खरीद और बेच सकते हैं। आपको एक ब्रोकर चुनना चाहिए जो आपको श्रम लागत के मामले में अच्छी सेवाएं प्रदान करता हो। शेयर बाजार में निवेश रामबाण नहीं है, बल्कि आपको एक वित्तीय योजना की भी आवश्यकता है। घटित हुआ। निवेश करने से पहले आपको अपनी वित्तीय स्थिति, नकदी प्रवाह और जोखिम उठाने की क्षमता पर विचार करना चाहिए।शेयर बाजार में निवेश करने से पहले यह बहुत जरूरी है कि आपको इसकी पूरी समझ हो। नहीं तो बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए शेयर बाजार में निवेश करते समय जल्दबाजी में निर्णय न लें।

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शेयर मार्केट के कार्य

कंपनी शेयर बाजार में शेयर कैसे जारी करती है? सबसे पहले, कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सार्वजनिक हो जाती है और एक प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) आयोजित करती है, और जनता को अपने द्वारा निर्धारित मूल्य पर शेयर जारी करती है। एक बार आईपीओ पूरा हो जाने के बाद, स्टॉक सूचीबद्ध हो जाएगा, और निवेशक स्टॉक एक्सचेंजों और दलालों के माध्यम से एक-दूसरे को खरीद और बेचेंगे। स्टॉक की कीमत कैसे बदलती है? स्टॉक की कीमत कंपनी द्वारा प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के दौरान निर्धारित की जाती है, लेकिन एक बार प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश पूरी हो जाने के बाद, स्टॉक मूल्य और स्टॉक मूल्य निर्धारित करने में कंपनी की कोई भूमिका नहीं होती है। शेयर बाजार स्वतंत्र रूप से निर्धारित करता है स्टॉक की आपूर्ति और मांग संबंध। यदि बेचे गए शेयरों की संख्या खरीदे गए शेयरों की संख्या से कम है, तो शेयर की कीमत बढ़ जाएगी; यदि खरीदे गए शेयरों की संख्या बेचे गए शेयरों की संख्या से कम है, तो शेयर की कीमत गिर जाएगी। उसके बाद, कंपनी को समय-समय पर सभी महत्वपूर्ण जानकारी निवेशकों के साथ साझा करनी चाहिए, और निवेशक इस जानकारी के आधार पर कंपनी का मूल्यांकन करते हैं। इस आकलन के आधार पर, स्टॉक की आपूर्ति और मांग में वृद्धि के कारण स्टॉक की कीमत में परिवर्तन होता है।

शेयर को खरीदना और बेचना

स्टॉक खरीदना और बेचना स्टॉक मार्केटिंग यदि आप वास्तव में स्टॉक मार्केटिंग में अपना व्यवसाय करना चाहते हैं, तो आपको पूरे दिन ट्रेडिंग समाचार देखना चाहिए, और आपको पूरे दिन बाजार से संबंधित गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। तो आप जान सकते हैं कि आपको स्टॉक कब खरीदना चाहिए और कब बेचना चाहिए। आपको बता दें कि जब स्टॉक खरीदने का समय हो, जब शेयर बाजार में गिरावट आए, तो आपको स्टॉक खरीदना चाहिए। इससे आपको सस्ते और पर्याप्त शेर मिलेंगे, और जब भी शेयर बाजार में तेजी आएगी, आप इन शेयरों को बेच देंगे। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के घंटे शेयर बाजार में सप्ताह में 5 दिन ट्रेडिंग होती है। सोमवार से शुक्रवार तक, एक्सचेंज सुबह 9:00 बजे खुलता है और शाम को 3:15 बजे बंद हो जाता है। शेयर बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहता है। तो अगर आप शेयर बाजार में व्यापार करना चाहते हैं। इसलिए आपको शेयर बाजार की अच्छी समझ होनी चाहिए। बाजार में अच्छा निवेश करने के लिए आपके पास पर्याप्त धन होना चाहिए। सबसे पहले आपको शेयर बाजार में थोड़ा सा निवेश करना चाहिए।

