Raksha Bandhan Quotes | Raksha Bandhan Status

अपनी खुशियों का घोट कर गला तुमने, जमाने की हर रीत तुमने निभाई, दुआ है रब से अब कोई गम ना आए, तेरी जिंदगी में बहना।

कभी लगती है दादी अम्मा

तो कभी डांटती जैसे हो मेरी मम्मा।

कभी गुस्सा हो रूठ जाती

तो कभी प्यार से पास बुलाती।

कभी टप टप आंसू बहाती

तो कभी मंद मंद ही मुस्काती।

दिल की बड़ी ही नेक है, सच कहूँ

तो मेरी बहना लाखों में एक है।

ख़ुशकिस्मत होती हैं वो बहन

जिसके सर पर भाई का हाथ होता हैं,

हर परेशानी में उसके साथ होता हैं,

लड़ना झगड़ना फिर प्यार से मनाना

तभी तो इस रिश्तें में इतना प्यार होता हैं।

खूबसूरत एक रिश्ता तेरा मेरा,

हो जिस पे बस खुशियों का पहरा,

नजर न लगे कभी इस रिश्ते को,

क्योंकि दुनिया की सबसे प्यारी मेरी बहना है।

आज दिन बहुत खास हैं,

बहन के लिए कुछ मेरे पास है,

उसके सुकून के खातिर ओ बहना

तेरा भाई हमेशा तेरे आस-पास हैं।

याद आता है अक्सर वो गुज़रा हुआ ज़माना,

तेरी मीठी सी आवाज़ में भाई कहकर बुलाना,

वो सुबह स्कूल के लिए तेरा मुझको जगाना,

अब क्या करे बहना यही है ज़िन्दगी का तराना।

मांगी थी दुआ हमने रब से देना मुझे,

एक प्यारी बहन जो अलग हो सबसे,

उस खुदा ने दे दी एक प्यारी सी बहन’

और कहा सम्भालों ये ‘ अनमोल है सबसे।

मेरा दुश्मन भी तू और दोस्त भी तू,

मेरे लिए मुसिबत भी तू उसका हल भी तू,

कर दे मेरा जो हाल बुरा भाई तू मेरा पर है,

मेरे खुशीयों की दस्तक भी तू।

आज दिन बहुत खास हैं,

बहन के लिए कुछ मेरे पास है,

उसके सुकून के खातिर ओ बहना,

तेरा भाई हमेशा तेरे आस – पास है।

वो बचपन की शरारते, वो झूलों पे खेलना

वो माँ का डांटना, वो पापा का लाड-प्यार।

पर एक चीज़ और जो इन सब में ख़ास है

वो है मेरी प्यारी बहन का प्यार..।।।

मांगी थी दुआ हमने रब से,

देना मुझे एक प्यारी ‘बहन’ जो अलग हो सबसे।

उस ख़ुदा ने दे दी एक प्यारी सी ‘बहन’

और कहा – सम्भालों ये ‘अनमोल’ हैं सबसे।

ये लम्हा कुछ खास हैं,

बहिन के हाथों में भाई का हाथ हैं,

ओ बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ ख़ास है,

तेरे सुकून की खातिर मेरी बहना,

तेरा भाई हमेशा तेरे साथ हैं..।।।।

खुबसूरत एक रिश्ता तेरा मेरा है,

जिस पे बस खुशियों का पहरा है।

नजर न लगे कभी इस रिश्ते को,

क्योंकि दुनिया की सबसे प्यारी बहना मेरी हैं।

मिला है कितना प्यार मुझे तुझसे ओ बहना,

कैसे मैं ये दो लफ्जो में बतलाऊ,

तू रहे खुश हमेशा इसी दुआ के साथ,

आज मैं सर को झुकाऊ…।।।

चेहरे पर तुम्हारे चाँद सा नूर हो,

सदा हर गम हर मुश्किल तुमसे दूर हो।

कामयाबी सदा तुम्हारे कदम चूमे,

जीवन में हम ना कभी एक दूसरे से दूर हो।

दर्द हो जो उसे कभी, टूट जाता हूँ मैं,

खुशी में उसकी, फूला नहीं समाता हूँ मैं।

आँखें नम ना हों तेरी कभी,

चलता रहे हमारा प्यार यूँ ही।

दुआ माँग, करता हूँ रब से ये पुकार,

मिले हर जन्म में मेरी बहना मुझे, हर बार।

बहन का प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता

वो चाहे दूर भी हो तो कोई गम नहीं होता,

अक्सर रिश्ते दूरियों से फिके पड जाते है,

पर भाई बहन का प्यार कभी कम नहीं होता।

#बहन से अच्छा #दोस्त और कोई नहीं हो सकता,

और मेरी #बहना तुमसे अच्छी कोई और #बहन हो ही नहीं सकती…!

