नई दिल्ली : भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने गुरुवार को ट्वीट कर सवाल उठाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैंकों को यह निर्देश क्यों नहीं देते कि वो मेरा पैसा लौटाने का प्रस्ताव स्वीकार करें। ताकि, जनता की उस रकम की रिकवरी हो सके जो किंगफिशर को लोन के तौर पर दी गई थी। माल्या ने गुरुवार को एक के बाद एक 4 ट्वीट किए। उसने संसद में प्रधानमंत्री मोदी के बुधवार के भाषण का जिक्र किया है। माल्या का कहना है कि मोदी प्रखर वक्ता हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि एक व्यक्ति 9 हजार करोड़ रुपए लेकर भाग गया। उन्होंने मीडिया को यह मुद्दा दिया। मैं समझता हूं कि उनका इशारा मेरी तरफ ही था। माल्या ने दोहराया कि उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था। इसे नकारा नहीं जा सकता। यह गंभीर और ईमानदार कोशिश थी। गेंद अब दूसरे पाले में है। किंगफिशर को दी गई रकम बैंक वापस क्यों नहीं ले रहे। बता दें कि माल्या अपने बचाव में जो भी कहना चाहते हैं वह ट्विट के माध्यम से कहते हैं।

क्या है मामला?
मालूम हो कि किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख माल्या को 9 हजार करोड़ रुपए की रकम की धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में आरोपित हैं। इससे पहले जून 2018 में माल्या ने ट्विटर पर पत्र जारी किया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को न्याय की मांग की थी। ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जावीद पहले ही शराब कारोबारी विजय माल्या को करारा झटका देते हुए उन्हें भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दे चुके हैं। माल्या दिसंबर में ब्रिटेन की एक अदालत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी चुनौती हार चुका था। उन पर भारत में करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का केस चल रहा है। अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड की ओर से तामील कराए गए प्रत्यर्पण वॉरंट पर माल्या जमानत पर है।