इक्विटी शेयर क्या है

भागीदारी स्टॉक का सबसे लोकप्रिय प्रकार है। आम तौर पर, हम जिन शेयरों के बारे में बात करते हैं, वे स्टॉक होते हैं, लेकिन हम स्टॉक के बारे में बात नहीं करते हैं। हम केवल स्टॉक के बारे में बात करते हैं। “हम केवल स्टॉक के बारे में बात करते हैं। दूसरे शब्दों में, हम स्टॉक के बारे में बात करते हैं। ।” “पूंजीगत शेयर” के रूप में, जब तक कि इन शेयरों से पहले अन्य सामग्री नहीं लिखी जाती है, जैसे पसंदीदा शेयर या डीवीआर शेयर। दूसरे शब्दों में, शेयर पूंजी को सामान्य स्टॉक कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई शेयर उसके सामने कुछ नहीं लिखता है, लेकिन केवल “शेयर” लिखता है, तो यह माना जाता है कि उसने शेयर पूंजी में भाग लिया है। इसके अलावा, जो शेयर पूंजी रखते हैं उन्हें कंपनी का सच्चा मालिक कहा जाता है, और जो शेयर पूंजी रखते हैं उन्हें इक्विटी शेयरधारक कहा जाता है।

शेयर और डिबेंचर में अंतर

स्टॉक और बॉन्ड के बीच कुछ प्रमुख अंतर हैं: स्थिति: स्टॉक कंपनी की पूंजी है, जबकि बॉन्ड कंपनी का कर्ज है। इसलिए, शेयरधारक कंपनी का हिस्सा हैं, और बॉन्डधारक कंपनी का हिस्सा नहीं हैं। बांड यह भी दिखाते हैं कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है। यील्ड: शेयरों का लाभांश कंपनी के प्रत्यक्ष लाभ पर निर्भर करता है, लेकिन बॉन्ड में, यदि कंपनी लाभदायक है या नुकसान में है, तो निवेशकों को अलग-अलग ब्याज मिलेगा। मोचन-विनिमेय पसंदीदा शेयर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के प्राप्त नहीं होंगे, लेकिन दायित्व राशि अनिवार्य धारक को निर्धारित अवधि समाप्त होने पर वितरित की जाएगी। शेयरधारकों को लाभ के रूप में लाभांश प्राप्त होता है, जबकि निवेशक ऋण से ब्याज अर्जित करते हैं। संपत्ति को चार्ज करें। यह स्टॉक जारी करने की लागत नहीं है, बल्कि यह प्रतिभूतियों के अनिवार्य जारी करने की लागत है।