तू 👉🏽 #दोस्त👭 नही❌ तू #जान☺ है मेरी🙋🏻

तू 👆🏽#बहन👯‍♂ नही✖ #जिंदगी😍 है मेरी😘

एक ☝#बहन 👩का प्यार😍 किसी 👈भी #भाई 🙎‍♂के लिए👈 सबसे 🤘बड़ी 💤#दौलत 💰हैं,

सब 👈#खर्च 👎हो जाता 👈हैं पर ☝#प्यार 😘के वह 😊#ख़ज़ाने 💰याद 😊रहते हैं…!

कितनी #भाग्यशाली होगी यह #बहन ज़िसको विदा करते समय

#भाईयों ने अपने हाथ बिछा दिये …

काश कि हर बहन को एसे भाई मिले …

हर भाई को #बहन मिले ……

कोई भी घर बिना #बेटी के न रहे …

 #खुशनसिब है वो #भाई जिसके #सर पर #बहन का हाथ होता है,

चाहे कुछ भी #हालात हो,

ये #रिस्ते हमेशा #साथ होता है..!!

#जान कहने वाली #गर्लफ्रेंड न हो तो कोई बात नही,

लेकिन….#ओए _हीरो कहने वाली एक #बहन जरुर होनी चाहिए..!!

 #बेहन का #प्यार किसी #दुआ से कम नही होता,

#वो चाहे #दूर भी हो तो कोई #ग़म नही होता,

#अक्सर रिश्ते दुरियो से फीके पड़ जाते है,

#पर भाई #बहन का #प्यार कभी कम नहीं होता..!

 #घर में जब कोई आपके #साथ नहीं होता,

#भाई तब भी आपके साथ #खड़ा होता है..!

#Me – चल जल्दी से चाय बना.!

#बहन- नहीं बनाउंगी,

तुझसे पिछले महीने के 12 तारीख को सुबह 8 बजे एक गिलास_पानी मांगी थी,

तूने लाकर_दिया था क्या ?😝

 #Lucky होती है वो #Girls

जिनकी बड़ी #बहन उनकी

#Freind भी होती है..!

दूसरे की #बहन के बारे में उतना ही बोलो,

जितना खुद की #बहन के बारे में सुन सको..!

कितना 🌻प्यारा कितना 🌹#सुंदर ये सारा संसार है,

इस #संसार मे सबसे प्यारा 🌺#भाई_#बहन🌺 का 🌸#प्यार है…

हर #भाई और #बहन

तेरी मेरी #बनती नहीं,

तेरे #बिना मेरी #चलती नहीं..

 #बहन चाहे #भाई का #प्यार…

नहीं चाहे #महंगे #उपहार,

#रिश्ता #अटूट रहे #सदियों तक….

मिले मेरे #भाई को #खुशियां #अपार….

 कल मेरी #बहन 👱 का #‎Call 📞 आया और #उसने कहा,

#भाई 😎 मुझे वही #भाभी 👩 #चाइये जिसके लिए तू #Status 📝 डालता है ..!

 #प्यार वो हैं….😍😍

जब #बहन कहती हैं-

“`देखूंगी मेरी #शादी के बाद तेरा #काम कौन करेगा😍

#बहन वो #दोस्त है जो थामती तो #हाथ है,

पर स्पर्श #दिल को करती है…!

#बहन तो #वो होती #है,

जो कभी आप को #अकेले Selfie

लेने नही देती और इधर उधर से भाग

-_-_-_-#के Selfie मै आ जाती है..!

#बहन से अच्छा दोस्त और कोई नहीं हो सकता, और मेरी #Moti

तुमसे अच्छी कोई और #sister हो ही नहीं सकती..!

 #बहन चाहे कितनी भी #पतली क्यों न हो,

#भाई हमेशा कहता #Moti ही बोलेगा…

 हां मैं #रावण बनना चाहूंगा..

जो #बहन के लिये #भगवान से भी टकरा जाये 😬

🤗 #लोग पूछते हैं इतने #गम😔 में भी #खुश 😊क्युँ हो..

मैने 💂🏻‍♀कहा #दुनिया🌍 साथ दे न दे.. मेरी💂🏻‍♀ #बहन👭 तो #साथ😎 हैं..

