वॉशिंगटन: नासा के खास रोवर अपॉर्च्यूनिटी ने लाल ग्रह पर 15 साल कर सफर पूरा कर लिया हैं। नासा ने बुधवार को बताया कि यह खुशी की बात है, 2004 में इसे सिर्फ तीन महीने के अभियान पर और लाल ग्रह की सतह पर एक किलोमीटर का सफर तय करने के लिए भेजा गया था, लेकिन इसने 15 साल तक सेवाएं दीं।

रेतीले तूफान में हुआ निष्क्रिय
वैज्ञानिकों ने बताया कि मंगल पर पिछले साल जून में रेतीला तूफान आया था। इससे अपॉर्च्यूनिटी के ट्रांसमिशन पर बुरा असर पड़ा। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्रिडेंस्टाइन ने ट्वीट कर बताया कि रोवर से संपर्क साधने के 800 से अधिक प्रयास किए गए। मंगल की सतह पर हाल में 15 वर्ष पूरे करने वाला नासा का ऑपरच्यूनिटी रोवर 7 महीने पहले लाल ग्रह पर आए तूफान के कारण संभवत: निष्क्रिय हो गया है और इस वजह से सौर संचालित रोवर से संपर्क टूट गया है। यह आठ महीने से शांत पड़ा था।

सूर्य की रोशनी नहीं मिली
मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर जॉन कल्लास ने कहा कि रोवर को गुडबाय कहना दुखद है, लेकिन हमें याद रखना होगा कि यह 15 सालों का अविश्वसनीय एडवेंचर रहा। मंगल की सतह पर हाल में 15 वर्ष पूरे करने वाला नासा का ऑपरच्यूनिटी रोवर 7 महीने पहले लाल ग्रह पर आए तूफान के कारण मंगल ग्रह पर परसेवरेंस वैली में सौर संचालित ऑपरच्यूनिटी रोवर के ठहराव स्थल के ऊपर धूल छाने के कारण रोवर को सूर्य की रोशनी नहीं मिल सकी थी जिसकी वजह से उसकी बैटरियां चार्ज नहीं हो पाई थीं।

10 जून से संपर्क नहीं हो पा रहा था
रोवर से पिछले साल 10 जून से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि तूफान समाप्त होने और आसमान साफ होने के बाद मिशन की टीम ने रोवर से बार बार संपर्क स्थापित करने की कोशिश की लेकिन रोवर बंद पड़ा रहा। रोवर को महज 90 दिन और 1.006 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लाल ग्रह पर भेजा गया था लेकिन यह रोवर अब तक न सिर्फ 45 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है बल्कि 5 हजार दिन भी पूरे कर लिए हैं। नासा का ही क्यूरोसिटी रोवर भी मंगल ग्रह के वातावरण और सतह की जांच कर रहा है। हाल ही में इस रोवर ने मंगल की चट्टानों के कुछ नमूने इकट्ठा किए थे और इनका परीक्षण भी किया था।