निवेश के लिए महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंटस

पैन कार्ड शेयर बाजार में निवेश करने के लिए सबसे पहले आपके पास पैन कार्ड होना चाहिए। इसका फुल फॉर्म एक परमानेंट अकाउंट होता है। यह भारतीय आयकर विभाग द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण दस अंकों की संख्या है। वास्तव में, भारत में किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए इस पैन नंबर की आवश्यकता होती है। यदि आपका पैन कार्ड पूरा नहीं हुआ है, तो कृपया इसे अभी पूरा करें। अब केवाईसी दस्तावेज बनाने के लिए एनएसडीएल की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन भी जमा किए जा सकते हैं।आपने इसे देखा होगा, और बैंक नियमित रूप से अपने खातों पर केवाईसी भी करता है। इसका पूरा रूप है अपने ग्राहकों को जानना। इसलिए, किसी भी खाताधारक को अपने आधार कार्ड और पते के अन्य प्रमाण को अपडेट करने की आवश्यकता होती है।इन प्रमाणों को केवाईसी दस्तावेज कहा जाता है। ऑनलाइन बैंकिंग और शेयर बाजार में आपके द्वारा खरीदे गए स्टॉक (स्टॉक) का भुगतान करने के लिए, आपको अपने ब्रोकर को भुगतान करना होगा, क्योंकि केवल आपका ब्रोकर ही आपके द्वारा खरीदे गए स्टॉक और स्टॉक के विक्रेता को आपके पैसे ट्रांसफर करेगा, और शेयर जमा किया जाएगा। अपने डेमो खाते में। यही कारण है कि आपको अपने ब्रोकर को भुगतान करने के लिए मूल रूप से एक ऑनलाइन ऑनलाइन बैंक खाते की आवश्यकता होती है, जिसके माध्यम से आप अपने ब्रोकर को भुगतान कर सकते हैं। इसलिए, प्रत्येक स्टॉक ब्रोकर अपने सभी भुगतानों को ट्रैक करने के लिए एक खाता खोलेगा, जिसे ट्रेडिंग खाता कहा जाता है। वास्तव में, स्टॉक खरीदने के लिए, आपको पहले इस ट्रेडिंग खाते में पैसा जमा करना होगा।स्टॉक बेचते समय, आपका ब्रोकर इस ट्रेडिंग खाते में स्टॉक के बदले में पैसा जमा करेगा। इसी तरह, आपका स्टॉक खरीदना और बेचना जारी रहेगा।स्टॉकब्रोकर की पसंद कोई भी स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई या एनएसई) से सीधे स्टॉक खरीद और बेच नहीं सकता है। इसलिए, शेयर बाजार से पहले हमारे शेयरों को खरीदने और बेचने के आदेश केवल स्टॉक ब्रोकर ही पूरे कर सकते हैं। यही कारण है कि स्टॉक खरीदने या शेयर बाजार में निवेश करने के लिए स्टॉक ब्रोकर की आवश्यकता होती है।यह स्टॉक एक्सचेंज पर स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए अधिकृत संस्था है। डीमैट अकाउंट कोई भी खरीद सकता है। स्टॉक रखने के लिए, हमें अनिवार्य रूप से एक डीमैट खाते की आवश्यकता होती है, जिसमें खरीदे गए स्टॉक को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा किया जाता है, लेकिन जब इसे बेचा जाता है, तो इसे बेचने के बाद भी खाते से काट लिया जाएगा। आमतौर पर यह प्रक्रिया हर बार जारी रहेगी। ट्रेडिंग अकाउंट। स्टॉक की खरीद या बिक्री केवल यूजर आईडी और पासवर्ड वाले ट्रेडिंग अकाउंट की मदद से ही पूरी की जा सकती है। आमतौर पर इसकी मदद से हम स्टॉक ब्रोकर के सॉफ्टवेयर या सिस्टम का इस्तेमाल स्टॉक खरीदने और बेचने के ऑर्डर देने के लिए करते हैं।

शेयरों के भाव में उतार-चढ़ाव

किसी कंपनी के कामकाज, ऑर्डर मिलने या छिन जाने, नतीजे बेहतर रहने, मुनाफा बढ़ने/घटने जैसी जानकारियों के आधार पर उस कंपनी का मूल्यांकन होता है. चूंकि लिस्टेड कंपनी रोज कारोबार करती रहती है और उसकी स्थितियों में रोज कुछ न कुछ बदलाव होता है, इस मूल्यांकन के आधार पर मांग घटने-बढ़ने से उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढाव आता रहता है. अगर कोई कंपनी लिस्टिंग समझौते से जुड़ी शर्त का पालन नहीं करती, तो उसे सेबी BSE/NSE से डीलिस्ट कर देती है. शायद आपको पता न हो, विश्व के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल वारेन बफे भी शेयर बाजार (Stock Market) में ही निवेश कर अरबपति बने हैं।

