क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण और क्यों है जरूरी

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया जाता है कि वर्ष के दौरान विकास की प्रवृत्ति क्या रही? किन-किन योजनाओं को अमल में लाया और इनके क्या-क्या संभावित परिणाम सामने आने वाले हैं। इस तरह के सभी पहलुओं पर सूचना दिए जाने के साथ अर्थव्यवस्था, पूर्वानुमान और नीतिगत स्तर पर चुनौतियों संबंधी विस्तृत सूचनाओं को भी इसमें स्थान दिया जाता है।

इसमें अर्थव्यवस्था के क्षेत्रवार हालातों की रूपरेखा और सुधार के उपायों के बारे में बताया जाता है। मोटे तौर पर, यह सर्वेक्षण भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक दृष्टिकोण का काम करता है। विस्तृत आर्थिक स्थिति में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि किन क्षेत्रों पर सरकार को ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यह सर्वेक्षण केवल सिफारिशें हैं और इन्हें लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है और इस कारण से सरकार इन्हें केवल निर्देशात्मक रूप से लेती है।
आर्थिक सर्वेक्षण मुख्य आर्थिक सलाहकार के साथ वित्त और आर्थिक मामलों की जानकारों की टीम तैयार करती है। इस बार मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रहमण्यम ने आर्थिक सर्वे वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपा है और यह जानकारी भी दी गई कि इस बार का सर्वेक्षण तैयार करने में महिला अधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई है।

बॉन्ड क्या है | What is Bond

बांड एक निश्चित आय की तरह होता है जिसमे निवेशक किसी कंपनी या सरकार को निश्चित समय के लिए ऋण देता है इसमें ब्याज की दर फ़िक्स होती है या एक तय फॉर्मूले के आधार पर बदल भी सकती है। जिस प्रकार आप शेयर खरीद कर किसी भी कंपनी में हिस्सेदारी लेते है ठीक उसी प्रकार बांड खरीदकर आप बांड बेचने वाले को उधार देते है जिसके बदले में वह आपको निश्चित ब्याज देता है। बांड के द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और कंपनियां अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा एकत्रित करती है। बांड का हिंदी में अर्थ प्रतिभूति या ऋणपत्र होता है अर्थात ऋण आदि से संबंधित सरकारी कागज।

बांड के प्रकार | Types of Bond

वर्तमान में बांड मार्केट का वित्तीय क्षेत्र में अत्यंत महत्पूर्ण स्थान है। बांड को अच्छी तरह से समझने के लिए Bond Ke Prakar जानना बहुत ही आवश्यक है। वैसे तो Types Of Bonds In India बहुत प्रकार के है, जिनकी अलग-अलग अवधि तथा ब्याज दर है। कुछ प्रमुख बांड के प्रकार नीचे प्रदर्शित है-

Government Bond

बांड के प्रकार में सबसे पहले आता है “सरकारी बांड”। सरकारी बांड को ट्रेज़री बांड भी कहा जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बांड है जो आमतौर पर कूपन अवधि नामक ब्याज द्वारा मूल्य चुकाने पर आधारित होता है। यह सबसे कम ब्याज दर वाला तथा सबसे सुरक्षित बांड है। यह सरकार के पूर्ण विश्वास और क्रेडिट द्वारा समर्थित है इसलिए इसे कुछ प्रमुख OECD देशों में जोखिम मुक्त बांड भी कहा जाता है।

Corporate Bonds

Corporate Bonds बड़े वित्तीय निगम और वित्तीय संस्थान द्वारा जारी किया जाता है। इसमें ऑनगोइंग ऑपरेशन, M&A तथा व्यवसाय के विस्तार के लिए फाइनेंस को बढ़ाया जाता है। कॉर्पोरेट बांड अधिक रिटर्न देते है, परन्तु इसमें जोखिम भी बहुत अधिक होता है। इसकी अवधि लगभग 12 साल तक हो सकती है और किसी भी पैसे का निवेश करने से पहले कंपनी की जांच कर लेना चाहिए कि कहीं वो कंपनी फर्जी तो नहीं है।

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Municipal Bond

म्युनिसिपल बांड स्थानीय क्षेत्र की सरकार या उन्ही की किसी एजेंसी द्वारा जारी किया जाता है इसे म्युनि बांड के नाम से भी जानते है। SEBI के अनुसार, नगरपालिका बांड को जनता को जारी किए जाने से पहले 3 साल की परिपक्वता अवधि की आवश्यकता होती है। इन बांडों को एक सुरक्षित निवेश विकल्प भी माना जाता है क्योंकि म्युनिसिपल बांड राज्य सरकार द्वारा समर्थित होते है।