Khushkismat hótí hài वो बहने, जिसके सर pàr  Bhài का हाथ होता hài,

हर परेशानी mé उसका साथ होता hài, लड़ना झगड़ना फिर प्यार से मनाना,

तभी तो रिश्ते mé प्यार होता hài

देखो इस राखी ki ताकत को

जो  Bhài किसी के आगे nàhi झुकता hài

वो bhi झुकता hài, अपनी bàhén के आगे

खुबसूरत एक रिश्ता तेरा मेरा hài, जिस पे बस खुशियों का पहरा hài

नजर न लगे कभी इस रिश्ते को क्योंकि दुनिया का सबसे प्यारा  Bhài मेरा hài

सब से अलग hài भैया मेरा सब से प्यारा hài भैया मेरा

कौन कहता hài खुशियाँ ही सब hótí hài जहाँ में

मेरे लिए तो खुशियों से bhi अनमोल hài भैया मेरा

प्रेम से जो देती hài वो bàhén hài, लड़ झगड़ के जो देता hài वो  Bhài hài,

पूछ कर जो देता hài वो पिता hài, बिना मांगे जो सब kúch दे दे, वो माँ hài

जब मेरे पास मेरी फिकर करने वाले  Bhài hài..

तो मैं दुनिया वालो से क्यू डरु !!

ghàr🏚️ mé  Bhài चाहे जितने bhi बड़े क्यों ना हों,

हेर  ghàr🏚️ mé एक Hitlér bàhén तो ज़रूर hótí hài

या अल्लाह मेरी bàhén का नसीब अच्छा करना..

और इससे दुनिया ki सारी खुशिया अदा करना !!

खुश नसीब hài वो bàhén जिसके सर pàr  Bhài का हाथ होता hài,

चाहे kúch bhi हालात हो, ये रिश्ता हमेशा साथ होता hài !!

भाइयो kó तंग करने mé जो मज़ा hài..

वो किसी àúr kó तंग करने mé nàhi !!

óyééé सुन.. मेरे  Bhài के दिल mé मेरी जगह लेने ki सोचना bhi मत..

मेरे  Bhài सिर्फ मेरे हे किसी àúr के nàhi !

तेरी मेरी बनती नहीं पर तेरे बिना

मेरी चलती भी नहीं… Love u..मोटी

बचपन में शरारत करने का इरादा न होता,

बहन !!!

तुम ना होती तो बचपन इतना प्यारा न होता

भाइयो को तंग करने में जो मज़ा है..

वो किसी और को तंग करने में नहीं

ऐ रब, मेरी दुआओं में असर इतना रहे,

मेरी बहन का दामन हमेशा खुशियों से भरा रहे……

सब से अलग हैं भैया मेरा,

सब से प्यारा है भैया मेरा,

कौन कहता हैं खुशियाँ ही सब होती हैं जहाँ में,

 मेरे लिए तो खुशियों से भी अनमोल हैं भैया मेरा….

जमाने भर के रिश्तों से मुझे क्या लेना-देना,

बस इतना ही काफी है कि बहन मेरे साथ है

जैसे दोनों आँख एक साथ होते हैं.

वैसे भाई-बहन के रिश्ते भी ख़ास होते हैं…

जिसके सर पर भाई का हाथ होता हैं.

हर परेशानी में उसके साथ होता हैं,

लड़ना झगड़ना फिर प्यार से मनाना

तभी तो इस रिश्ते में इतना प्यार होता हैं…

याद आता है अक्सर वो गुज़रा हुआ ज़माना,

तेरी मीठी सी आवाज़ में भाई कहकर बुलाना,

वो सुबह स्कूल के लिए तेरा मुझको जगाना,

अब क्या करे बहना यही है ज़िन्दगी का तराना

छोटी बहन एक सबसे अच्छी दोस्त भी होती है,

जिसके साथ आपने अपना बचपन बिताया होता है

मांगी थी दुआ हमने रब से..

देना मुझे एक प्यारी बहन जो अलग हो सबसे..

उस खुदा ने दे दी एक प्यारी सी बहन..

और कहाँ संभालो अनमोल है सबसे

कभी हमसे लड़ती है, कभी हमसे झगड़ती है,

लेकिन बिना कहे हमारी हर बात को समझने का हुनर भी बहन ही रखती है..

घर में जब कोई आपके साथ नहीं होता हैं,

भाई तब भी आपके साथ खड़ा होता हैं

दूसरे की बहन के बारे में इतना ही बोलो !!

जितना तुम अपनी बहन के बारे मे सुन सकते हो !!

बहन तुम्हारे लिए मेरी भावना कभी नही बदलेगी !!

तुम्हे आखरी सास तक आई लव यू कहूंगा !!

यह लम्हा कुछ खास है !!

बहन के हाथ में भाई का हाथ है !!

ओ बहन तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है !!