पूंजी बाजार क्या है

पूंजी बाजार स्टॉक या लंबी अवधि के बांड द्वारा समर्थित प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने के लिए एक वित्तीय बाजार है। पूंजी बाजार से तात्पर्य उन बचतकर्ताओं की संपत्ति से है जो इसे लंबे समय तक उत्पादक उद्देश्यों के लिए उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि कंपनियां या सरकारें जो दीर्घकालिक निवेश करती हैं। पूंजी बाजार का कार्य पूंजी बाजार अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण में सुधार करता है, जिसमें शामिल हैं: प्राथमिक बाजार- प्राथमिक बाजार वह है जहां नई कंपनियों को जारी करना प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) या राइट्स इश्यू के रूप में निष्पादित किया जाता है। द्वितीयक बाजार- द्वितीयक बाजार वह बाजार है जहां प्राथमिक बाजार में जनता को प्रतिभूतियां बेची जाती हैं। स्टॉक एक्सचेंज में पेशकश और/या लिस्टिंग के बाद। इस बाजार में ज्यादातर लेन-देन होते हैं, जिनमें शेयर बाजार और ऋण बाजार शामिल हैं। ayday और Payday Payday वह तारीख है जब ब्रोकर आपको बताता है कि एक्सचेंज प्रतिभूतियों का भुगतान या वितरण करेगा। Payday वह तारीख है जिस पर एक्सचेंज ब्रोकर को प्रतिभूतियों का भुगतान या वितरण करता है।

स्टॉक Exchange क्या है

शेयर बाजार क्या है? स्टॉक एक्सचेंज स्टॉक खरीदने और बेचने का स्थान है। शेयर बाजार में खरीदा और बेचा जाने वाला स्टॉक किसी भी प्रकार का हो सकता है। स्टॉक, बॉन्ड, बॉन्ड, फ्यूचर्स, ऑप्शंस और कमोडिटीज जैसे गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का काउंटर पर कारोबार होता है। क्योंकि ये शेयर बहुत जोखिम भरे होते हैं और इनका सार्वजनिक रूप से कारोबार नहीं होता है, इसलिए इन्हें बेचना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए इसमें तरलता कम है।

52 Week High and Low

हम सभी जानते है की एक साल में 52 Week होते है यानि (52 Week High And Low) को हम एक साल का High / Low भी समझ सकते है। अब बात आती है की यह (52 Week High And Low) आपको ट्रेडिंग में कैसे मदद कर सकता है तो यह आपको अनेक तरीके से फायदा दे सकता है जैसे- इंट्राडे ट्रेडिंग, शार्ट टर्म ट्रेडिंग, मीडियम टर्म ट्रेडिंग। यह आपको बताता है की बाजार एक साल में कितना नीचे गया और कितना ऊपर जिस वजह से हमे एक मजबूत Support and Resistance मिलता है। जिसका इस्तेमाल बड़े-बड़े संस्थागत निवेशक करते है।

  • बाजार अगर (52 Week High) के पास हो तो यह Bullish है और आगे भी Bullish रहने की संभावना है।
  • बाजार अगर (52 Week Low) के पास है तो यह Bearish है और आगे भी Bearish (मंदी) रहने की संभावना है।
  • जब भी बाजार (52 Week High And Low) के आस पास आता है तो उसको तोड़ने में तकलीफ होती है इसलिए कई बार तोड़ पाता है और कई बार वहाँ से बाजार उल्टी दिशा की तरफ चला ज्यादा है।
  • जब भी आप बाजार को (52 Week High And Low) के आस पास देखे तो वहाँ आपको ट्रेड लेने का मौका मिलता है क्योकि अगर बाजार ने अपना (52 Week High And Low) तोडा तो उस दिशा में जाने की एक संभावना बनती है। लेकिन अगर नहीं तोड़ पाया तो वहाँ बाजार थोड़ा Correction कर सकता है।
  • Intraday Trading
  • (52 Week High)- अगर बाजार (52 Week High) Intraday में बनाता है लेकिन उस दिन बंद मंदी से साथ होता है तो इसका मतलब है की लोग अपना प्रॉफिट बुक कर रहे है और कुछ समय के लिए बाजार थोड़ा नीचे जा सकता है और यहाँ पर Intraday में Short Selling करके ट्रेड ले सकते है।
  • (52 Week Low)- अगर बाजार (52 Week Low) Intraday में बनाता है लेकिन उस दिन बंद बढ़त के साथ होता है तो इसका मतलब है की लोग यहाँ पर खरीदारी कर रहे है और कुछ समय के लिए बाजार थोड़ा उपर जा सकता है इसलिए आप यहाँ पर Intraday में Long के ट्रेड ले सकते है।

GST: कई कंपनियां बना कर कर रहा था जीएसटी की चोरी हुआ गिरफ्तार, जानें क्या है मामला :

