नई दिल्ली : आज हमारी पवित्र नदियां चाहे वह गंगा हो या यमुना हो भयावह स्‍थिति में है सभी नदियां प्रदूषण से ग्रस्‍त हो गयी है। ये पवित्र नदी जो हमारे संस्‍कृति का प्रतीक है हजारों सालों से हमारे जीवन और मरण से जुड़ी है। ये हमारे लिए नदी न होकर मां के समान है। जहां हमे इन्‍हें संरक्षण देनी चाहिए वही हम अपनी भौतिकवादी दौड़ में इन पवित्र नदियाें को इतना गंदा कर दिया है कि आज ये नाले का रूप ले चुकी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (एनजीटी) द्वार नदियों को स्थिति पर अध्ययन के लिए बनाए गए पैनल ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि नदी को बचाने के लिए फिल्म और टीवी कलाकारों की मदद लेनी होगी। एनजीटी को दी रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना में जहरीले तत्व बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।

इन पर रोक लगाने के लिए जरूरी है कि दिल्ली-एनसीआर में गुजरात के सूरत की तर्ज पर मूर्ति विसर्जन के लिए योजना बनाई जाए। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस एके गोयल को दी रिपोर्ट में कहा गया है कि फिल्म और टीवी स्टार्स के जरिए लोगों को बताया जाए कि वे मिट्‌टी की ऐसी मूर्तियों का इस्तेमाल करें, जिन पर पेंट न हो। टीवी और रेडियो पर योजनाबद्ध तरीके से जागरूकता अभियान चलाया जाए। पैनल ने कहा है कि सरकार को कृत्रिम तालाब तैयार करने चाहिए। इन जगहों पर ही मूर्ति विसर्जन का काम होना चाहिए। पैनल ने कहा कि – गुजरात के सूरत में स्थित ताप्ती नदी में मूर्ति विसर्जन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। लोगों पर नजर रखने के लिए सरकार ने सूरत में चार हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। वहां आठ हजार पुलिस के जवान, 3250 होमगार्ड, स्टेट रिजर्व पुलिस की आठ कंपनियों के साथ बीएसएफ और आरएएफ के जवान लोगों को नदी में मूर्तियां प्रवाहित करने से रोक रहे हैं। पैनल ने सूरत के पुलिस कमिश्नर से मूर्ति विसर्जन के लिए बनाई योजना की रिपोर्ट मंगाई थी। इसमें कहा गया है कि ताप्ती में एक भी मूर्ति का विसर्जन नहीं करने दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर बनाए तालाब व गड्‌ढों में ही मूर्ति विसर्जन की अनुमति दी गई है। कमिश्नर ने रिपोर्ट में कहा है कि इस साल 60 हजार मूर्तियां इन तालाबों और गड्‌ढों में विसर्जित की गई थीं। सीपीसीबीसीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने कहा है कि लोग पेंट की गई मूर्तियों के साथ धातु से बने आभूषणों को यमुना में प्रवाहित कर रहे हैं। मानकों के मुताबिक पानी में क्रोमियम की मात्रा .05 और आयरन की मात्रा .3 मिली ग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। मूर्ति विसर्जन के बाद जुटाई गई रिपोर्ट कहती है कि इससे यमुना के पानी में क्रोमियम की मात्रा 11 गुना, लौह तत्वों की मात्रा 71 गुना तक गुना बढ़ गई।