तेरे सूकुन के खातिर मेरी बहना !!

तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है !!

बात बात पर झगड़ा करती है लरती है !!!

नादान सी होती है बहन !!

दुआओ से भरपूर भगवान का स्वरूप होती है बहन !!!

बहुत चंचल,बहुत खुशनुमा सी होती है बहन !!

नाज़ुक सी दिल रखती है माशुम सी होती है बहन !!

भाई बहन का प्यार किसी रस्सी या धागे से कम नहीं होता !!

बल्कि दिलो के धागे से जुड़े रहना चाहिए !!

अक्सर रिश्ते दूरियों से फिके पर जाते है !!

पर भाई बहन का प्यार कभी कम नहीं होता !!

बहन की प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता !!

वो चाहे दूर भी हों तो गम नहीं होता !!

अरे बहन इतना सक मत किया कर !!

तेरा हू तेरा ही रहूंगा !!

और आई लव यू तुझे ही कहूंगा !!

ज़िन्दगी में दोस्त तो आते जाते रहते है !!

पर एक बहन ही होती है !!

जो ज़िन्दगी भर एक दोस्त की तरह साथ निभाती है !!

जब kúch गलती हो जाती थी, तो माँ–बाप से मुझे बचती थी।

माना bàhén तेरी–मेरी बनती नहीं पर तेरे बिना मेरी चलती bhi नहीं।

Ek ☝#bahen 👩का प्यार😍 किसी 👈भी # Bhài 🙎‍♂के लिए👈 सबसे 🤘बड़ी 💤#दौलत 💰हैं,

सब 👈#खर्च 👎हो जाता 👈हैं pàr ☝#प्यार 😘के वह 😊#ख़ज़ाने 💰याद 😊रहते hàiं…!

कितनी भाग्यशाली होगी यह bàhén ज़िसको विदा करते समय

भाईयों ने अपने हाथ बिछा दिये …

काश कि हर bàhén kó एसे  Bhài मिले …

हर  Bhài kó bàhén मिले ……

कोई bhi  ghàr🏚️ बिना बेटी के न रहे …

Bahen तो #वो hótí #है, जो कभी आप kó #अकेले Sélfié

लेने नही देती àúr इधर उधर से भाग # के Sélfié मै आ जाती hài..

#लोग पूछते hàiं इतने #गम😔 mé bhi #खुश 😊क्युँ हो..

मैने 💂🏻‍♀कहा #दुनिया🌍 साथ दे न दे.. मेरी💂🏻‍♀ #बहन👭 तो #साथ😎 hài..

याद आता hài अक्सर वो गुजरा हुआ जमाना,

तेरी मीठी आवाज mé  Bhài कहकर बुलाना,

वो सुबह स्कूल के लिए तेरा मुझको जगाना,

अब क्या करे बहना यही जिंदगी का तराना।

Dósti के माने हमसे क्यू पूछते हो

हम अभी इन बातो से अनजान hài

सिर्फ एक गुजारिश hài ki भूल ना जाना हममे

क्युकी आप ki दोस्ती ही हमारी जान hài

Yés! I’m नखरे वाली, क्यूंकि मेरे पास..

नखरे उठाने वाले Bhài जो hàiं !!

Bàhén का pyààr किसी dúà से कम nàhi होता वो चाहे दूर bhi हो तो कोई गम nàhi होता,

àksàr रिश्ते dúriyàn से फिके पड जाते hài, पर  bhài bàhén kàà pyààr कभी कम nàhi होता।

Wó bàchpàn ki शरारते, वो झूलों पे खेलना

वो माँ का डांटना, वो पापा का लाड-प्यार।

पर एक चीज़ àúr जो इन सब mé ख़ास hài

वो hài मेरी प्यारी bàhén का प्यार..।।।

Yé लम्हा kúch खास hài, Bàhén के हाथों mé  Bhài का हाथ hài,

ओ बहना तेरे लिए मेरे पास kúch ख़ास hài, तेरे सुकून ki खातिर मेरी बहना,

तेरा  Bhài हमेशा तेरे साथ hàiं..।।।।

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं | Happy Rakshabandhan

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा रक्षा बंधन कहलाता है. यह पवित्र पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो इस बार 26 अगस्त को होगा. इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं. राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप मैं अपने आँचल का टुकडा बांधा था. इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बाँधने की परंपरा शुरु हो गयी. ब्राहमणों द्वारा अपने यजमानो को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है. इस दिन वेदपाठी ब्राह्मण यजुर्वेद का पाठ आरम्भ करते हैं इसलिए इस दिन शिक्षा का आरम्भ करना अच्छा माना जाता है.