खरीद फरोख्त के बिना ही जारी कर रहा था बिल

जीएसटी विभाग (GST Department) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (Directorate General of Goods and Services Tax Intelligence) के चंडीगढ़ रेंज के अधिकारियों ने इस मामले का खुलासा किया। अधिकारियों ने जांच में पाया कि आरोपी कथित तौर पर सामान की खरीद-फरोख्त के बिना ही बिल जारी कर रहा था। इस तरह अवैध तरीके से दिल्ली एवं चंडीगढ़ सहित कई जगहों पर विभिन्न इकाइयों को आईटीसी (ITC) का दावा करने में मदद कर रहा था। आईटीसी के तहत इकाइयों को करोबार या उत्पादन की श्रृखंला में सामग्री या संसाधनों पर पहले चुकाए जा चुके कर के समायोजन/वापसी का लाभ मिलता है।

बनाई थी छह कंपनियां

डीजीजीआई की चंडीगढ़ जोनल इकाई के अधिकारी ने कहा कि आरोपी ने कई लाभार्थियों को फर्जी आईटीसी हस्तांतरित करने के लिए छह कंपनियां स्थापित की थीं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने फर्जी तरीके से 128 करोड़ रुपये की आईटीसी हस्तांतरित किए। अधिकारी ने बताया कि जीएसटी अधिकारियों ने आरोपी के दिल्ली और हिमाचल प्रदेश स्थित व्यावसायिक परिसरों और घरों पर भी छापेमारी की। उन्होंने बताया कि कुछ आपूर्तिकर्ताओं के परिसरों पर भी छापे मारे गए।

जिन वस्तुओं की बिक्री की, उसे कभी खरीदा ही नहीं

जांच में यह भी पता चला कि उन कारोबारियों की ओर से जिन वस्तुओं को बिक्री के रूप में दिखाया गया था, उन्हें कभी खरीदा नहीं गया था। इसी तरह, कुछ चीजें जिन्हें खरीद के रूप में दिखाया गया था, उन्हें विक्रेता कंपनियों द्वारा कभी बेची ही नहीं गया था। साथ ही जिन वाहनों को माल के परिवहन के साधनों के तौर पर दिखाया गया था, वे देश के दूसरे हिस्सों में चल रहे थे। आरोपी रेडीमेड कपड़े, केमिकल्स, सिगरेट समेत अन्य चीजों का कारोबार करता है।

अपनी डिजिटल करेंसी लाने की तैयारी में आरबीआई, डिप्टी गवर्नर ने बताया प्लान :

नई दिल्ली – डिजिटल करेंसी (Digital Currency) पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से बड़ा बयान आया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर (Deputy Governor) टी रवि शंकर ने बृहस्पतिवार को इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी खुद की डिजिटल करेंसी चरणबद्ध तरीके से पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इसे पायलट आधार पर थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail) क्षेत्रों में पेश करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency) को लेकर सोच- विचार के स्तर से काफी आगे बढ़ चुका है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक इस दिशा में काम कर रहे हैं।

देश में 100% इथेनॉल से चलेंगे वाहन, जानिए सरकार का प्लान

शंकर ने कहा कि सीबीडीसी के तहत उपभोक्ताओं को उन कुछ डिजिटल करेंसीज में देखी गई ‘अस्थिरता के भयावह स्तर’ से बचाने की आवश्यकता है, जिन्हें कोई सरकारी गारंटी (Government Guarantee) प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक सीबीडीसी की संभावना तलाशने में लगे हैं।

उन्होंने ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ के ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि संभवत: सीबीडीसी को लेकर विचार क्रियान्वयन (Implementation) के करीब है। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति (High level Inter-ministerial Committee) ने नीति और कानूनी ढांचे का परीक्षण किया है। उसने देश में सीबीडीसी को डिजिटल मुद्रा के रूप में पेश करने की सिफारिश की है।

डिप्टी गवर्नर ने कहा, ‘‘अन्य केंद्रीय बैंकों की तरह आरबीआई (RBI) भी काफी समय से सीबीडीसी की विभिन्न पहलुओं पर गौर कर रहा है।’’ सामान्य तौर पर कुछ देशों ने विशिष्ट उद्देश्य के लिये सीबीडीसी को लागू किया है। शंकर ने कहा, ‘‘…थोक और खुदरा क्षेत्रों में पायलट आधार पर इसे निकट भविष्य में लागू किया जा सकता है….।’’

एक-दो नहीं बल्कि 3 तरीकों से होता है NSC में निवेश, तगड़ा रिटर्न भी मिलता है और टैक्स भी नहीं लगता!

