नई दिल्ली. कोनोला एक पौधा है जो ब्रासिका फैमली का होता है और इसके बीज से कैनोला ऑयल बनता है। बाल से लेकर स्किन और दिल से लेकर कैंसर तक के खतरे इस तेल से कम होते हैं। कैनोला ऑयल में सेचुरेटेड फैट बहुत कम होता है यानी ये अनसेच्युरेटेड फैट है। हालांकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत अच्छी मात्रा में होता है।

कई मामलों में जहां कैनोला ऑयल औषधिय के रूप में काम करता है। वहीं, कुछ जगहों पर इसका यूज करना खतरनाक भी हो जाता है। ये तेल खतरनाक तब बनता है जब आप किसी खास रोग से ग्रस्त हों। इसलिए कनौला ऑयल यूज करना हेल्दी है, लेकिन ये जानना भी जरूरी है कि किस रोग में ये ऑयल बिलकुल यूज न करें। इसलिए आपके लिए ये जरूरी हो जाता है कि कैनोला ऑयल के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखें और इसे फायदे के साथ नुकसान भी जानें।

कैनोला तेल के फायदे

कैनोला ऑयल में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, संतृप्‍त वसा, एंटीआक्सीडेंट गुण, एंटी-इंफ्लामैट्री होता है।
कैनोला ऑयल इसलिए फायदेमंद है क्योंकि इसमें सेच्युरेटेड फैट नहीं होता और इसमें ट्रांस-वसा या कोलेस्‍ट्रोल नहीं होता है।
ये कोरोनरी बीमारी के खतरों को कम करने वाला है। इसके साथ इसमें ओमेगा-6 फैटी एसिड है जो मस्तिष्क विकास के लिए अच्छा है।
इसमें पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड स्ट्रोक और दिल के दौरे से बचाते हैं।
ये तेल मेटाबॉलिक रेट बढ़ाता है जिससे वेट लॉस या वेट मैनेजमेंट सही रहता है।
शरीर में कोलेस्ट्रॉल के एब्जॉबर्शन से बचाता है।
इसमें विटामिन ई होता है जो स्किन के लिए अच्छा होता है।
गठिया रोग में होने वाले सूजन को ये ऑयल कम करता है। साथ ही अस्थमा और बॉउल डिसऑडर से होने वाली सूजन को कम करता है।
विटामिन ई और एंटीऑक्‍सीडेंट भी इसमें खूब होता है जो कैंसर से बचाता है।
एंटीऑक्‍सीडेंट अल्जाइमर और डिमेंशिया रोग से बचाता है।
इस ऑयल को गर्म कर अगर बालों में लगाया जाए तो बालों का रूखापन, डैंडरफ, बालों का टूटना जैसी दिक्कतें कम हो जाता है।

कैनोला तेल के नुकसान

कैनोला का तेल अनुवांशिक रूप से संशोधित हैं। -इसमें विटामिन ई के गामा-टोकोफेरोल होता है जो फेफड़े की क्षमता कम हो जाती है।
इस तेल मे हेक्सेन और ट्रांसफैट होता है जो लीवर की दिक्कत को बढ़ा सकता है।
कैनोला आयल में इरुसिक एसिड और ग्लूकोसिनोलेट होता है जो कई बार शरीर के नार्मल ग्रोथ को प्रभावित करता है।