कैसे बांधे राखी

  • थाल में रोली, चन्दन, अक्षत, दही, रक्षासूत्र, और मिठाई रखें |
  • घी का एक दीपक भी रखें , जिससे भाई की आरती करें |
  • रक्षा सूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें |
  • इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं |
  • पहले भाई को तिलक लगायें ,फिर रक्षा सूत्र बांधें , फिर आरती करें |
  • फिर मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें |
  • रक्षासूत्र  बंधने के समय भाई तथा बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए |
  • रक्षा बंधवाने के बाद माता पिता और गुरु का आशीर्वाद लें तत्पश्चात बहन को सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें |
  • उपहार मैं ऐसी वस्तुऐ दे जो दोनों के लिए मंगलकारी हो,काले वस्त्र तथा तीखा या नमकीन खाद्य न दें |

रक्षाबंधन शायरी | Raksha Bandhan Quotes

कैसी हो राखी

रक्षासूत्र या राखी कैसी होनी चाहिए ?

  • रक्षासूत्र तीन धागों का होना चाहिए |
  • लाल पीला और सफ़ेद |
  • अन्यथा लाल और पीला धागा तो होना ही चाहिए |
  • रक्षासूत्र में चन्दन लगा हो तो बेहद शुभ होगा |
  • कुछ न होने पर कलावा भी श्रद्धा पूर्वक बांध सकते हैं |

अनुष्ठान

प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियाँ और महिलाएँ पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे भी होते हैं। लड़के और पुरुष तैयार होकर टीका करवाने के लिये पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधी जाती है और पैसों से न्यौछावर करके उन्हें गरीबों में बाँट दिया जाता है। भारत के अनेक प्रान्तों में भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियाँ लगाने की प्रथा भी है। भाई बहन को उपहार या धन देता है। इस प्रकार रक्षाबन्धन के अनुष्ठान को पूरा करने के बाद ही भोजन किया जाता है। प्रत्येक पर्व की तरह उपहारों और खाने-पीने के विशेष पकवानों का महत्त्व रक्षाबन्धन में भी होता है। आमतौर पर दोपहर का भोजन महत्त्वपूर्ण होता है और रक्षाबन्धन का अनुष्ठान पूरा होने तक बहनों द्वारा व्रत रखने की भी परम्परा है। पुरोहित तथा आचार्य सुबह-सुबह यजमानों के घर पहुँचकर उन्हें राखी बाँधते हैं और बदले में धन, वस्त्र और भोजन आदि प्राप्त करते हैं। यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्त्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फ़िल्में भी इससे अछूते नहीं हैं।

सामाजिक प्रसंग

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ब्राह्मण एवं क्षेत्रीय समुदाय में रक्षा बन्धन गुरू और भागिनेय के हाथ से बाँधा जाता है। लेकिन दक्षिण सीमा में रहने वाले भारतीय मूल के नेपाली भारतीयों की तरह बहन से राखी बँधवाते हैं।

इस दिन बहनें अपने भाई के दायें हाथ पर राखी बाँधकर उसके माथे पर तिलक करती हैं और उसकी दीर्घ आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देता है। ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बन्धन को मज़बूत करते है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और सुख-दुख में साथ रहने का विश्वास दिलाते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है।

सगे भाई बहन के अतिरिक्त अनेक भावनात्मक रिश्ते भी इस पर्व से बँधे होते हैं जो धर्म, जाति और देश की सीमाओं से परे हैं। रक्षाबन्धन का पर्व भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के निवास पर भी मनाया जाता है। जहाँ छोटे छोटे बच्चे जाकर उन्हें राखी बाँधते हैं। रक्षाबन्धन आत्मीयता और स्नेह के बन्धन से रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का पर्व है। यही कारण है कि इस अवसर पर न केवल बहन भाई को ही अपितु अन्य सम्बन्धों में भी रक्षा (या राखी) बाँधने का प्रचलन है। गुरु शिष्य को रक्षासूत्र बाँधता है तो शिष्य गुरु को। भारत में प्राचीन काल में जब स्नातक अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात गुरुकुल से विदा लेता था तो वह आचार्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उसे रक्षासूत्र बाँधता था जबकि आचार्य अपने विद्यार्थी को इस कामना के साथ रक्षासूत्र बाँधता था कि उसने जो ज्ञान प्राप्त किया है वह अपने भावी जीवन में उसका समुचित ढंग से प्रयोग करे ताकि वह अपने ज्ञान के साथ-साथ आचार्य की गरिमा की रक्षा करने में भी सफल हो। इसी परम्परा के अनुरूप आज भी किसी धार्मिक विधि विधान से पूर्व पुरोहित यजमान को रक्षासूत्र बाँधता है और यजमान पुरोहित को। इस प्रकार दोनों एक दूसरे के सम्मान की रक्षा करने के लिये परस्पर एक दूसरे को अपने बन्धन में बाँधते हैं।