High-Yield Bond


यह एक ऐसा बांड है जिसे फाइनेंस में निवेश ग्रेड से नीचे रखा गया है और इसी कारण इसे High-yield Bond के नाम जाना जाता है। ये बॉन्ड उन कंपनियों द्वारा जारी किए जाते है, जिन्होंने बाजार में नया प्रवेश किया होता है तथा जिनका बाजार में खुद को स्थापित करना बाकी रहता है। ये बॉन्ड ज्यादा रिटर्न प्रदान करते है, लेकिन इनमें जोखिम भी बहुत होता है। जो निवेशक उच्च जोखिम लेना पसंद करते है यह बांड उनके लिए एक बहुत अच्छा विकल्प है।

Government Bonds

बांड के प्रकार में सबसे पहले आता है “सरकारी बांड”। सरकारी बांड को ट्रेज़री बांड भी कहा जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बांड है जो आमतौर पर कूपन अवधि नामक ब्याज द्वारा मूल्य चुकाने पर आधारित होता है। यह सबसे कम ब्याज दर वाला तथा सबसे सुरक्षित बांड है। यह सरकार के पूर्ण विश्वास और क्रेडिट द्वारा समर्थित है इसलिए इसे कुछ प्रमुख OECD देशों में जोखिम मुक्त बांड भी कहा जाता है।

Corporate Bonds

Corporate Bonds बड़े वित्तीय निगम और वित्तीय संस्थान द्वारा जारी किया जाता है। इसमें ऑनगोइंग ऑपरेशन, M&A तथा व्यवसाय के विस्तार के लिए फाइनेंस को बढ़ाया जाता है। कॉर्पोरेट बांड अधिक रिटर्न देते है, परन्तु इसमें जोखिम भी बहुत अधिक होता है। इसकी अवधि लगभग 12 साल तक हो सकती है और किसी भी पैसे का निवेश करने से पहले कंपनी की जांच कर लेना चाहिए कि कहीं वो कंपनी फर्जी तो नहीं है।

Municipal Bonds

म्युनिसिपल बांड स्थानीय क्षेत्र की सरकार या उन्ही की किसी एजेंसी द्वारा जारी किया जाता है इसे म्युनि बांड के नाम से भी जानते है। SEBI के अनुसार, नगरपालिका बांड को जनता को जारी किए जाने से पहले 3 साल की परिपक्वता अवधि की आवश्यकता होती है। इन बांडों को एक सुरक्षित निवेश विकल्प भी माना जाता है क्योंकि म्युनिसिपल बांड राज्य सरकार द्वारा समर्थित होते है।

High-Yield Bonds

यह एक ऐसा बांड है जिसे फाइनेंस में निवेश ग्रेड से नीचे रखा गया है और इसी कारण इसे High-yield Bond के नाम जाना जाता है। ये बॉन्ड उन कंपनियों द्वारा जारी किए जाते है, जिन्होंने बाजार में नया प्रवेश किया होता है तथा जिनका बाजार में खुद को स्थापित करना बाकी रहता है। ये बॉन्ड ज्यादा रिटर्न प्रदान करते है, लेकिन इनमें जोखिम भी बहुत होता है। जो निवेशक उच्च जोखिम लेना पसंद करते है यह बांड उनके लिए एक बहुत अच्छा विकल्प है।

फेस वैल्यू क्या है

बॉन्ड (bonds) की फेस वैल्यू वह वैल्यू होती है जिसे बॉन्ड जारी करने वाली निगम या कंपनी के द्वारा बॉन्ड धारक को बॉन्ड की परिपक्वता पर चुकाया जाता है। कर एक कंपनी ये निगम के अनुसार उनके बॉन्ड की फेस वैल्यू भी भिन्न भिन्न होती है। सामान्यतः नया जारी किया गया बॉन्ड उसकी फेस वैल्यू पर बिकता है पर कभी कभी ये उसकी फेस वैल्यू से कम या ज्यादा दरों पर भी बिक सकता है। अगर बॉन्ड की दर उसकी फेस वैल्यू से अधिक है तो उसे प्रीमियम बिक्री कहते है और अगर काम है तो उसे सममूल्य व्यापार कहते है।

