मुंबई : केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने शनिवार को कहा कि सरकार ऐसी नयी औद्योगिक नीति पेश करने जा रही है, ताकि वैश्विक कंपनियां भारत को अपने उत्पादों के विनिर्माण और आपूर्ति की चेन में जोड़ने को प्रोत्साहित हों। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित सभी पक्षों को लाभ होगा। प्रभु ने कहा कि आज के समय में दूसरे देशों के साथ मिलजुल कर ही कारोबार बढ़ सकता है। उन्होंने देश के वस्तु निर्यात में लगातार हो रही कमी एवं वैश्विक व्यापार के लिए बढ़ती चुनौतियों के बीच यह बात कही है।

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उनके व्यापारिक साझीदारों पर गलत व्यापार तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाने के बाद विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लगता नजर आ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता अमेरिका एवं सबसे बड़े उत्पादक चीन के बीच व्यापार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति मंद पड़ गयी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में प्रभु ने कहा कि पूरी विनिर्माण प्रक्रिया एक ही भौगोलिक सीमा में पूरी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि इसके लिए वैश्विक मूल्य शृंखला, वैश्विक आपूर्ति शृंखला की जरूरत होती है। इसलिए हम नयी औद्योगिक नीति पर चर्चा कर रहे हैं और हमारे मंत्रालय ने उसे अंतिम रूप दे दिया है। नयी औद्योगिक नीति को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने का इंतजार है। इस नयी नीति में पारस्परिक रूप से लाभदायक मूल्य शृंखला और आपूर्ति शृंखला बनाये जाने पर जोर है।