रक्षाबन्धन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है। विवाह के बाद बहन पराये घर में चली जाती है। इस बहाने प्रतिवर्ष अपने सगे ही नहीं अपितु दूरदराज के रिश्तों के भाइयों तक को उनके घर जाकर राखी बाँधती है और इस प्रकार अपने रिश्तों का नवीनीकरण करती रहती है। दो परिवारों का और कुलों का पारस्परिक योग (मिलन) होता है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी एकसूत्रता के रूप में इस पर्व का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार जो कड़ी टूट गयी है उसे फिर से जागृत किया जा सकता है।

रक्षाबन्धन के अवसर पर कुछ विशेष पकवान भी बनाये जाते हैं जैसे घेवर, शकरपारे, नमकपारे और घुघनी। घेवर सावन का विशेष मिष्ठान्न है यह केवल हलवाई ही बनाते हैं जबकि शकरपारे और नमकपारे आमतौर पर घर में ही बनाये जाते हैं। घुघनी बनाने के लिये काले चने को उबालकर चटपटा छौंका जाता है। इसको पूरी और दही के साथ खाते हैं। हलवा और खीर भी इस पर्व के लोकप्रिय पकवान हैं।

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में रक्षा बन्धन पर्व की भूमिका

 भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में जन जागरण के लिये भी इस पर्व का सहारा लिया गया। श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने बंग-भंग का विरोध करते समय रक्षाबन्धन त्यौहार को बंगाल निवासियों के पारस्परिक भाईचारे तथा एकता का प्रतीक बनाकर इस त्यौहार का राजनीतिक उपयोग आरम्भ किया। 1905 में उनकी प्रसिद्ध कविता “मातृभूमि वन्दना” का प्रकाशन हुआ जिसमें वे लिखते हैं-

            “हे प्रभु! मेरे बंगदेश की धरती, नदियाँ, वायु, फूल – सब पावन हों;

            है प्रभु! मेरे बंगदेश के, प्रत्येक भाई बहन के उर अन्तःस्थल, अविछन्न, अविभक्त एवं एक हों।”

 सन् 1905 में लॉर्ड कर्ज़न ने बंग भंग करके वन्दे मातरम् के आन्दोलन से भड़की एक छोटी सी चिंगारी को शोलों में बदल दिया। 16 अक्टूबर 1905 को बंग भंग की नियत घोषणा के दिन रक्षा बन्धन की योजना साकार हुई और लोगबाग गंगा स्नान करके सड़कों पर यह कहते हुए उतर आये-

            “सप्त कोटि लोकेर करुण क्रन्दन, सुनेना सुनिल कर्ज़न दुर्जन;

            ताइ निते प्रतिशोध मनेर मतन करिल, आमि स्वजने राखी बन्धन।”

धार्मिक प्रसंग

  उत्तरांचल में इसे श्रावणी कहते हैं। इस दिन यजुर्वेदी द्विजों का उपकर्म होता है। उत्सर्जन, स्नान-विधि, ॠषि-तर्पणादि करके नवीन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। ब्राह्मणों का यह सर्वोपरि त्यौहार माना जाता है। वृत्तिवान् ब्राह्मण अपने यजमानों को यज्ञोपवीत तथा राखी देकर दक्षिणा लेते हैं।

अमरनाथ की अतिविख्यात धार्मिक यात्रा गुरु पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर रक्षाबन्धन के दिन सम्पूर्ण होती है। कहते हैं इसी दिन यहाँ का हिमानी शिवलिंग भी अपने पूर्ण आकार को प्राप्त होता है। इस उपलक्ष्य में इस दिन अमरनाथ गुफा में प्रत्येक वर्ष मेले का आयोजन भी होता है।

महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से विख्यात है। इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। इस अवसर पर समुद्र के स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये नारियल अर्पित करने की परम्परा भी है। यही कारण है कि इस एक दिन के लिये मुंबई के समुद्र तट नारियल के फलों से भर जाते हैं।

राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बाँधने का रिवाज़ है। रामराखी सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुँदना लगा होता है। यह केवल भगवान को ही बाँधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूड़ियों में बाँधी जाती है। जोधपुर में राखी के दिन केवल राखी ही नहीं बाँधी जाती, बल्कि दोपहर में पद्मसर और मिनकानाडी पर गोबर, मिट्टी और भस्मी से स्नान कर शरीर को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद धर्म तथा वेदों के प्रवचनकर्त्ता अरुंधती, गणपति, दुर्गा, गोभिला तथा सप्तर्षियों के दर्भ के चट (पूजास्थल) बनाकर उनकी मन्त्रोच्चारण के साथ पूजा की जाती हैं। उनका तर्पण कर पितृॠण चुकाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद घर आकर हवन किया जाता है, वहीं रेशमी डोरे से राखी बनायी जाती है। राखी को कच्चे दूध से अभिमन्त्रित करते हैं और इसके बाद ही भोजन करने का प्रावधान है।

तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और उड़ीसा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इस पर्व को अवनि अवित्तम कहते हैं। यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मणों के लिये यह दिन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इस दिन नदी या समुद्र के तट पर स्नान करने के बाद ऋषियों का तर्पण कर नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। गये वर्ष के पुराने पापों को पुराने यज्ञोपवीत की भाँति त्याग देने और स्वच्छ नवीन यज्ञोपवीत की भाँति नया जीवन प्रारम्भ करने की प्रतिज्ञा ली जाती है। इस दिन यजुर्वेदीय ब्राह्मण 6 महीनों के लिये वेद का अध्ययन प्रारम्भ करते हैं। इस पर्व का एक नाम उपक्रमण भी है जिसका अर्थ है- नयी शुरुआत। व्रज में हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) से श्रावणी पूर्णिमा तक समस्त मन्दिरों एवं घरों में ठाकुर झूले में विराजमान होते हैं। रक्षाबन्धन वाले दिन झूलन-दर्शन समाप्त होते हैं।

राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।

पौराणिक प्रसंग

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। कथा कुछ इस प्रकार है- दानवेन्द्र राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयत्न किया तो इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर राजा बलि से भिक्षा माँगने पहुँचे। गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग में सारा आकाश पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकनाचूर कर देने के कारण यह त्योहार बलेव नाम से भी प्रसिद्ध है। कहते हैं एक बार बाली रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया। भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति भगवान बलि को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। विष्णु पुराण के एक प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर वेदों को ब्रह्मा के लिये फिर से प्राप्त किया था। हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ऐतिहासिक प्रसंग

राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बाँधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आयेगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं, मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की। एक अन्य प्रसंगानुसार सिकन्दर की पत्नी ने अपने पति के हिन्दू शत्रु पुरूवास को राखी बाँधकर अपना मुँहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बँधी राखी और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकन्दर को जीवन-दान दिया।

महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि जब ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। इस समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बाँधने के कई उल्लेख मिलते हैं। महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तान्त भी मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व में यहीं से प्रारम्भ हुई।

साहित्यिक प्रसंग

अनेक साहित्यिक ग्रन्थ ऐसे हैं जिनमें रक्षाबन्धन के पर्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण है हरिकृष्ण प्रेमी का ऐतिहासिक नाटक रक्षाबन्धन जिसका 1991 में 18वाँ संस्करण प्रकाशित हो चुका है। मराठी में शिन्दे साम्राज्य के विषय में लिखते हुए रामराव सुभानराव बर्गे ने भी एक नाटक की रचना की जिसका शीर्षक है राखी ऊर्फ रक्षाबन्धन। पचास और साठ के दशक में रक्षाबन्धन हिंदी फ़िल्मों का लोकप्रिय विषय बना रहा। ना सिर्फ़ “राखी” नाम से बल्कि “रक्षाबन्धन” नाम से भी कई फ़िल्में बनायीं गयीं। *राखी* नाम से दो बार फ़िल्‍म बनी, एक बार सन 1949 में, दूसरी बार सन 1962 में, सन 62 में आई फ़िल्‍म को ए. भीमसिंह ने बनाया था, कलाकार थे अशोक कुमार, वहीदा रहमान, प्रदीप कुमार और अमिता। इस फ़िल्‍म में राजेंद्र कृष्‍ण ने शीर्षक गीत लिखा था- “राखी धागों का त्‍यौहार”। सन 1972 में एस.एम.सागर ने फ़िल्‍म बनायी थी “राखी और हथकड़ी” इसमें आर.डी.बर्मन का संगीत था। सन 1976 में राधाकान्त शर्मा ने फ़िल्‍म बनाई “राखी और राइफल”। दारा सिंह के अभिनय वाली यह एक मसाला फ़िल्‍म थी। इसी तरह से सन 1976 में ही शान्तिलाल सोनी ने सचिन और सारिका को लेकर एक फ़िल्‍म “रक्षाबन्धन” नाम की भी बनायी थी।