बॉन्ड परिपक्वता अवधि

बॉन्ड परिवक्ता अवधि की निश्चित नहीं किया जा सजता है इसकी अधिकतम अवधि तो निश्चित रहती है पर कंपनी या निकाय बॉन्ड का पूर्ण भुक्तं करके बॉन्ड को कभी भी वापस ले सकती है। इसी कारण बॉन्ड की परिपक्ता अवधि हर दिन के अनुसार बदलती है।

भारत में बॉन्ड बाजार

भारत में बॉन्ड बाजार को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

  • मुख्य बाज़ार
  • समर्थक बाजार

मुख्य बाज़ार

मुख्य बाजार में, जिन्हे धन उधार लेने की आवश्यकता होती है, वे अपने बांड खरीदने के लिए आम जनता या निवेश बैंकों को आमंत्रित करते है। इसमें बांड पहले से निर्धारित ब्याज दर पर एक निश्चित कार्यकाल के लिए जारी किए जाते हैं।

समर्थक बाजार

समर्थक बाजार में, जिन निवेशकों ने पहले मुख्य बाजार में बांड ख़रीदे थे, वे दूसरे निवेशकों को अपने बांड बेचते है। बहुत सारे ब्रोकर समर्थक बाजार में काम करते है जो इस प्रकार के लेन-देन की सुविधा प्रदान करते है।

आर्थिक सर्वेक्षण | Economic Survey 2021

किसी भी देश की तरक्की और विकास के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत होना बेहद आवश्यक होता है। किसी देश की अर्थव्यवस्था की दसा और यह किसी तरह से आगे बढ़ रही है यह जानने का माध्यम है आर्थिक समीक्षा।
आर्थिक समीक्षा के माध्यम से देश की सरकार देश के अलग-अलग क्षेत्रों के उपलब्धियों और चुनौतियों को संसद के माध्यम से देश के सामने रखती है। आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले साल की आर्थिक स्थिति की समीक्षा के साथ साथ आगामी वर्ष की अर्थव्यवस्था की स्थिति का वर्णन होता है।


आर्थिक समीक्षा बजट पेश होने से एक दिन पहले संसद के दोनों सदनों में पेश की जाती है। आर्थिक समीक्षा में देश के कृषि, औधोगिक उत्पादन,आयात-निर्यात, रोजगार, विदेशी मुद्रा भंडार और अन्य संबंधित आर्थिक मुद्दों के विकास को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई जाती है।
सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने या सर्वेक्षण की सिफारिशों का पालन करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य नहीं है. यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि वह दस्तावेज में सूचीबद्ध सुझावों को चुनना या अस्वीकार करना चाहती है या नहीं. यहां तक कि केंद्र सर्वेक्षण प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं है।

सामाजिक समस्याओं की विशेषताएं | Features of social problems


आर्थिक सर्वेक्षण मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनकी टीम तैयार करती है।
यह वित्त मंत्रालय का काफी महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है ।
यह जानना दिलचस्प है कि पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में प्रस्तुत किया गया था. 1964 तक, बजट के समय ही यह दस्तावेज़ जारी किया जाता था.


वर्ष 2015 से आर्थिक सर्वेक्षण दो खंडों में प्रस्तुत किया जाता है।
वॉल्यूम 1 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के अनुसंधान और विश्लेषण को केंद्रित किया जाता है, जबकि वॉल्यूम 2 में वित्तीय वर्ष की एक विस्तृत समीक्षा होती है, जो अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है।

Economic Survey 2021

A strong economy is essential for the growth and development of any country. Economic review is the means of knowing the extent of the economy of a country and how it is progressing in some way.


Through the economic review, the government of the country keeps the achievements and challenges of different areas of the country in front of the country through the Parliament. The Economic Survey describes the state of the economy of the coming year along with a review of the economic condition of the previous year.


The Economic Review is presented in both the Houses of Parliament a day before the presentation of the Budget. In the Economic Survey, the policy is made to promote the development of the country’s agriculture, industrial production, import-export, employment, foreign exchange reserves, and other related economic issues.


The government is not constitutionally bound to present the Economic Survey or to follow the recommendations of the survey. It is entirely up to the government whether it wants to choose or reject the suggestions listed in the document. Even the Center is not bound to submit the survey.


The Economic Survey is prepared by the Chief Economic Adviser and his team.
This is a very important document of the Ministry of Finance.
It is interesting to know that the first Economic Survey was presented in 1950-51. Till 1964, this document was issued only at the time of the budget.
Since 2015, the Economic Survey is presented in two volumes.
Volume 1 focuses on research and analysis of the challenges facing the Indian economy, while Volume 2 contains a detailed review of the financial year, covering all major sectors of the economy.