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि इसके लिये कानूनी बदलाव की जरूरत होगी, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम (Indian Reserve Bank Act) के तहत मौजूदा प्रावधान मुद्रा को भौतिक रूप से ध्यान में रखते हुए बनाये गये है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप सिक्का अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में भी संशोधन की आवश्यकता होगी।

क्या है डिजिटल करेंसी?

डिजिटल करेंसी का पूरा नाम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency) है। जिस देश का केंद्रीय बैंक इसे जारी करता है, उस देश की सरकार की मान्यता इसे हासिल होती है। यह उस देश की केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट में भी शामिल होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे देश की सॉवरेन करेंसी में बदला जा सकता है।

भारत के मामले में आप इसे डिजिटल रुपया कह सकते हैं। डिजिटल करेंसी दो तरह की होती है-रिटेल और होलसेल। रिटेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल आम लोग और कंपनियां करती हैं। होलसेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल वित्तीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है।

एक-दो नहीं बल्कि 3 तरीकों से होता है NSC में निवेश, तगड़ा रिटर्न भी मिलता है और टैक्स भी नहीं लगता!

National Savings Certificate – पिछले ही दिनों सरकार ने इस तिमाही के लिए भी स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरों को पहले जितना ही रखने का फैसला किया है। यानी 30 सितंबर 2021 तक यही दरें लागू रहेंगी। ऐसे में अगर आप निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो एनएससी आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (National Savings Certificate) यानी एनएससी (NSC) एक ऐसा टूल है, जिसमें निवेश कर के आपका पैसा तो बढ़ता ही है, साथ ही आपको टैक्स में भी फायदा (Tax benefit of investing in NSC) मिलता है। वहीं सरकार की तरफ से एनएससी में किए गए निवेश पर ब्याज (NSC Interest Rate) भी काफी अच्छा मिलता है। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि ये सरकारी स्कीम होती है, तो आपका निवेश एकदम सुरक्षित रहेगा। इसमें निवेश करने के लिए आप किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर निवेश कर सकते हैं।

देश में 100% इथेनॉल से चलेंगे वाहन, जानिए सरकार का प्लान

अगर आप एनएससी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो पहली बात ये ध्यान रखनी होगी कि इसका 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। यानी इसमें निवेश करने के बाद 5 साल बाद ही पैसे वापस मिलते हैं। इसमें मौजूदा ब्याज दर 6.8 फीसदी है। इसमें कम से कम 1000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और अधिकतम 100 के गुणक में इसमें निवेश की कोई सीमा नहीं है। एनएससी का इस्तेमाल बैंक से लोन लेने के दौरान सिक्योरिटी के तौर पर भी होता है।

तीन तरीके से होता है एनएससी में निवेश

सिंगल टाइप- इस तरह का सर्टिफिकेट खुद के लिए या फिर किसी नाबालिग के लिए लिया जा सकता है।

ज्वाइंट ए टाइप- इस तरह के सर्टिफिकेट को दो निवेशक साथ मिलकर ले सकते हैं यानी दो लोग साथ मिलकर इसमें निवेश कर सकते हैं।

ज्वाइंट बी टाइप- इस तरह के ज्वाइंट अकाउंट में पैसे तो दो लोग मिलकर लगाते हैं, लेकिन मेच्योरिटी पर पैसे सिर्फ किसी एक ही निवेशक को दिए जाते हैं।