रक्षाबंधन शायरी | Raksha Bandhan Quotes

  1. बहन का प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता
    वो चाहे दूर भी हो तो गम नहीं होता
    अक्सर रिश्ते दूरियों से फीके पड़ जाते है
    पर बहन भाई का प्यार कभी कम नहीं होता

2. ओस की बूंदों से भी प्यारी है, मेरी बहना
गुलाब की पंखुड़ियों से भी नाज़ुक है, मेरी बहना
आसमां से उतारी कोई राजकुमारी है, मेरी बहना
सच कहूँ तो मेरी आँखों की राजदुलारी है, मेरी बहना

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं | Happy Rakshabandhan

3. वो बचपन की शरारते, वो झूलों पे खेलना
वो माँ का डांटना, वो पापा का लाड-प्यार
पर एक चीज़ और जो इन सब में ख़ास है
वो है मेरी प्यारी बहन का प्यार

4. बहनों को भाइयों का साथ मुबारक हो
भाइयों की कलाइयों को बहनों का प्यार मुबारक हो
रहे ये सुख हमेशा आपकी जिन्दगीं में
आप सबको राखी का पावन त्यौहार मुबारक हो

5. बहन चाहे सिर्फ प्यार दुलार
नही मांगती बड़े उपहार
रिश्ता बना रहे सदियों तक
मिले भाई को खुशियाँ हज़ार
राखी की ढेर सारी शुभ कामनाएँ

6. कच्चे धागों से बनी पक्की डोर हैं राखी
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ हैं राखी
भाई की लम्बी उम्र की दुआ हैं राखी
बहन के प्यार का पवित्र धुआं हैं राखी

7. सावन के महीने में राखी का त्यौहार आता हैं
परिवार के लिए जो कि ढेरों खुशियाँ लाता हैं
रक्षाबन्धन के पर्व की कुछ अलग ही बात हैं
भाई-बहन के लिए पावन प्रेम की सौगात हैं

8. रेशम के धागों का है यह मजबूत बंधन
माथे पर चमके चावल रोली और चन्दन
प्यार से मिठाई खिलाये बहन प्यारी
देख इसे छलक उठीं आँखों भर आया मन

9. रिश्तों में रुपयों का दखल अब आये न
क्या दिया क्या पाया मन न भरमाये
प्यार से बड़ा जग में और कुछ नहीं है होता
बहना को भाई और बहन को ना कभी भुलाये

9. हमारी खूबियों को अच्छे से जानती है, बहनें
हमारी कमियों को भी पहचानती है, बहनें
फिर भी हमें सबसे ज्यादा मानती है, बहनें
रक्षाबंधन की शुभकामनायें

10. रिश्ता है यह सबसे अलग और सादा
बहन बांधे राखी, भाई करे वादा
बहन और भाई का प्यार है बहुत सच्चा
इसी लिए माना जाता है यह रिश्ता सबसे अच्छा

11. खुश किस्मत होती है वो बहन
जिसके सर पर भाई का हाथ होता है
लडना झगडना फिर प्यार से मनाना
तभी तो यह रिश्ता इतना प्यार होता है

12. अपनी दुआओं में जो, उसका ज़िकर करता है,
वो भाई है जो ख़ुद से पहले, बहन की फ़िकर करता है
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें!

13. किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा,
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा?
रक्षा बंधन की शुभ कामनाएँ!

14. जन्मों का ये बंधन है,
स्नेह और विश्वास का..
और भी गहरा हो जाता है ये रिश्ता..
जब बंधता है धागा रक्षाबंधन के प्यार का…
रक्षा बंधन की शुभ कामनाएं

15. रक्षा बंधन पर कर रही बहनें इंतज़ार
सीमा पर बैठा हुआ है भाई, भेजा हुआ है तार
भारत माँ की सेवा में छूटा हर त्यौहार…
रक्षा बंधन की शुभ कामनाएँ!

16. किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा,
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा?
रक्षा बंधन की शुभ कामनाएँ!

17. बहन का प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता,
वो चाहे कितनी भी दूर हो पर प्यार कम नहीं होता।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

18. विश्वास का धागा, प्यार का धागा,
खुशियों का धागा, यादों का धागा,
दोस्ती का धागा, मन का धागा,
भाई की कलाई पर बहन ने प्रेम से बांधा।
रक्षाबंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

19. रेशम के धागों का है यह मजबूत बंधन,
माथे पर चमके चावल रोली और चंदन,
प्यार से मिठाई खिलाये बहन प्यारी,
देखी से भर आया भाई का मन।