टैक्स में मिलती है छूट

धारा 80सी के तहत एनएससी निवेश किए गए पैसों पर 1.5 लाख रुपये सालाना तक पर टैक्स छूट मिलती है। इसकी अवधि 5 साल की होती है, इसलिए हर साल इस पर मिलने वाला ब्याज भी फिर से निवेश होता है, इसलिए उस पर धारा 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है, लेकिन मेच्योरिटी पर मिले ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलती है। अगर फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं से इसकी तुलना करें तो इसमें निवेश करना काफी फायदे का सौदा साबित होता है।

देश में 100% इथेनॉल से चलेंगे वाहन, जानिए सरकार का प्लान :

नई दिल्ली – सरकार ने बतौर ईंधन वाहनों में सिर्फ इथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री (commerce and industry minister) पीयूह गोयल (Piyush Goyal) ने शुक्रवार को इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2023-24 तक पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रण का लक्ष्य रखा है और अंतिम लक्ष्य 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाले वाहन हैं।

उन्होंने कहा कि तेज रफ्तार से प्रगति करने के मकसद से टिकाऊ मिशन और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का इस्तेमाल काफी अहम है। बैटरी से जुड़ी प्रौद्योगिकियां बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही हैं। इसके लिए देश में अब बैटरी पर बहुत ज्यादा निवेश हो रहा है।

इमारतें 2030 तक ऊर्जा की सबसे बड़ी ग्राहक होंगी: बिजली मंत्री

उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के आत्मानिर्भर भारत सम्मेलन और प्रदर्शनी में कहा, ‘‘वर्ष 2023-24 तक, भारत पेट्रोल के उत्पादों में इथेनॉल का 20 प्रतिशत सम्मिश्रण करने जा रहा है। हमारा अंतिम लक्ष्य ऐसे वाहन भी हैं जो 100 प्रतिशत इथेनॉल तक का इस्तेमाल कर सकते हैं।’’

मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक कार (Electric car) उपयोगकर्ताओं को दिन के समय अक्षय ऊर्जा या सौर ऊर्जा का उपयोग करके अपनी बैटरी रिचार्ज करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके लिए ‘‘हम देश भर में गैस स्टेशनों पर चार्जिंग स्टेशनों को लगाने के बारे में सोच रहे हैं।’’

गोयल ने कहा कि वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट (1.75 लाख मेगावाट) के कुल नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्ति के लक्ष्य के साथ भारत अब वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट क्षमता हासिल करने की ओर ध्यान दे रहा है।

इमारतें 2030 तक ऊर्जा की सबसे बड़ी ग्राहक होंगी: बिजली मंत्री :

नयी दिल्ली – 16 जुलाई बिजली मंत्री आर के सिंह ने शुक्रवार को इमारतों को ऊर्जा दक्ष बनाने के लिये विभिन्न उपायों की घोषणा करते हुए कहा कि यह क्षेत्र 2030 तक सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता होगा।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे सिंह ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के ‘सतत रिहायश का लक्ष्य: इमारत ऊर्जा दक्षता 2021 में नई पहल’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री ने ‘ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान भवन क्षेत्र के लिए विभिन्न पहलों की घोषणा की और कहा ‘‘उद्योग के बाद भवन क्षेत्र बिजली का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन 2030 तक यह सबसे बड़ा ऊर्जा खपत वाला क्षेत्र बन सकता है।’’

बिजली मंत्रालय के बयान के अनुसार सिंह ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र के महत्व को महसूस कर रही है और इसका ध्यान आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों में ऊर्जा दक्षता में सुधार पर है,

उन्होंने बीईई को इमारतों को ऊर्जा दक्ष बनाने को लेकर 15,000 से अधिक वास्तुकारों, इंजीनियरों और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया।

इस मौके पर ऊर्जा दक्ष घरों के लिए एक ऑनलाइन स्टार रेटिंग उत्पाद की घोषणा की गई ताकि ऊर्जा दक्षता में सुधार किया जा सके और व्यक्तिगत घरों में ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके। यह पेशेवरों को अपने घरों की ऊर्जा दक्षता के लिए सर्वोत्तम विकल्प चुनने में मदद करने के लिए प्रदर्शन विश्लेषण प्रदान करता है।